ब्रेकिंग
सुप्रीम कोर्ट में तय सुनवाई टल गई है, भोपाल में रहवासी इलाकों व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण खड़े हनुमान मंदिर को लेकर बढ़ा विरोध, उमा भारती ने CM से कहा- निकालें बीच का रास्ता मोदी से मुलाकात पर दुनिया की नजर,दिल्ली पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ‘हनुमान अंश’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा बरकरार, 36वें दिन कमाई 200 करोड़ के पार PM मोदी के जन्मदिन पर MP सरकार का बड़ा तोहफा, 17 सितंबर से 50 लाख लोगों की होगी फ्री रजिस्ट्री रायपुर में होगा 14वां इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026, सीएम विष्‍णु देव साय मुख्‍य अतिथि हाईकोर्ट सख्त, 7 दिन में दिखाने होंगे अनुमति के दस्तावेज, भोपाल में रिहायशी इलाकों में चल रहे मॉल-हो... दिल्ली में नितिन नवीन से नरोत्तम मिश्रा की मुलाकात, एमपी में सियासी हलचल तेज भोपाल मास्टर प्लान को CM Mohan Yadav की सैद्धांतिक मंजूरी,जन्माष्टमी पर जारी हो सकता है ड्राफ्ट नगर निगम ने शुरू की सीलिंग,भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रहे कमर्शियल अड्डों पर बड़ी कार्रवाई
देश

आप भी घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आइए इस मेले में…ये बन रहे हैं इसके आकर्षण का केंद्र

रायपुर।  हरियाली मन को बहुत भाती है। घर के बगीचे के साथ-साथ लोग बालकनी और बेडरूम में भी पाट में पौधे लगाते हैं। कमरे को सजाने के लिए भी लोग अलग-अलग डिजाइन के फ्लावर पाट का उपयोग करते हैं। ऐसे ही उल्लू, कछुआ, खरगोश, बतख, हाथी, हिरण, मुर्गी आदि डिजाइन के आकर्षक पाट्स बीटीआइ ग्राउंड में चल रहे गोंडवाना महोत्सव मेले में बिक्री के लिए आए हैं। इन्हें लोग खूब पसंद कर रहे हैं। अलग-अलग डिजाइन के पाट लेकर लोग घरों और बालकनियों में पौधे लगाकर सजा रहे हैं।

चीनी मिट्टी की ही अलग-अलग चित्रकारी की हुई वाल हैंगिंग भी मेले में है, जिन्हें लोग बालकनी और गेट पर पौधे लगाकर लटका रहे हैं। उत्तर प्रदेश के बुलंद शहर से आए शमीम खान ने बताया कि उनके स्टाल में चीनी मिट्टी के बने बर्तन और होम डेकोरेटिव के 50 प्रकार के आयटम हैं। इनमें बाथरूम सेट, डोसा व समोसा रखने के लिए प्लेट, कप, केतली आदि लोगों को पसंद आ रही है। गमलों में फ्लोरल प्रिंटेड स्टाइल में फूल-पत्तियां और अलग-अलग डिजाइन के प्रिंट उकेरे गए हैं, जो लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। उनके स्टाल पर 200 रुपये से लेकर 500 रुपये तक के सामान उपलब्ध हैं।

धान और धागे से बनी लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति

दंतेवाड़ा की जसविंदर कौर धान और धागे से लक्ष्मी, गणेश, सरस्वती और दंतेश्वरी माता की मूर्तियां बनाकर मेले में बिक्री के लिए लाई हैं। इन्हें काफी पसंद किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एक धान को धागे से लपेटकर देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाती हैं। एक मूर्ति को बनाने में दो से तीन दिन लग जाता है। लक्ष्मी, गणेश और सरस्वती की मूर्तियों की फ्रेमिंग भी बनवाकर लाई हैं, जिसकी कीमत 1500 रुपये है। लोग इन्हें घर के दरवाजे और पूजा घर में रखते हैं। धान से बनी लक्ष्मी, गणेश और सरस्वती की मूर्तियों की पूजा करना शुभ माना जाता है।

प्रतिदिन होते हैं सांस्कृतिक कार्यक्रम

मां पीतांबर जन सेवा समिति की ओर से आयोजित इस मेले में देश के अलग-अलग राज्यों के हस्तशिल्प कारीगरों ने अपने उत्पादों के स्टाल लगाए हैं। यहां पहुंच रहे लोगों के मनोरंजन के लिए प्रतिदिन शाम को लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जा रही है। आयोजक वैभव सिंह सिसोदिया ने बताया कि मेला दोपहर दो बजे से रात 11 बजे तक खुला रहता है।

झूला और फूड स्टाल भी

मेले में फूड जोन खास है, जहां बच्चों और बड़ों के स्वाद के अनुसार खाने की चीजें उपलब्ध हैं। यहां चटपटे व्यंजनों का स्वाद लिया जा सकता है। यहां सात प्रकार के झूले लगाए गए हैं, जिनमें एक आकाश झूला भी शामिल है। बच्चों के मनोरंजन के लिए यहां कई अन्य चीजें भी उपलब्ध हैं।

Related Articles

Back to top button