आइडीए अधिकारियों को देखना चाहिए नागपुर का बीआरटीएस प्लान – कोर्ट

इंदौर। इंदौर के बीआरटीएस में फिलहाल दूसरे वाहन आवाजाही नहीं कर सकेंगे। मंगलवार को इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) के उस आवेदन पर सुनवाई हुई, जिसमें बीआरटीएस के 700 मीटर हिस्से में दूसरे वाहनों की आवाजाही की अनुमति मांगी गई है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस मामले में इंदौर नगर निगम, शासन और एआइसीटीएसएल से जवाब मांगा था। मंगलवार को पुलिस ने एक दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए कहा कि बीआरटीएस में दूसरे वाहनों को आवाजाही की अनुमति देने में उसकी सहमति है। याचिकाकर्ता ने इस पर आपत्ति ली और कोर्ट को बताया कि पुलिस ने प्रस्तुत दस्तावेज के पहले पैराग्राफ में असहमति और दूसरे में सहमति जताई गई है। असहमति और सहमति दोनों ही के पीछे कोई वजह नहीं बताई गई।
कोर्ट ने की मौखिक टिप्पणी
कोर्ट ने तर्क सुनने के बाद मौखिक टिप्पणी की कि अधिकारियों को नागपुर का बीआरटीएस प्लान देखकर आना चाहिए। कोर्ट ने बीआरटीएस में अन्य वाहनों की आवाजाही को लेकर फिलहाल अनुुमति देने से इनकार करते हुए सुनवाई आगे बढ़ा दी। अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी।
बीआरटीएस प्रोजेक्ट को लेकर चल रही हैं दो याचिकाएं
बीआरटीएस प्रोजेक्ट को चुनौती देने वाली दो जनहित याचिकाएं हाई कोर्ट में चल रही हैं। इन्हें याचिकाकर्ता किशोर कोडवानी ने दायर किया है। इनमें बीआरटीएस की मूल योजना को चुनौती देते हुए इसे नियम विरुद्ध बताया गया है और मांग की गई है कि बीआरटीएस को तोड़ने के आदेश दिए जाएं। पिछली सुनवाई पर आईडीए ने याचिकाओं में एक आवेदन देकर मांग की कि भंवरकुआं चौराहे पर प्रस्तावित फ्लाई ओवर बनने के दौरान बीआरटीएस के 700 मीटर लंबे हिस्से में सभी वाहनों को प्रवेश की अनुमति दी जाए।
कोर्ट ने नगर निगम, प्रशासन से मांगा था जवाब
इस पर कोर्ट ने नगर निगम, प्रशासन और एआइसीटीएसएल से इस संबंध में जवाब देने को कहा था। मंगलवार को याचिकाकर्ता ने कोर्ट में तर्क रखा कि जिला योजना समिति की कोई रिपोर्ट आईडीए के आवेदन के साथ संलग्न नहीं है। मेयर इन कौंसिल और निगम परिषद में बीआरटीएस को लेकर कोई ठहराव प्रस्ताव भी नहीं है।

