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मध्यप्रदेश

दहेज लेने वाले अपने बेटे को हस्बैंड नहीं सर्वेंट बना देते हैं – देवकीनंदन ठाकुर

भोपाल। शहर के टीटी नगर दशहरा मैदान पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा में बुधवार को देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने श्रद्धालुओं से दहेज की बुराई से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि अपने बेटे- बेटियों के विवाह में दहेज लेने-देने से बचें और दहेज विहीन विवाह करें। दहेज के लालचियों को सुयोग्य और घर की सेवा करने वाली बहू नहीं मिलती है। जो अपने बेटे के लिए दहेज लेता है, वह अपने बेटे को हस्‍बैंड नहीं सर्वेंट बना देता है। लक्ष्मी स्वरूपा बहू चाहिए तो दहेज में लक्ष्मी नहीं मांगो। बच्चियों के पिता को चाहिए कि वह समझे जो अपने बेटे को बेच सकता है, वह आपकी बेटी को कैसे खुश रख सकता है। कथा में महाराज ने भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव का सुंदर वर्णन सुनाया। सभी भक्तों ने श्री कृष्ण जन्मोत्सव को बड़ी धूमधाम से मनाया।

नर्क से बचने का तरीका है भगवत भजन

देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने कहा आपको दिख रहा है, वह भी हमारे पुराणों में वर्णित है जो आपको नहीं दिख रहा है, वह हमारे पुराणों में है तो कभी न कभी उन पर विश्वास करना ही पड़ेगा। युवाओं में आजकल मांस खाने की बड़ी होड़ है। टीवी चैनल्स में एड भी ऐसे आते हैं, जिन्‍हें देखकर भी मांस खाने की प्रवृत्ति जागृत हो रही है। एक चीज समझ लीजिए, मांस भक्षण करने से आपका आहार अशुद्ध होता है। आहार अशुद्ध होने से आपका विचार अशुद्ध होता है और विचार अशुद्ध होने से आपका कर्म अशुद्ध होता है और कर्म शुद्ध हो जाने के कारण आपको परिणाम भी उतना ही खतरनाक मिलता है। महाराज ने श्रद्धालुओं को गाय की महिमा भी बताई। हमारी मां तो अपने आंचल से हमें दो चार साल दूध पिलाती है, गौमाता तो जब तक हम मर ना जाएं, तब तक अपने आंचल का दूध देती है। जिस गांव की सेवा पूजा भगवान श्रीकृष्ण करते हैं, उस गौमाता के मांस को खाने में तुम्हें शर्म नहीं आती और टीवी पर इंटरव्यू देते हो। शर्म आनी चाहिए।

इतिहास गवाह है कि प्रभु हमेशा वहां पहुंचे हैं जहां दिल से भक्त ने पुकारा है

श्रीमद्भागवत कथा चतुर्थ दिवस उन्‍होंने भगवान विष्‍णु के वामन अवतार का प्रसंग सुनाया। भगवान विष्णु के दशावतारों में पांचवा अवतार और मानव रूप में अवतार था। जिसमें भगवान विष्णु ने एक वामन के रूप में इंद्र की रक्षा के लिए धरती पर अवतार लिया। महाबली ने 100 में से 99 अश्वमेध यज्ञ पूरे कर लिए थे। अंतिम अश्वमेध यज्ञ समाप्त होने ही वाला था कि तभी दरबार में दिव्य बालक वामन पहुंच गया। महाबली ने कहा कि आज वो किसी भी व्यक्ति को कोई भी दक्षिणा दे सकता है। महाबली उस बालक के पास गया और स्नेह से कहा “आप अपनी इच्छा बताइए। उस बालक ने महाबली से कहा “मुझे केवल तीन पग जमीन चाहिए, जिसे मैं अपने पैरों से नाप सकूं। जैसे ही महाबली ने अपने मुंह से ये शब्द निकाले वामन का आकार धीरे धीरे बढ़ता गया। वो बालक इतना बढ़ा हो गया कि बाली केवल उसके पैरों को देख सकता था। वामन आकार में इतना बढ़ा था कि धरती को उसने अपने एक पग में माप लिया। दुसरे पग में उस दिव्य बालक ने पूरा आकाश नाप लिया। अब उस बालक ने महाबली को बुलाया और कहा मैंने अपने दो पगों में धरती और आकाश को नाप लिया है। अब मुझे अपना तीसरा कदम रखने के लिए कोई जगह नहीं बची, तुम बताओ मैं अपना तीसरा कदम कहां रखूं। महाबली ने उस बालक से कहा कि प्रभु मैं वचन तोड़ने वालों में से नहीं हूं। आप तीसरा कदम मेरे शीश पर रखिए। भगवान विष्णु ने भी मुस्कुराते हुए अपना तीसरा कदम महाबली के सिर पर रख दिया। वामन के तीसरे कदम की शक्ति से महाबली पाताल लोक में चला गया। अब महाबली का तीनो लोकों से वैभव समाप्त हो गया और सदैव पाताल लोक में रह गया। इंद्रदेव और अन्य देवताओं ने भगवान विष्णु के इस अवतार की प्रशंशा की और अपना साम्राज्य दिलाने के लिए धन्यवाद दिया।

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