रोशनपुरा चौराहे , भोपाल में व्यापारियों का चक्काजाम, आत्मदाह की चेतावनी
व्यापारी बोले- सरकार गुजरात मॉडल लागू करे, व्यापारी बोले- एक साथ कार्रवाई से रोजगार प्रभावित होगा


भोपाल में व्यावसायिक संस्थानों पर नगर निगम की कार्रवाई के विरोध में व्यापारी मंगलवार को सड़क पर उतर आए।

रोशनपुरा चौराहे और आसपास के क्षेत्र में व्यापारियों ने नारेबाजी करते हुए चक्काजाम कर दिया। व्यापारी हाथों में विरोध के बैनर-पोस्टर लेकर कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि रहवासी क्षेत्रों में वर्षों से संचालित व्यावसायिक संस्थानों को अचानक बंद कराने से कारोबार के साथ बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। व्यापारी सरकार से नियमितीकरण का रास्ता निकालने की मांग कर रहे हैं।
व्यापारी बोले- सरकार गुजरात मॉडल लागू करे
बैरागढ़ के व्यापारी अशोक उसरा सिंह ने कहा कि बैरागढ़ के रहवासी क्षेत्र का स्वरूप अब पूरी तरह व्यावसायिक हो चुका है और लगातार व्यापारियों को नोटिस दिए जा रहे हैं। सरकार रोजगार नहीं देती, इसलिए व्यापारी अपना कारोबार कर रहे हैं और उनके प्रतिष्ठानों में 25 से 50 परिवारों के लोगों को रोजगार मिल रहा है। सीलिंग की कार्रवाई से व्यापारियों के साथ उनके कर्मचारी भी बेरोजगार होंगे।
वहीं थोक बाजार व्यापारी संघ के अभिषेक रब्बू ने मोहन सरकार से भोपाल में जल्द मास्टर प्लान और मिक्स्ड लैंड यूज लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब मकान की रजिस्ट्री और नगर निगम टैक्स वसूली की जाती है, तो फिर उसी संपत्ति में कारोबार करने पर नोटिस क्यों दिए जा रहे हैं। उन्होंने गुजरात मॉडल की तर्ज पर नियमितीकरण की नीति लागू करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि मांग नहीं मानी गई तो व्यापारी आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो सकते हैं।
750 से ज्यादा संस्थानों को गतिविधियां बंद करने का अंतिम समय
भोपाल के रहवासी क्षेत्रों में चल रहे 750 से ज्यादा व्यावसायिक संस्थानों को गतिविधियां बंद करने के लिए 3 दिन का अंतिम समय दिया जाएगा। इनमें अरेरा कॉलोनी, बावड़िया कलां और रोहित नगर के 429 संस्थान भी शामिल हैं। नगर निगम उपायुक्त भुवन गुप्ता के मुताबिक, अंतिम सूचना पत्र जारी किए जा रहे हैं। तय समय में गतिविधियां बंद नहीं करने पर सीलिंग और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
250 संचालकों ने दिए जवाब, निगम ने नकारे
निगम ने इससे पहले अरेरा कॉलोनी, बावड़िया कलां और रोहित नगर के 429 संस्थानों को नोटिस दिए थे। इनमें से 60 संस्थानों को 24 घंटे का अंतिम नोटिस भी दिया गया था। करीब 250 संचालकों ने नोटिस के जवाब में कमर्शियल टैक्स जमा करने, व्यावसायिक बिजली कनेक्शन होने और भवन 18 मीटर चौड़ी सड़क पर स्थित होने जैसे तर्क दिए। हालांकि, निगम अधिकारियों का कहना है कि कमर्शियल टैक्स जमा करने या व्यावसायिक बिजली कनेक्शन होने से भवन का स्वीकृत उपयोग नहीं बदलता।
व्यापारी बोले- एक साथ कार्रवाई से रोजगार प्रभावित होगा
व्यापारियों का कहना है कि शहर के कई रहवासी क्षेत्रों का स्वरूप वर्षों में बदल चुका है और इनमें बड़ी संख्या में व्यावसायिक गतिविधियां लंबे समय से संचालित हो रही हैं। ऐसे में अचानक सीलिंग की कार्रवाई से व्यापारियों के साथ कर्मचारियों और इन संस्थानों पर निर्भर अन्य लोगों की आजीविका भी प्रभावित होगी। व्यापारियों ने सरकार से कार्रवाई रोककर व्यावसायिक गतिविधियों को नियमित करने का रास्ता निकालने की मांग की है।


