बगैर डाक्टरी सलाह के न करें एंटीबायोटिक का इस्तेमाल

इंदौर। इस समय लोगों को इस समय फ्लू से मिलते-जुलते लक्षणों वाली बीमारी हो रही है। यह एच3एन2 इंफ्लूएंजा वायरस की वजह से हो रही है। इसे लेकर लोगों में बड़ी दुविधा है। कोई इसे कोरोना से जोड़कर देख रहा है तो कोई इसे सामान्य खांसी, जुकाम समझ रहा है। इस समय लोगों में तेज बुखार, खांसी एवं गले में खराश के लक्षण पाए जा रहे हैं। किसी-किसी मरीज को कभी-कभी उल्टी व दस्त भी हो रहे हैं। सामान्यतः दवाओं का इन पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ रहा है।
पूर्व संयुक्त संचालक एवं राज्य क्षय अधिकारी डा. अतुल खराटे के अनुसार, मरीज परेशान हैं कि उनकी खांसी, जुकाम ठीक क्यों नहीं हो रही है। वैसे तो यह समस्या हर उम्र के लोगों में देखने को मिल रही है लेकिन 15 वर्ष या इससे कम आयु के बच्चों एवं किशोरों तथा 55 वर्ष से अधिक उम्र के लोग इस समस्या से ज्यादा पीड़ित हैं। अगर उपचार की बात की जाए तो जैसे ही वायरस के शुरुआती लक्षण दिखाई दें सबसे पहले अपने चिकित्सक से परामर्श लें। तेज बुखार होने की स्थिति में गीले तौलिया से पूरे शरीर को पोछें। इससे शरीर का तापमान सामान्य होने में मदद मिलेगी।
ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं, तरल पदार्थों का सेवन करें। ठंडी चीजों से दूर रहें। दिन में कम से कम दो बार गर्म पानी की भाप अवश्य लें। इस वायरस के इलाज में एंटीबायोटिक का कोई खास रोल नहीं होता है। ध्यान रखें कि किसी भी तरह की एंटीबायोटिक का इस्तेमाल बगैर डाक्टरी सलाह के न करें। बच्चों, ऐसे लोग जिन्हें पुरानी बीमारी है, बुजुर्ग को चिकित्सक की सलाह से एच3एन2 इंफ्लूएंजा का टीका प्रतिवर्ष लगवाना चाहिए।
इस टीके से एच1एन1, एच2एन2 के साथ-साथ एच3एन2 से भी बचाव होगा। खानपान में उन चीजों को शामिल करें जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती हो। जिन्हें खांसी, जुकाम और बुखार है उनसे दूरी बनाकर रखें। मास्क का उपयोग करें। भीड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। कोविड अनुरूप व्यवहार को दोबारा अपनाएं।


