सीएम मोहन यादव की बड़ी सौगात, ‘भोपाल मास्टर प्लान-2047’ का ड्राफ्ट तैयार
अभी नहीं कर सकेंगे कारोबार रहवासी इलाके में - दावे-आपत्तियां ली जाएंगी

रहवासी क्षेत्र में कमर्शियल एक्टिविटी पर सख्ती
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, जिन इलाकों का लैंड यूज विशेष रूप से रहवासी तय है, वहां व्यावसायिक गतिविधियां नहीं चल सकेंगी। ऐसे स्थानों पर कमर्शियल एक्टिविटी मिलने पर पहले सीलिंग की कार्रवाई होगी। ड्राफ्ट में बड़ी सड़कों के आसपास कमर्शियल एक्टिविटी के लिए जगह का प्रावधान है, लेकिन रहवासी इलाकों के अंदर कारोबार की अनुमति नहीं होगी।
साथ ही, जिन क्षेत्रों का लैंड यूज स्पष्ट रूप से रहवासी या व्यावसायिक तय नहीं है, वहां मिश्रित उपयोग पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल ऐसे मामलों में यथास्थिति रहेगी और कागजी व प्रशासनिक प्रक्रिया जारी रह सकती है।
21 साल बाद मास्टर प्लान के ड्राफ्ट का ऐलान; कैसी होगी सिटी


- प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण,
- आधुनिक दृष्टिकोण एवं नागरिक हितैषी नियोजन,
- सुधारोन्मुख एवं परिवर्तनकारी नियोजन और आत्मनिर्भर एवं आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने वाला विकास शामिल हैं।
गौरतलब है कि भोपाल मास्टर प्लान के ड्राफ्ट की कई विशेषताएं हैं। इसमें: प्राकृतिक संवेदनशीलता सम्मत नियोजन किया है। भोज ताल और इसके जलग्रहण क्षेत्र को संरक्षित रखने की अवधारणा को आधारभूत रखते हुए योजना तैयार की गई है। इसके अतिरिक्त पहाड़ियों, वन क्षेत्रों, तालाबो एवं जलाशयों, बाघ भ्रमण क्षेत्रों के संरक्षण के भी समुचित प्रावधान ड्राफ्ट में किए गए हैं। मास्टर प्लान ड्राफ्ट में आर्थिक विकास एवं रोजगार सृजन सम्बन्धी प्रस्ताव हैं। इसे विकास योजना इस दृष्टिकोण के साथ तैयार किया गया है कि पर्यावरणीय संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास किया जा सके। वर्तमान परिदृश्य के साथ साथ अगली पीढ़ी को शहर में पर्याप्त अवसर प्राप्त हो सकें। इसके लिए लगभग 3000 हेक्टर भूमि ग्रोथ कॉरीडोर के अंतर्गत प्रस्तावित की गई है। मास्टर प्लान ड्राफ्ट में महानगरीय अवधारणा भोपाल विकास योजना-2047 के प्रस्ताव इस प्रकार रखे गए हैं कि भोपाल मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के साथ इसका सामंजस्य सहज रूप से हो सके और शहर में होने वाले विकास तथा मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के संसाधनों से परस्पर लाभान्वित हो सके।-
भोपाल की सुरक्षा व्यवस्था होगी चाक-चौबंध
विकास योजना के कियान्वयन का प्रभावी पर्यवेक्षण रियल टाईम पर्यवेक्षण संभव हो सके और अप्राधिकृत निर्माण तथा नगर की मोबिलिटी एवं क्रियान्वयन की समस्याओं का यथासमय निराकरण हो सके, इसके लिए डिजीटल ट्विन सिटी की व्यवस्था रखे जाने के प्रस्ताव भोपाल मास्टर प्लान ड्राफ्ट में दिए गए हैं। मास्टर प्लान ड्राफ्ट में शहर की सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ हो सके, इसके लिए भी प्रावधान रखे गए हैं। इसमें सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए निजी सीसीटीवी कैमरो की नेटवर्किंग, सार्वजनिक भवनों की बाउण्ड्री वॉल को पारदर्शी रखने, सुरक्षित यातायात व्यवस्था के प्रावधान सम्मिलित हैं। भोपाल मास्टर प्लान ड्राफ्ट में मल्टीलेवल पार्किंग, मेकेनाईज्ड पार्किंग, सामुदायिक खुले क्षेत्रों के नीचे पार्किंग की व्यवस्था, आरओबी-फ्लाईओवर के नीचे पार्किंग व्यवस्था, सार्वजनिक मार्गो पर आरडब्ल्यूए द्वारा पार्किंग शुल्क लेने के लिए प्रावधान, बेसमेंट पार्किंग के लिए भूखण्डों का संयुक्तिकरण मान्य किए जाने जैसे प्रावधान रखे गए हैं। -
