संचालनालय ने बर्खास्त करने कहा हाइकोर्ट ने दिया स्टे

जबलपुर। महिला एवं बाल विकास विभाग की एक पर्यवेक्षक को गलत जानकारी के आधार पर नियुक्ति प्राप्त करने के मामले में विभाग की ओर से दोषी माना गया है। इस मामले में संचालनालय महिला एवं बाल विकास की ओर से उसकी बर्खास्तगी के संबंध में पत्र भी जारी किया गया, लेकिन अब तक उसकी बर्खास्तगी हो नहीं पाई है। विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि संबंधित पर्यवेक्षक ने संचालनालय के आदेश पर न्यायालय से स्थगन ले रखा है।
ग्वालियर में रहने वाले मनीष कश्यप का कहना है कि 2011 में हुई पर्यवेक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में वो भी आवेदक रहे। लेकिन वो ओबीसी से रहे और उनकी बराबरी पर रहीं एससी वर्ग की नीलम कश्यप का चयन कर लिया गया। कश्यप वे भी रहे और नीलम भी, बावजूद इसके उन्होंने एससी का जाति प्रमाण पत्र लगाया। जबकि मध्यप्रदेश में कश्यप जाति अनुसूचित जाति में अधिसूचित नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने 2018 में जबलपुर कलेक्टर कार्यालय में एक आवेदन दिया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने 2022 में पुन: आवेदन दिया और सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत की। उन्होंने संचालनालय महिला एवं बाल विकास विभाग को भी इस मामले में पत्र लिखा, जहां से 20 फरवरी 2023 को आदेश हो गए कि आदेश जारी होने के एक महीने बाद नीलम कश्यप को बर्खास्त कर दिया जाए। इस मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी को कार्रवाई करना थी।
डीपीओ ने कहा-
इस मामले में जब जिला कार्यक्रम अधिकारी एम. एल. मेहरा से बात की गई तो उन्होंने भी स्वीकार किया कि नीलम कश्यप को 20 मार्च को बर्खास्त किया जाना था, लेकिन उसकी ओर से हाइकोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त कर कार्यालय के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया, जिसकी वजह से उनकी बर्खास्तगी नहीं की जा सकी।


