ब्रेकिंग
सुप्रीम कोर्ट में तय सुनवाई टल गई है, भोपाल में रहवासी इलाकों व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण खड़े हनुमान मंदिर को लेकर बढ़ा विरोध, उमा भारती ने CM से कहा- निकालें बीच का रास्ता मोदी से मुलाकात पर दुनिया की नजर,दिल्ली पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ‘हनुमान अंश’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा बरकरार, 36वें दिन कमाई 200 करोड़ के पार PM मोदी के जन्मदिन पर MP सरकार का बड़ा तोहफा, 17 सितंबर से 50 लाख लोगों की होगी फ्री रजिस्ट्री रायपुर में होगा 14वां इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026, सीएम विष्‍णु देव साय मुख्‍य अतिथि हाईकोर्ट सख्त, 7 दिन में दिखाने होंगे अनुमति के दस्तावेज, भोपाल में रिहायशी इलाकों में चल रहे मॉल-हो... दिल्ली में नितिन नवीन से नरोत्तम मिश्रा की मुलाकात, एमपी में सियासी हलचल तेज भोपाल मास्टर प्लान को CM Mohan Yadav की सैद्धांतिक मंजूरी,जन्माष्टमी पर जारी हो सकता है ड्राफ्ट नगर निगम ने शुरू की सीलिंग,भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रहे कमर्शियल अड्डों पर बड़ी कार्रवाई
मध्यप्रदेश

निशाने पर केंट क्षेत्र के 23 हजार वोट सभी दल अपने पाले में करने जुटे

जबलपुर। छावनी परिषद क्षेत्र में सैन्य प्रशासन की परिभाषा के मुताबिक अतिक्रमण के दायरे में आने वाले करीब 24 हजार मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से विलोपित कर दिए गए। वर्षों पहले की गई इस कार्रवाई को लेकर उबाल अब बढ़ रहा है। कांग्रेस और भाजपा दोनोंं ही अपने-अपने दांव-पेंच से इस मामले को अपने पाले में करना चाह रहे हैं। कांग्रेस जहां सड़कों पर उतर रही है वहीं भाजपा सत्ता के सहारे आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है। कुछ ऐसे भी संगठन हैं जो खुद को गैर राजनीतिक बताते हुए इस लड़ाई में अपनी सहभागिता दे रहे हैं।

150 एकड़ से अधिक रकबे में बसे हैं लोगः

केंट क्षेत्र में बंगले-बगीचों का कुल रकबा 150 एकड़ से अधिक है। इन क्षेत्रों में हजारों मतदाता निवासरत हैं। अतिक्रमण के नाम पर मतदाता सूची से अलग किए गए लोगों की संख्या लगभग 24 हजार है। यह कार्रवाई बीते सात वर्षों के दरमियान हुई, लेकिन इसका शोर अभी सुनने में आ रहा है। बंगला बगीचों की जमीन की अदला-बदली भी एक बड़ा विषय है। केंट क्षेत्र में 150 एकड़ से अधिक क्षेत्र में बंगले-बगीचे हैं। इसी प्रकार सेना तिलहरी, जमतरा, भटौली सहित कुछ अन्य क्षेत्रों में प्रदेश सरकार की करीब साव तीन सौ एकड़ भूमि का इस्तेमाल कर रही है। इन जमीनों की अदला-बदली से रास्ता खुलने की उम्मीद सभी को है। हालांकि ऐसा राज्य शासन और केंद्र के रक्षा मंत्रालय के बीच सहमति बनने के बाद ही संभव होगा।

कांग्रेस नेताओं का दावा:

पूर्व केंट बोर्ड उपाध्यक्ष अभिषेक चौकसे इस मामले को करीब चार महीने से उठा रहे हैं। वार्ड-वार्ड घूमकर प्रदर्शन भी कर रहे हैं। उनका दावा है कि उन्होंने इस मामले में रक्षा मंत्रालय को अनेक बार पत्र लिखे, लेकिन जब रक्षा मंत्रालय 24 हजार लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़े बिना ही चुनाव की तैयारी में जुट गया, तो उनको सड़कों पर उतरना पड़ा। उन्होंने कहा कि जिस वक्त जिले में कलेक्टर छवि भारद्वाज रहीं, तभी जमीन की अदला-बदली का प्रस्ताव वो राज्य शासन को पहुंचवा चुके थे। भाजपा के लोग नए सिरे से प्रस्ताव बनवाने की बात कहकर भ्रमित कर रहे हैं। अगर कुछ करना ही है तो जाे प्रस्ताव पहले से सरकार के पास विचाराधीन है, उस पर ही अमल कर लें।

केंट क्षेत्र के विधायक का मत:

इस विषय में केंट क्षेत्र के विधायक अशोक रोहाणी का कहना है कि केंट क्षेत्र के सिविल एरिया को नगर निगम में मर्ज करने का रास्ता तलाशा जा रहा है। इसके लिए जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य शासन के नगरीय प्रशासन मंत्रालय को सहमति पत्र भेजा जाएगा, जो राज्य सरकार की ओर से केंद्र के रक्षा मंत्रालय को प्रेषित किया जाएगा। सागर केंट के मामले में ऐसा पत्र लिखा भी जा चुका है। महाराष्ट्र के भी पांच केंट बोर्ड क्षेत्रों को लेकर भी पत्र लिखे जा चुके हैं। जबलपुर कलेक्टर को भी इस संबंध में नगरीय प्रशासन मंत्रालय को पत्र लिखे जाने के लिए कहा गया है। केंट विधायक अशोक रोहाणी का कहना है कि रक्षा मंत्रालय की ओर से भी इस मामले में राज्यों से सहमति मांगी गई है।

जिला प्रशासन की दो टूक:

राजनेताओं के दावे और प्रयास अपनी जगह हैं। इस मामले में जिला प्रशासन की राय है कि विषय केंट बोर्ड क्षेत्र से जुड़ा है, जहां प्रशासन को कोई सीधा दखल नहीं होता। वहां से संबंधित सभी विषयों को केंद्र सरकार का रक्षा मंत्रालय देखता है। मतदाताओं के नाम जोड़ने-घटाने से तो जिला प्रशासन का कोई लेना-देना ही नहीं है। कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन का कहना है कि जमीन की अदला-बदली का मामला भी शासन स्तर का है। यहां से किसी भी प्रकार का प्रस्ताव राज्य शासन को भेजे जाने के मामले में पहले सभी तथ्यों पर गौर किया जाएगा।

Related Articles

Back to top button