2008 में पहली बार दक्षिण में खिला था कमल येदियुरप्पा बने थे हीरो

विधानसभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक में सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। इस बार भी मुख्य मुकाबले भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस के बीच है। सवाल यही है कि क्या भाजपा लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल करने में कामयाब रहेगी?
बीएस येदियुरप्पा को अब तक चार बार कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनने का मौका है। हालांकि वे एक बार भी पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। उन्हें 2007 में भाजपा-जेडीएस की गठबंधन सरकार में सीएम बनने का मौका मिला। यह सरकार 7 दिन ही टिक सकी, क्योंकि विभागों के बंटवारे पर सहमति नहीं बनने के बाद जेडीएस नेता कुमारस्वामी ने हाथ खींच लिए।
इसके बाद मई 2008 में पहली बार भाजपा की अपने दम पर सरकार बनी और येदि सीएम बने। उनका यह कार्यकाल करीब 3 साल चला। इसके बाद भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
इसके बाद 2018 में येदियुरप्पा तीन दिन मुख्यमंत्री रहे। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी जरूर बनी, लेकिन बहुमत से दूर रही।
जुलाई 2019 में जेडीएस के 17 विधायकों की बगावत के बाद येदियुरप्पा फिर सीएम बने, लेकिन पार्टी के अंदर ही विरोध होने के कारण 2 साल बाद इस्तीफा देना पड़ा।
कर्नाटक की राजनीति में यह बात भी ध्यान देने वाली है कि राज्य के इतिहास में सिर्फ 3 नेता अपना कार्यकाल पूरा कर पाएं हैं। ये हैं – एस निजलिंगप्पा, डी देवराज और सिद्धारमैया।