ड्राफ्ट में ग्रोथ कॉरीडोर पर फोकस
भोपाल मास्टर प्लान ड्राफ्ट में ग्रोथ कॉरीडोर पर फोकस किया गया है। इसमें निवेश सम्मत वातावरण तैयार करने के दृष्टिकोण से 51 किलोमीटर लम्बे ग्रोथ कॉरीडोर की परिकल्पना की गई है। यह ग्रोथ कॉरीडोर एजुकेशन नॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (EKAI) सिटी, एयरपोर्ट, प्रस्तावित सीएमयू, लॉजिस्टिक भंडारण एवं थोक परिक्षेत्र के साथ-साथ विभिन्न उपनगरों को भी जोड़ता है।
इस कॉरीडोर पर मिश्रित उपयोग के साथ उच्च घनत्व का विकास परिकल्पित है। इस कॉरीडोर में लोक परिवहन के लिए बीआरटीएस कॉरीडोर प्रस्तावित है, जिसका भविष्य में एमआरटीएस में उन्नयन किया जा सकेगा।
इस क्षेत्र में होटल एवं हास्पिटेलिटी, स्वास्थ्य सेवा, अन्य व्यापार, आईटी सेक्टर, एआई एवं डाटा सेन्टर, लॉजिस्टिक, थोक व्यापार, हाईपर मार्केट, मॉल मल्टीप्लेक्स, कार्पोरेट ऑफिस, विभिन्न संस्थान, ऐजुकेशन हब, हाउसिंग इत्यादि जैसे रोजगार उन्मुखी गतिविधियां, मिश्रित उपयोग के रूप में विकसित किए जा सकेंगे। इस क्षेत्र में असीमित एफएआर के प्रावधान रखे गए हैं।
51 किलोमीटर का होगा ग्रोथ कॉरिडोर
मास्टर प्लान में करीब 3000 हेक्टेयर जमीन ग्रोथ कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित की गई है। इसके साथ ही 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर की परिकल्पना की गई है। यह कॉरिडोर ईकेएआई सिटी, एयरपोर्ट, प्रस्तावित सीएमयू, लॉजिस्टिक और थोक व्यापार क्षेत्र सहित विभिन्न उपनगरों को जोड़ेगा। ग्रोथ कॉरिडोर में होटल, स्वास्थ्य सेवाएं, आईटी, एआई और डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक, थोक व्यापार, हाइपर मार्केट, मॉल, मल्टीप्लेक्स, कॉरपोरेट ऑफिस, एजुकेशन हब और आवास जैसी गतिविधियां विकसित की जा सकेंगी। यहां मिश्रित उपयोग और ज्यादा घनत्व वाले विकास का प्रस्ताव है। इस कॉरिडोर में लोक परिवहन के लिए बीआरटीएस कॉरिडोर का प्रस्ताव है, जिसे भविष्य में एमआरटीएस में बदला जा सकेगा। विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम और इंदौर मार्गों को भी ग्रोथ कॉरिडोर से जोड़ने की योजना है।भौंरी में बनेगी एजुकेशन हब
भौंरी क्षेत्र में एजुकेशन नॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ईकेएआई) सिटी विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य शिक्षा और एआई से जुड़े संस्थानों को बढ़ावा देना है।इन संस्थानों को अब एफएआर खरीदने की जरूरत नहीं
अनाथालय, मूक-बधिर स्कूल, हॉस्टल, दिव्यांगों के लिए विशेष स्कूल, वृद्धाश्रम और रैन बसेरों जैसे संस्थानों को अब FAR खरीदने की जरूरत नहीं होगी। इससे ऐसे संस्थानों के निर्माण और विस्तार में राहत मिलेगी।
कॉलोनियों में खुले क्षेत्र का दायरा भी बढ़ेगा
भानपुर खंती के पुनर्विकास की योजना में गोल्फ कोर्स प्रस्तावित किया गया है। कॉलोनी स्तर पर खुले क्षेत्र का प्रावधान 10% से बढ़ाकर 12% किया गया है। इसके साथ 2% सर्विस एरिया भी अनिवार्य होगा। इससे कॉलोनियों में हरियाली और खुले स्थान का दायरा बढ़ेगा।
अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को FAR खरीदने की जरूरत से छूट देने का प्रावधान है। इसके साथ प्रवासी नागरिकों के लिए रेंटल हाउसिंग को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
भौंरी में ईकेएआई सिटी, एआई आधारित इकोनॉमी को बढ़ावा
भौंरी के एजुकेशन हब को अपग्रेड कर ईकेएआई सिटी के रूप में विकसित करने की योजना है। इसे इनोवेशन और AI आधारित नॉलेज इकोनॉमी के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।


