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धार्मिक

हनुमान जन्मोत्सव पर जानें शहर के यह प्रमुख हनुमान मंदिर

इंदौर। हनुमान जयंती प्रतिवर्ष चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। कई जगहों पर यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष के चौदवें दिन भी मनाई जाती है। इस साल 2023 में हनुमान जयंती 6 अप्रैल, गुरुवार के दिन मनाई जाएगी। इस दिन शहर के सभी हनुमान मंदिरों में भक्तों की भीड़ रहेगी। संकट हरने वाले भगवान को मनाने के लिए भक्त दर्शन-पूजन करेंगे। यहां जानते हैं शहर के प्रमुख हनुमान मंदिर-

रणजीत हनुमान मंदिर

इंदौर शहर के पश्चिम क्षेत्र में स्थित रणजीत हनुमान मंदिर 130 वर्षों से भक्तों को आर्शीवाद दे रहे हैं। भगवान का यह स्वरूप संकट हरने वाला है। रणजीत हनुमान मंदिर की विशेषता है कि यहां विराजित हनुमान ढाल और तलवार लिए विराजमान है। कहा जाता है कि यह अपनी तरह की विश्व की एकमात्र प्रतिमा है। इसके अतिरिक्त उनके चरणों में अहिरावण है। ऐसा तो मंदिर के स्थापना और मूर्ति को लेकर कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। मूर्ति को देखकर लगता है जैसे कि भगवान किसी युद्ध में जाने की तैयारी में है। मंदिर के साथ राजा की जीत की कहानी जुड़ी हुई है। बताया जाता है कि युद्ध में जब एक राजा हारने लगा तो वह भागते हुए भर्तहरी गुफा में पहुंच गया। यहां पर एक महात्मा ध्यान में लिफ्त थे। राजा बहुत देर तक बैठा रहा। इसके बाद जब महात्मा ध्यान मुक्त हुए तो रोटी देते हुए कहा कि इसके टुकड़े डालते हुए जाना, जहां टुकड़े समाप्त होंगे वहां मंदिर मिलेगा। वहां तुम्हारी सारी परेशानियां दूरी होगी। यह मंदिर रणजीत हनुमान मंदिर था। वहां पर पूजा से राजा को रण में जीत का आर्शीवाद मिला।

निरालाधाम 108 बार जय श्रीराम लिखकर मिलते हैं दर्शन

इंदौर के पूर्वी क्षेत्र में वैभव नगर (कनाडिया) में स्थित निरालाधाम कई कारणों से अद्वितीय है। यहां 200 फीट ऊंचे स्तंभ पर स्थित हनुमानजी की 51 फीट की मूर्ति भक्तों के बीच आस्था का केंद्र है। मूर्ति के कंधे पर राम और लक्ष्मण विराजमान हैं। कहा जाता है कि यह मुद्रा तब की है जब अहिरावण राम और लक्ष्मण को पाताल लोक में ले गए थे और केसरीनंदन उन्हें अपने कंधे पर सुरक्षित ले आए थे। भगवान के इस विशेष रूप को देखने के लिए भक्तों को न तो प्रसाद की आवश्यकता होती है और न ही चढ़ावे की। यहां हनुमान दर्शन के लिए 108 बार जय श्री राम लिखना होता है।

वीर बगीची के अलीजा सरकार

पंचकुईया रोड़ स्थित वीर बगीची में अलीजा सरकार हनुमान मंदिर सैकड़ों साल पुराना बताया जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर में स्थापित प्रतिमा खजूर के पेड़ से निकली थी, जिसे बाद में मंदिर में स्थापित किया गया था। भगवान यहां वीर स्वरूप में हैं। भगवान की स्वयंभू प्रतिमा है। उनके दोनों हाथ में गदा है। भगवान की प्रतिमा पाषाण की है। इसकी ऊंचाई 5 फीट और चौड़ाई 3 फीट है। यह मंदिर से जुड़े कई चमत्कार हैं। यहां साल भर आयोजन होते हैं। यहां पर हनुमानजी को चोला चढ़ाने के लिए लंबी बुकिंग चलती है। आमतौर पर भगवान शिव को भांग का प्रसाद चढ़ाया जाता है, लेकिन श्री वीर अलीजा मंदिर में हनुमानजी को रोज आधा किलो भांग का भोग भी लगाया जाता है। शायद ये भारत का एकमात्र मंदिर है जहां हनुमानजी को भांग का भोग लगाने की परंपरा है। हनुमान जयंती पर यहां विशेष आयोजन होते हैं। पूजा-अर्चना और महाआरती के साथ ही यहां आयोजित भंडारे में हजारों श्रद्धालु प्रसादी ग्रहण करते हैं।

