भोपाल मास्टर प्लान को CM Mohan Yadav की सैद्धांतिक मंजूरी,जन्माष्टमी पर जारी हो सकता है ड्राफ्ट
रहवासी इलाकों के लिए नए नियम

भोपाल। भोपाल के सुव्यवस्थित विकास को सुनिश्चित करने के लिए बीस साल बाद बहुप्रतीक्षित मास्टर प्लान-2047 का खाका तैयार हो गया है। सभी संबंधित पक्षों से चर्चा का दौर भी पूरा होने वाला है। इसका प्रारूप कभी भी जारी किया जा सकता है। इसमें रहवासी क्षेत्र में कहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं, इसकी शर्तें क्या रहेंगी, प्लानिंग क्षेत्र, औद्योगिक विकास, ग्रीन लैंड आदि के प्रविधान किए गए हैं।
- भोपाल मास्टर प्लान-2047 हुआ तैयार
- 20 साल बाद जारी होगा नया खाका
- मास्टर प्लान से खुलेगी विकास की राह
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रहवासी इलाकों के लिए नए नियम
ऐसे रहवासी क्षेत्र, जहां मुख्य मार्ग की चौड़ाई 18 मीटर से भी कम है, वहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने की अनुमति नहीं रहेगी। योजना क्षेत्र लगभग 1,017 वर्ग किलोमीटर रहेगा। इसमें 254 गांव शामिल होंगे। भोपाल के चारों कोनों पर उद्योगों की आवश्यकता के हिसाब से व्यवस्थाएं विकसित होंगी। मेट्रो ट्रेन परियोजना के दोनों ओर बहुमंजिला इमारतें बनाई जा सकेंगी।
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हरी झंडी मिलते ही किया जाएगा सार्वजनिक
सूत्रों के अनुसार इसके पहले भोपाल का मास्टर प्लान जारी किया जा सकता है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग और नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय ने इसकी तैयारी कर ली है और शीर्ष स्तर से हरी झंडी मिलते ही इसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा। दावा किया जा रहा है कि यह शहर की भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम होगा और तमाम समस्याओं के समाधान भी इसमें मिलेंगे।
रहवासी क्षेत्रों के लिए मिश्रित उपयोग जोन
सूत्रों का कहना है कि रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन के लिए स्पष्ट प्रविधान इसमें किए जा सकते हैं। इसके लिए मुख्य मार्ग की चौड़ाई को ध्यान में रखा जाएगा। 18 से 24 मीटर की चौड़ाई होने पर पार्किंग सुविधा सहित अन्य शर्तों के अधीन अनुमति दी जा सकती है। इससे उन कारोबारियों को राहत मिल सकती है, जिनके व्यवसाय पर इन दिनों संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
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मेट्रो मार्ग के दोनों ओर बहुमंजिला इमारतें बनाने की अनुमति
भोपाल में मेट्रो रेल परियोजना का काम तेजी के साथ चल रहा है। इसके दोनों ओर बहुमंजिला भवन बनाने की अनुमति दी जाएगी। यह 15 मंजिला तक हो सकते हैं। कृषि क्षेत्र में भी स्कूल, कालेज, अस्पताल, गोदाम आदि गतिविधियां संचालित हो सकेंगी। इसके लिए संचालनालय से अनुमति लेनी होगी।शहर के चारों कोनों पर व्यावसायिक गतिविधियों के लिए स्थान सुरक्षित किए जाएंगे।
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वर्ष 2005 में खत्म हो चुकी है पुराने Plan की अवधि
भोपाल का पिछला मास्टर प्लान वर्ष 1995 में जारी किया गया था। इसकी निर्धारित अवधि 2005 में खत्म हो गई थी। इसके बाद शहर के विकास और भूमि उपयोग का नियोजन सहित अन्य प्रक्रियाओं के जरिए किया जाता रहा।


