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मध्यप्रदेश

किसी भी शराब ठेकेदार ने नहीं लिया लाइसेंस 11 लाख की हानि

दमोह। बियर बार के साथ- साथ देशी और विदेशी शराब दुकानों को भी फुड लाइसेंस लेना था, लेकिन खाद्य एवं औषधि विभाग के निर्देशों का किसी भी शराब दुकान संचालक ने पालन नहीं किया। जबकि इसके तहत शराब दुकानों और बियर बार को फुड सेफ्टी एंड स्टे्रजराइस अर्थारिटी ऑफ इंडिया का लाइसेंस जारी किया जाना था। लाइसेंस लेने के लिए खाद्य एवं औषधि विभाग द्वारा आबकारी विभाग को 10 पत्र लिखे जा चुके है। लेकिन विभाग ने अब तक शराब दुकानदारों को 10 वर्षो बाद भी लाइसेंस बनवाने के नोटिस भी जारी नहीं किए हैं।

दमोह जिले में 58 शराब दुकानें है इनमें 41 देशी और 16 विदेशी शराब दुकानें थी, लेकिन वर्तमान में देशी व विदेशी दोनों के एक साथ शामिल होने पर कुल 58 दुकाने हो गई है। वर्तमान में इन शराब दुकानों को 10 फीसदी महंगे रेट पर दिया हुआ है। इन शराब दुकानों पर प्रतिदिन एक करोड़ रूपये की शराब बेची जा रही है। यहां बेची जा रही शराब की सैम्पलिंग नहीं होने से यह पता ही नहीं चलता की शराब की क्वालिटी कैसी है।

आबकारी विभाग को लिखे 10 पत्र

खाद्य एवं औषधि विभाग द्वारा आबकारी विभाग को इस संबंध में वर्ष 2013 से लागू ऑनलाइन रजिस्टे्रशन के पूर्व 5 अगस्त 2011 से आज तक 10 वार पत्र देकर अवगत कराया जा चुका है कि शराब दुकानदारों को फुड लाइसेंस लेना जरूरी है, लेकिन आज तक आबकारी विभाग ने इन पत्रों का न तो जवाब दिया और ना ही उस पर किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाई की।

11 लाख के राजस्व की हानि

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा इस फुड लाइसेंस को लेने के लिए प्रतिवर्ष 2 हजार रूपये लाइसेंस फीस निर्धारित की गई है जिस कारण से जिले की 58 दुकानों से विभाग को 1 लाख 16 हजार रूपये प्रतिवर्ष राजस्व की आय होना थी, लेकिन इन 10 वर्षो में विभाग द्वारा इस मामले में किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाई न किए जाने से अभी तक 11 लाख 60 हजार रूपये का नुकसान शासन को किया जा चुका है।

नहीं होती शराब की सैम्पलिंग

फुड का लाइसेंस नहीं बनने से खाद्य सुरक्षा विभाग शराब दुकानों पर बेची जा रही करीब 160 कंपनियों की शराब की सैम्पलिंग नहीं करता है जिससे पता नहीं चल पाता कि शराब आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह तो नहीं है। वर्तमान में खाद्य विभाग दुकान पर जाकर सैम्पलिंग कर सकता है, लेकिन उसे लाइसेंस नहीं होने से दुकान से सील करना पड़ेगा। इसलिए पहले फुड लाइसेंस जारी किया जाएगा इसके बाद शराब का सैम्पलिंग लेकर प्रयोगशाला से जांच कराई जाएगी।

क्या कहता है नियम

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग से लाइसेस लेना जरूरी है। इसी के तहत एल्कोहल पेय को भी खाद्य की परिभाषा में सम्मिलित किया गया है। इसके तहत जिले की समस्त देशी व विदेशी शराब की दुकानों, भंडार गृह, निर्माताओं की अधिनियम के तहत रजिस्ट्रेशन कराना व लाइसेंस लेना जरूरी है।लाइसेंस नहीं मिलने की स्थिति में खाद्य विभाग केस दर्ज कर एडीएम कोर्ट में पेश कर सकता है इसके तहत जुर्माना किया जा सकता है।

एक दुकान को किया स्थानांतरित

दमोह शहर की महाकाली चौराहे पर स्थित शराब दुकान को बंद करते हुए ग्राम मुड़िया में स्थापित किया गया है।

इनका कहना है

जिले में किसी भी शराब ठेकेदार द्वारा फुड लाइसेेंस नहीं लिया गया है इसके लिए अनेक बार पत्र लिखकर विभाग को अवगत भी करा दिया गया है, लेकिन आबकारी विभाग ने आज तक इस दिशा में किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की।

राकेश अहिरवाल

जिला खाद्य एवं औषधि प्रशासन अधिकारी।

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