मौसम के बदले मिजाज से शकर का उत्पादन घटने की आशंका निर्यात कोटा सीमित रखेगी सरकार

इंदौर। देश का शकर उत्पादन पूर्वानुमान से नीचे रहने की आशंका है। अब आशंका जताई जा रही है कि उत्पादन में 4 से 5 लाख टन की कमी आ सकती है। पूर्व में देश में शकर का कुल उत्पादन इस शकर वर्ष में 336 लाख टन रहने की उम्मीद थी जो अब और भी घट सकता है। बीते शकर वर्ष 2021-22 में देश में शकर का कुल उत्पादन कुल 357.6 लाख टन था। ऐसे में अब पूरी उम्मीद है कि सरकार शकर के निर्यात का अतिरिक्त कोटा जारी नहीं करेगी।
खाद्य मंत्रालय ने वर्ष 2022-23 के लिए शकर का निर्यात कोटा 61 लाख टन घोषित किया था। इसमें से 53 लाख टन शकर की खेप निर्यात के लिए रवाना भी हो चुकी है।बीते वर्ष भारत से रिकार्ड 110 लाख टन शकर का निर्यात हुआ था। शरकार कुल शकर उत्पादन में से 45 से 50 लाख टन का उपयोग इथेनाल उत्पादन में भी करेगी। ऐसे में इथेनाल में उपयोग होने वाली शकर को जोड़ा जाए तो भी शकर का उत्पादन 385 लाख टन के आसपास होता है। बीते दिनों महाराष्ट्र-महाराष्ट्र जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में बेमौसम की बरसात के कारण हुए नुकसान के चलते इसमें 4-5 लाख टन की गिरावट की आशंका है।
हालांकि सरकारी विभाग कह रहे हैं 10 दिनों बाद कुल उत्पादन और बीते दिनों की बारिश से पड़े प्रभाव को लेकर सही नतीजे सामने आएंगे। हालांकि सरकार के अनुमान से ज्यादा गिरावट की उम्मीद इंडस्ट्री के लोग कर रहे हैं। शकर उद्योग के लोगों के अनुसार यह भी संभव है कि शकर का कुल उत्पादन 325 लाख टन के आसपास ही रह जाए। भारत के साथ मुख्य शकर उत्पादक देश थाइलैंड, ब्राजील, पाकिस्तान और चीन में भी इस साल उत्पादन घटने की खबरें सामने आ रही है। ऐसे में वैश्विक रूप से शकर के दामों में तेजी बनी हुई है।
न्यूयार्क में शकर के दाम छह वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं। रा शुगर इस सप्ताह 5 प्रतिशत उछल गई है। आइसीई पर शकर के दाम 22.20 सेंट के ऊपर पहुंच गए हैं। स्थानीय थोक बाजार में भी शकर ने 3700 रुपये प्रति क्विंटल का स्तर पार कर लिया है।आगे और बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है।


