सुप्रीम कोर्ट में तय सुनवाई टल गई है, भोपाल में रहवासी इलाकों व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण
जस्टिस के अवकाश पर होने के कारण अब सुनवाई बाद में होगी।

भोपाल के रहवासी इलाकों में चल रहे कारोबार को लेकर आज मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अहम सुनवाई टल गई है। दरअसल जस्टिस के अवकाश पर होने के कारण मामला सूचीबद्ध नहीं हो सका है।

62 हजार 500 दुकानों का होने वाला था फैसला
आज मंगलवार को भोपाल के रहवासी इलाकों में चल रहे कारोबार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने वाली थी। हालांकि अब यह सुनवाई टल गई है। दरअसल जस्टिस के अवकाश पर होने के कारण मामला सूचीबद्ध नहीं हो सका है। बता दें कि शहर के करीब 62,500 प्रतिष्ठानों पर असर डालने वाले इस मामले में फैसले की उम्मीद थी। नगर निगम अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट और हलफनामा पहले ही कोर्ट में जमा कर चुका है जबकि रहवासी पक्ष ने कार्रवाई को अधूरा और भ्रामक बताते हुए अपने दस्तावेज पेश किए हैं।
भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका देते हुए राज्य सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
साथ ही इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले सभी राहत आदेश (स्टे ऑर्डर) निरस्त कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
इस दौरान नगर निगम को कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करना है। इसके चलते ही नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई की गई। अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की जा चुकी है।
रहवासियों की यह मांग
- रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियां गलत है। इन्हें बंद किया जाए।
- कमर्शियल गतिविधि होने से आवासीय क्षेत्र में व्यवधान जैसे- शोर, भीड़ और सार्वजनिक शांति भंग जैसी स्थितियां बन रही हैं।
- असामाजिक तत्वों की गतिविधियां भी बढ़ रही हैं। इस वजह से सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
- स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता हो रही है। बढ़ते ट्रैफिक की वजह से हादसों का खतरा बना रहता है।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुई थी कार्रवाई
वहीं नगर निगम के अनुसार अब तक की कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट कोर्ट में जमा कर दी गई है। जबकि दूसरी ओर याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का कहना है कि कई सील किए गए प्रतिष्ठान दोबारा खुल गए और कार्रवाई वास्तविक स्थिति के अनुरूप नहीं हुई। अगस्त की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने आवासीय इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। शहर में सूचीबद्ध करीब 62,500 प्रतिष्ठानों में से 8,084 को नोटिस जारी किए गए। इसके बाद तीन दिन तक सीलिंग अभियान चलाकर 190 प्रतिष्ठानों को बंद कराया गया।
सड़क पर उतर आए थे व्यापारी
दरअसल कार्रवाई शुरू होते ही शहर के व्यापारी विरोध में सड़क पर उतर आए थे। वहीं विरोध बढ़ने के बाद नगर निगम ने सीलिंग अभियान रोक दिया और पिछले करीब 15 दिनों से इस दिशा में कोई नई कार्रवाई नहीं हुई। रहवासी पक्ष का कहना है कि निगम की कार्रवाई सभी क्षेत्रों में समान रूप से नहीं हुई। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दस्तावेज पेश कर दावा किया है कि जिन प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई दिखाई गई उनमें से कई दोबारा संचालित हो रहे हैं। उनका कहना है कि कोर्ट में प्रस्तुत रिपोर्ट और जमीन पर स्थिति में अंतर है। जबकि नगर निगम का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार की गई कार्रवाई का पूरा विवरण हलफनामे के साथ जमा किया जा चुका है। अब आगे की दिशा कोर्ट के अगले आदेश के बाद तय होगी।
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10 सदस्यीय जांच समिति पर भी रोक
भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई की थी। कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार की ओर से गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। साथ ही मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले राहत के आदेश भी निरस्त कर दिए थे।किसी भी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी भी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई में नगर निगम की कार्रवाई और पेश की गई रिपोर्ट पर आगे की स्थिति साफ हो सकती है।

