हनुमान जन्मोत्सव पर गुजरात के सालंगपुर धाम में हुआ 54 फीट ऊंची बजरंग बली की प्रतिमा का अनावरण

हनुमान जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर सालंगपुर धाम के हनुमान मंदिर परिसर में 54 फीट ऊंची बजरंग बली की प्रतिमा किग आफ सालंगपुर का बुधवार को अनावरण किया गया। सात किलोमीटर दूर से इसके दर्शन होंगे। इसका वजन 30 हजार किलोग्राम है। इसका निर्माण पंचधातु से किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं आचार्य राकेश प्रसाद महाराज गुरुवार को सालंगपुर में 40 करोड़ की लागत से बनाए गये कष्टभंजन देव भोजनालय का लोकार्पण करेंगे। कुंडलधाम के ज्ञानजीवन दास स्वामी के मार्गदर्शन में हरियाणा के मूर्तिकार नरेश कुमावत ने इसका निमार्ण किया है। पहले यह प्रतिमा उत्तर मुखी थी, लेकिन बाद में वास्तु के हिसाब से इसे दक्षिणमुखी रखा गया। प्रतिमा के चारों ओर लाल पत्थर की 36 गुमटियां बनाई गई हैं। मूर्ति के चारों ओर चार विशाल बगीचे तैयार किये गये हैं, जहां एक साथ 10 से 12 हजार दर्शनार्थी बैठ सकते हैं। रात में यहां लाइट एंड साउंड शो का आयोजन होगा।
क्या है इस मंदिर की पौराणिक कथा
कष्टभंजन हनुमान मंदिर सारंगपुर के पीछे एक पौराणिक मान्यता जुड़ी है जिसमें बताया गया है कि कैसे हनुमान जी ने शनि प्रकोप से अपने भक्तों को यहां मुक्ति दिलाई थी। कहते हैं कि एक समय शनिदेव का प्रकोप काफी बढ़ गया था। इस कष्ट से बचने के लिए पृथ्वीवासियों ने हनुमानजी से प्रार्थना की।
भक्तों के कष्ट से क्रोधित होकर हनुमान जी, शनिदेव से युद्ध करने चल पड़े। जब शनिदेव को यह पता चला तो वे बहुत डर गए और बचने के लिए उपाय सोचने लगे। शनिदेव जानते थे कि हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं और वे शरणागत स्त्री पर कभी हाथ नहीं उठा सकते, इसलिए उन्होंने स्त्री रूप धारण कर लिया।
हनुमान जी के चरणों में गिरकर क्षमा मांगने लगे और भक्तों पर से अपना प्रकोप भी हटा लिया। तभी से सारंगपुर के कष्टभंजन हनुमान मंदिर में शनिदेव को हनुमान जी के चरणों में स्त्री रूप में ही पूजा जाता है और भक्तों के कष्टों का निवारण करने के लिए इस मंदिर को कष्टभंजन हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है।

