देश में आम की 1500 वैरायटी जानिए कहां मिलते हैं चौसा हिम सागर और बायगनपल्ली आम

गर्मी का सीजन आते ही आम की बहार भी शुरू हो जाती है और इस सीजन में आम खाना सभी को बेहद पसंद होता है। पूरे भारत देश में आम की सैकड़ों किस्में हैं और उनमें कुछ ही हम बाजार में बिकते हुए देख पाते हैं। आज हम आपको आम की कुछ ऐसी प्रजातियों के बारे में बताएंगे, जिनके बारे में शायद आपने सुना भी नहीं होगा।
देश में आम की 1500 से ज्यादा किस्में
एक अनुमान के मुताबिक देश में आम की करीब 1500 से ज्यादा किस्में हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी तक अलग-अलग राज्यों में जलवायु के मुताबिक आम की अलग-अलग प्रजातियां पाई जाती है और हर आम के स्वाद में भी गजब का स्वाद होता है।
ये हैं देश में आम की कुछ खास किस्में
दशहरी आम
दशहरी आम विशेषकर उत्तर प्रदेश में पैदा होता है। ऐसा माना जाता है कि आम की इस किस्म की उत्पत्ति उत्तर प्रदेश के दशहरी गांव से हुई थी। दशहरी आम में भी एक मलिहाबादी दशहरी आम का स्वाद काफी शानदार होता है और यह आम दुनियाभर में निर्यात किया जाता है।
चौसा आम
चौसा आम भी बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में काफी ज्यादा पाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि 16वीं सदी में शेरशाह सूरी ने इस आम से लोगों का परिचय करवाया था। उप्र के हरदोई में चौसा आम की पैदावार सबसे ज्यादा होती है। यह आम बहुत ज्यादा मीठा होता है।
तोतापुरी आम
तोते के आकार वाला यह आम स्वाद में हल्का खट्टा मीठा होता है। यह आम मुख्य तौर पर दक्षिण भारत में होता है। तोतापुरी आम कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में सबसे ज्यादा पैदा होता है। अचार बनाने के लिए तोतापुरी आम का ही उपयोग किया जाता है।
अल्फांसो आम
महाराष्ट्र में पैदा होने वाला हापुस देश में सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला आम है। इस अल्फांसो के नाम से भी जाना जाता है। महाराष्ट्र के अलावा कर्नाटक और गुजरात के भी हापुस आम की पैदावार होती है। ये आम की सबसे महंगी किस्म है। यह आम अपनी मिठास के अलावा खुशबू के लिए विख्यात है।
हिमसागर आम
हिम सागर आम पश्चिम बंगाल और ओडिशा में प्रचलित है। यह आम मीठा होने के साथ काफी वजन वाला होता है। इसके एक आम का वजन 250 से 300 ग्राम होता है। खास बात ये हैं कि पश्चिम बंगाल और ओडिशा में इस आम को इतना प्यार मिला है कि इस पर कई गाने और कविताएं भी लिखी जा चुकी है।
लंगड़ा आम
यह आम उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर काशी से संबंधित है। हाल ही में लंगड़ा आम को GI टैग भी मिला है। ये आम जुलाई से अगस्त तक ही मिलता है। इस आम का नाम लंगड़ा इसलिए पड़ा क्योंकि जिस साधु ने पहली बार इस आम के दो पौधे लगाए थे, उसके पैर नहीं थे। लंगड़ा आम अंडाकार होता है और पकने के बाद भी हरे रंग का ही होता है।
रसपुरी आम
रसपुरी आम आम का संबंध कर्नाटक के ओल्ड मैसूर से है। इस आम को महारानी का दर्जा मिला हुआ है। रसपुरी आम को जैम और स्मूदी बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
बायगनपल्ली आम
अल्फांसो की तरह दिखने वाला बायगनपल्ली आम आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के बांगनापल्लेजिले में सबसे ज्यादा होता है। यह अंडाकार आम स्वाद में काफी मीठा होता है और करीब 14 सेंटीमीटर लंबा होता है।
सिंधुरा आम
सिंधुरा खट्टा मीठा आम है। पकने के बाद यह आम बहुत मीठे और रसीले होते हैं। सिंधुरा आम को भी शेक या पल्प बनाने के लिए उपयोग में लाया जाता है। सिंधूरा आम बाहर से लाल रंग का होता है, जबकि अंदर से सुर्ख पीले रंग के होते हैं।