सिद्धेश्वर बालाजी हनुमान

इंदौर शहर में चिड़ियाघर के सामने खान नदी के किनारे स्थापित सैकड़ों साल पुराना है श्री सिद्धेश्वर बालाजी हनुमान मंदिर। सिद्धेश्वर बालाजी हनुमान मंदिर में हनुमानजी की दुर्लभ और स्वयंभू प्रतिमा स्थापित है। परिसर में आठ अन्य मंदिर भी हैं। इनमें शंकर, शनि, साईं, राम, राधा-कृष्ण, दुर्गा, शीतलामाता और भेरूजी का मंदिर शामिल है। श्री सिद्धेश्वर बालाजी हनुमान मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां सैकड़ों साल पहले एक महाराज रहा करते थे। अयोध्या से संत जगदेव लक्ष्मीदत्त महाराज पैदल यात्रा करके इंदौर आए थे। वे मंदिर के महाराज से मिले और एक महीने सेवा करने का आग्रह किया। इसके बाद से पीढ़ी-दर-पीढ़ी अयोध्या के ही छह ब्राह्मण परिवार साल में बारी-बारी से मंदिर की देखभाल करते हैं और यहां के चढ़ावे से अपना गुजर-बसर करते हैं।

पितरेश्वर हनुमान मंदिर

शहर के इस हिस्से में कभी ट्रेंचिंग ग्राउंड हुआ करता था और पूरे क्षेत्र में कूड़ा-करकट होता था। आज इसी जगह पितृ पर्वत है। इसी पितृ पर्वत पर विराजित हैं 72 फीट ऊंचे पितरेश्वर हनुमान। पितरेश्वर हनुमान की मूर्ति डेढ़ साल में पितृ पर्वत पर स्थापित की गई थी। इस मौके पर नगर भोज भी हुआ था। राम भक्त हनुमान की 66 फीट ऊंची मूर्ति का निर्माण ग्वालियर में 125 कारीगरों द्वारा किया गया। इसे सात साल में 264 हिस्सों में बनाया गया। इन हिस्सों को जोड़ने में करीब दो साल का समय लगा। मूर्ति का वजन 108 टन बताया जाता है। गदा की लंबाई 45 फीट है।

ओखलेश्वर धाम मंदिर

इंदौर से करीब 45 किलोमीटर दूर घने जंगल में स्थित है यह अखिलेश्वर मठ। इसे ओखलेश्वर मठ भी कहा जाता है। यहीं पर प्रतिष्ठित है रुद्रावतार हनुमानजी की दुर्लभ प्रतिमा। खंडवा रोड़ स्थित वाईग्राम से करीब 18 किमी जंगलों में यह स्थित है यह मंदिर। यहां हनुमानजी के हाथों में शिवलिंग है। दुर्लभ और अनूठे मंदिर की प्रतिमा के बारे में मान्यता है कि राम-रावण युद्ध से पहले रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना के लिए हनुमानजी नर्मदा की सहस्त्रधारा धावड़ी घाट से शिवलिंग लेकर लौट रहे थे। यहां महर्षि वाल्मीकि का आश्रम होने के कारण वे कुछ समय के लिए यहां रुके थे। हालांकि जब तक हनुमानजी शिवलिंग लेकर रामेश्वरम पहुंचे तब तक वहां महादेव की प्राण प्रतिष्ठा हो चुकी थी। ऐसा माना जाता है कि वह शिवलिंग आज भी तमिलनाडु के धनुषकोटि में स्थापित है। इस मठ में एक शिव मंदिर भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह द्वापर काल का है। एक मान्यता यह भी है कि यह मंदिर त्रेता युग के राजा श्रियाल के समय का है। च्यवन ऋषि, मार्कंडेय ऋषि, विश्वामित्र आदि मनीषियों की तपस्थली भी रहा है रेवाखंड का यह क्षेत्र। जनश्रुति के अनुसार इस क्षेत्र में स्वयंभुव मनु और शतरूपा ने भी तपस्या की थी। यहां एक कुंड भी है साथ शेषशायी विष्णु का मंदिर भी है।

इसके अलावा बड़ा गणपति स्थित प्राचीन हंसदास मठ पर पंचमुखी चिंताहरण हनुमानजी, राजवाड़ा स्थित सुभाष चौक में बाल हनुमान मंदिर की भी अपनी महत्ता है।

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