ब्रेकिंग
नीलकंठ मिश्रा बने वर्ल्ड बैंक में भारत के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर संतान प्राप्ति की इच्छा है? पुरुषोत्तम मास में श्रीकृष्ण को चढ़ाएं ये खास फल, निःसंतान दंपति को मिले... सुशासन तिहार: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सुनीं 17 गांवों की समस्याएं विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किया ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान 2026-27 क... मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 5 जून को पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के मेधावी 22 बच्चों को करेंगे सम्म... मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कैंसर पीड़ित महिला के उपचार हेतु स्वीकृत की 21.69 लाख रुपये की सह... बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का नाम अब होगा ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’, ईसी से प्रस्ताव मंजूर सुशासन तिहार शिविर...78 आवेदनों का मौके पर ही निपटारा:मंदिर हसौद में राशन कार्ड, आधार और श्रम कार्ड ... लाखों टन दुर्लभ खनिज की संभावना,छत्तीसगढ़ में देश की पहली ‘निकल-कॉपर’ खदान में 1.3 किमी तक भंडार मिल... सीएम मोहन यादव ने जानकारी दी, एमपी में यूसीसी जल्द लागू होगी l
देश

नवरात्रि के नौ दिनों देवी के अलग-अलग स्वरूपों की होगी पूजा देखें पूरा कैलेंडर और कैसे करें घट स्थापना

हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। इसे पूरे 9 दिनों तक मनाया जाता है और देवी के भक्तों में इसे लेकर काफी उत्साह रहता है। बता दें कि साल भर में कुल 4 नवरात्रि होती हैं जिनमें दो मुख्य नवरात्रि मानी जाती हैं एक चैत्र और दूसरी शारदीय नवरात्रि।

चैत्र नवरात्रि हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होती है और नवमी तिथि को इसका समापन होता है। प्रतिपदा तिथि के दिन सभी भक्त अपने घरों में घट स्थापना कर देवी का आव्हन करते हैं और इसके 9 दिनों में मां दुर्गा के नौ सिद्ध स्वरूपों की विधिवत पूजा की जाती है। आइए जानते हैं प्रतिपदा से नवमी तिथि तर सभी देवियों के नाम व घटस्थापना की विधि-

नवरात्रि में घट स्थापना या कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। कलश स्थापना को घट स्थापना भी कहा जाता है। मान्यता है कि नवरात्रि में कलश स्थापना करने से मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है और इसके बाद नौं दिनों तक मां शक्ति घरों में विराजमान रहकर भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं।

कैसे करें घटस्थापना?

नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान कर मंदिर की सफाई करें या फिर जमीन पर माता की चौकी लगाएं। इसके बाद सबसे पहले भगवान गणेश जी का नाम लें और मां दुर्गा के नाम की अखंड ज्योत जलाएं और मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालें। मिट्टी में जौ के बीच डाल दें। इसके बाद कलश या लोटे पर मौली बांधें और उस पर स्वास्तिक बनाएं।

लोटे (कलश) पर कुछ बूंद गंगाजल डालकर उसमें दूब, साबुत सुपारी, अक्षत और सवा रुपया डाल दें और फिर लोटे (कलश) के ऊपर आम या अशोक 5 पत्ते लगाएं और नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर रखें। अब इस कलश को जौ वाले मिट्टी के पात्र के बीचो बीच रख दें और फिर माता के सामने व्रत का संकल्प लें और अपना व्रत शुरू करें।

नवरात्रि के 9 दिन और देवी के नौं स्वरुप

– 22 मार्च 2023 दिन बुधवार- पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा

– 23 मार्च 2023, गुरुवार – दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

– 24 मार्च 2023, शुक्रवार- तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा

– 25 मार्च 2023, शनिवार- चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा

– 26 मार्च 2023, रविवार- पंचमी को मां स्कंदमाता की पूजा

– 27 मार्च 2023, सोमवार- छठा दिन मां कात्यायनी देवी की पूजा

– 28 मार्च 2023, मंगलवार- सप्तमी तिथि को मां कालरात्रि की पूजा

– 29 मार्च 2023, बुधवार- आठवां दिन मां महागौरी की पूजा

– 30 मार्च 2023, गुरुवार, राम नवमी – नवमी तिथि को मां सिद्धिदात्री की पूजा

Related Articles

Back to top button