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बड़ी आबादी का भारत को यूं मिल सकता है बड़ा फायदा जानिए मोदी सरकार की प्लानिंग

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक जल्द भारत अब दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश बन सकता है। गौरतलब है कि 1950 के बाद से चीन दुनिया में सबसे लगातार सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बना हुआ था। चीन ने सख्त परिवार नियोजन कार्यक्रम व वन चाइल्ड पॉलिसी लागू करके प्रजनन दर को काबू में करने से प्रयास किया। नतीजा यह रहा कि चीन की आबादी घटने लगी है। हालांकि बीते कुछ दशकों में चीन जैसे सख्त कदम नहीं उठाने के बावजूद भारत में भी फर्टिलिटी रेट (प्रजनन दर) में बहुत ज्यादा गिरावट देखी गई है। भारत में साल 1950 में भारत में प्रजनन दर जहां 5.7 थी, वहीं आज भारत की एक महिला औसतन 1 या 2 बच्चों को ही जन्म देती है।

1952 में परिवार नियोजन, 1976 में जनसंख्या नीति

बढ़ती जनसंख्या को काबू में करने के लिए भारत में परिवार नियोजन कार्यक्रम की शुरुआत 1952 में की थी, वहीं राष्ट्रीय जनसंख्या नीति को पहली बार साल 1976 में लागू किया। हालांकि 1975 में इमरजेंसी के दौरान परिवार नियोजन कार्यक्रम के नाम पर लाखों गरीब लोगों की जबरन नसबंदी कर दी गई थी।

देश के 17 राज्यों में कम प्रजनन दर

केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक भारत के 17 राज्यों में प्रजनन दर रिप्लेसमेंट रेट से भी कम हो गई है। यहां रिप्लेसमेंट रेट का मतलब है कि नए पैदा होने वाले बच्चे जनसंख्या को बनाए रखने के लिए काफी है। आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिणी राज्यों में जन्म दर में कमी उत्तर भारत की तुलना में ज्यादा है।

ज्यादा आबादी वाला देश होने का भारत को फायदा

चीन से ज्यादा आबादी होने के कारण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी मजबूत होगी। बीते साल सितंबर 2022 में अमेरिका में 10 दिवसीय दौरे के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कहा था कि जल्द ही भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। यह दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला समाज होगा। उन्होंने कहा था कि अगर ऐसा देश प्रमुख वैश्विक परिषदों में नहीं है, तो जाहिर है कि यह हमारे लिए अच्छा नहीं है। आपको बता दें कि दुनियाभर में 25 साल से कम उम्र के लोगों में हर 5 लोगों में से 1 भारतीय है। सिर्फ भारत में ही 47 फीसदी लोगों की उम्र 25 साल से कम है। भारत दुनिया का सबसे जवान देश है।

ज्यादा आबादी से भारत को ये नुकसान

– सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के मुताबिक भारत में 40 फीसदी लोगों काम की तलाश करना चाहते हैं। विशाल आबादी में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या होगी।

– देश में महिलाओं की साक्षरता दर बढ़ी है और ऐसे में महिलाएं सिर्फ बच्चों को जन्म देने या उनके पालन पोषण पर निर्भर नहीं रहना चाहती है। महिलाओं को भी नौकरी की जरूरत होगी।

– भारत में गांवों में विशाल आबादी रहती है, जो रोजगार की तलाश में गांव छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर रही है।

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