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कत्थक नृत्य…गणित के कठिन सवालों का हल चुटकी में

बिलासपुर ।बाल विज्ञानियों की ऊंची सोच का कमाल,कदमताल से कठिन सवालों का निकाल रहे हल कहावत है आवश्यकता अविष्कार की जननी है। इसे स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम गर्वनमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल के बाल विज्ञानियों ने सही कर दिखाया है। कोरोना संक्रमणकाल में दो वर्ष तक स्कूल व कालेज में पढ़ाई नहीं हो पाई है। आफलाइन पढ़ाई पूरी तरह बंद थी। संक्रमणकाल में एक नया ट्रेंड शुरू हुआ। आनलाइन पढ़ाई का नया और चमकदार दौर। तब शिक्षक और पढ़ने वाले छात्र दोनों को अटपटा लग रहा था कि आनलाइन पढ़ाई होगी कैसे और वे करेंगे कैसे। आनलाइन पढ़ाई के दौर में उनको समझ में आएगा भी या नहीं। संक्रमण के उस दौर में चमकदार विकल्प सामने आया। आनलाइन पढ़ाई ने कुछ इस अंदाज में क्रेज बनाया कि अब आफलाइन पढ़ाई करने वाले छात्र हो या फिर प्रतियोगी परीक्षा दिलाने वाले उम्मीदवार। आनलाइन पढ़ाई पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं और इसी के जरिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे हैं। कोरोना के दौर में पढ़ाई से ध्यान हटने के बाद अब तक स्कूली छात्रों का मन ठीक से लग ही नहीं रहा है। लिखित परीक्षा में सवालों के जवाब हल करने में इस बार भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। दिक्कतों को देखते हुए अटल टिंकरिंग लैब के बाल विज्ञानियों ने नया तरीका खोज निकाला है। नृत्य के जरिए पढ़ाई का नया ट्रेंड। कत्थक के कदमताल से गणित के कठिन सवालों का चुटकी में हल निकाल रहे हैं। न्यूटन के सिद्धांतों का भी भलीभांति हल इसके जरिए सामने आ रहा है।

न्यूटन के सिद्धांतों को चुटकी में कर रहे हल

बाल विज्ञानियों ने कत्थक नृत्य के माध्यम से न्यूटन के सिद्धांतों को हल करने का नया तरीका खोज निकाला है। न्यूटन के तीन महत्वपूर्ण सिद्धांतों को कत्थक के कदमताल के जरिए समझा रहे हैं। पहला सिद्धांत है कोई वस्तु तब तक गतिमान अवस्था में नहीं रहेगी जब उसे बल ना लगाया जाए। जब तक स्थिर रहेगा उसे गति नहीं मिलेगी। और तब तक गतिमान भी नहीं हो सकता। प्रत्येक क्रिया की बराबर और उसके विपरीत प्रतिक्रिया भी होती है। नृत्य करते-करते एक बाल विज्ञानी दूसरे बाल विज्ञानी के लिए हाथ उठाता है। तत्काल दूसरा बाल विज्ञान अपने बचाव के लिए कोशिश करता है। कुछ इस अंदाज में न्यूटन के सिद्धांतों को बता रहे हैं और नृत्य-नृत्य करते समझा भी रहे हैं।

बेटियां भी पीछे नहीं

खेल-खेल में पढ़ाई को लेकर बेटियां भी पीछे नहीं है। सर्किल नृत्य के जरिए बेटियां गणित के सवालों को हल करने में जुटी रहती है। त्रिज्या,ज्यामिती के सवालों को हल कर रही हैं। योग के जरिए सामानांतर, त्रिज्या और अलग-अलग कोण के बारे मेंे जानकारी दे रही हैं।

बच्चों में स्र्चि जगाने इंटरनेट मीडिया का प्रयोग

बाल विज्ञानियों ने कत्थक नृत्य के अलावा तीन से चार मिनट का वीडियो भी बनाया है। इसमें अध्ययन अध्यापन के प्रति स्र्चि जगाने के लिए संदेश दे रहे हैं। इसे यूट्यूब के जरिए प्रसारित कर रहे हैं। प्रचार प्रसार के लिए इंटरनेट मीडिया का भी उपयोग कर रहे हैं।

नीति आयोग ने की सराहना

खेल और नृत्य के जरिए पढ़ाई कराने और गणित के सवालों का चुटकी में हल करने को लेकर नीति आयोग ने बाल विज्ञानियों के अविष्कार की सराहना की है। आयोग ने देशभर के एटीएल को इस पर अमल करने और आने वाले दिनों में इस पर काम करने और बेहतर प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है।

बच्चों का मनोबल बढ़ाना जस्र्री

अटल टिंकरिंग लैब के प्रभारी डा धनंजय यादव का कहना है कि कोरोना संक्रमणकाल के दौरान पूरे दो वर्ष तक स्कूल व कालेज बंद होने के कारण बच्चे घर पर ही रहे। आनलाइन पढ़ाई के जरिए दो क्लास की पढ़ाई पूरी किए हैं। इस दौरान पेन से लिखने की आदत भी छूट चुकी थी। अब स्कूल कालेज में पढ़ाई हो रही है। परीक्षा हाल में बैठक परीक्षा दिलानी पड़ रही है। बच्चों के मनोभाव को बनाए रखने के अलावा मनोबल को ऊंची रखना जस्र्री है। यही कारण है कि बाल विज्ञानी अपने अनुभवों के आधार पर अविष्कार कर रहे हैं। कोरोना संक्रमणकाल को इन लोगों ने भी करीब से देखा है। अविष्कार में अपने अनुभव को झोंक रहे हैं। इसका परिणाम भी अच्छा आ रहा है।

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