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हार्ट सर्जरी के साथ स्केटिंग के भी चैंपियन

रायपुर। राजधानी के आंबेडकर अस्पताल के एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट (एसीआइ) में हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. कृष्णकांत साहू हार्ट सर्जन के साथ-साथ अच्छे रोलर स्केटर भी हैं। वे व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर रोजाना स्केटिंग करते हैं। हाल ही में उन्होंने राज्य स्तरीय इनलाइन रोलर स्केटिंग प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता है। इंटर क्लब रोलर स्केटिंग प्रतियोगिता में तीन गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। डा. साहू अब तक 4,500 से भी अधिक हृदय, छाती, फेफड़े एवं खून की नसों के सफल आपरेशन कर चुके हैं। इसके लिए उन्हें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हाथों हेल्थ आइकान आफ द छत्तीसगढ़ अवार्ड मिल चुका है। डा. साहू ने आंबेडकर अस्पताल में ऐसे कई आपरेशन किए हैं, जो प्रदेश में पहली बार हुए हैं।

दोस्तों के साथ स्केटिंग

डा. साहू का कहना है कि जब वे 12वीं में थे तब अपने दोस्त के साथ स्केटिंग करते थे। 12वीं बायोलाजी एंड मैथमेटिक्स दोनों विषयों से उत्तीर्ण किया। इसमें मैथमेटिक्स मुख्य सब्जेक्ट था। दो सब्जेक्ट लेने के बावजूद स्केटिंग के लिए समय निकाल लेते थे। कभी-कभी दुर्ग से भिलाई स्केटिंग करते हुए चले जाते थे, परंतु उनका यह शौक ज्यादा दिनों तक नहीं चला। पीएमटी में सलेक्शन होने के बाद एमबीबीएस करने के लिए मेडिकल कालेज में एडमिशन लिया तब समय के अभाव में स्केटिंग का शौक लगभग खत्म सा हो गया था। यह शौक फिर से तब जाग उठा जब अपने बच्चे के लिए स्केटिंग खरीदने गए। उन्होंने कई वर्षों बाद दुकान में रोलर स्केटिंग पहना तो पुराने दिन याद आ गए। थोड़ी मशक्कत के बाद स्केटिंग को संभाल लिया। चूंकि बचपन में चार चक्का वाला क्वाड स्केटिंग करते थे, इसलिए इनलाइन स्केटिंग पहनकर चलने में थोड़ी परेशानी हुई। बच्चे के साथ अपने लिए भी स्केटिंग ले आए। फिर गुरु की तलाश में निकले जो उनको इनलाइन रोलर स्केटिंग सिखा सके।

गुरु के बिना परफेक्शन नहीं

मोंटी निर्मलकर डा. साहू के स्केटिंग गुरु हैं। डा. साहू कहते हैं कि बिन गुरु के ज्ञान तो हासिल कर सकते हैं, पर परफेक्शन गुरु के बिना नहीं मिल सकता। स्केटिंग सीखने के लिए उनको बहुत सोच विचार करना पड़ा, क्योंकि समय के साथ हड्डियों एवं मांसपेशियों में लचीलापन कम हो जाता है। लेकिन शौक और जिद के आगे यह रुकावटें दूर हो गईं। वे स्केटिंग करते-करते कई बार गिरे, पर आगे ही बढ़ते गए। उनको बचपन से ही एक्टिव गेम जैसे दौड़ना, स्वीमिंग, साइकिलिंग, स्केटिंग, माउंटेनिंग इत्यादि पसंद हैं। बैठकर खेलने वाले गेम कैरम, चेस, तास, लूडो आदि बिल्कुल पसंद नहीं हैं।

नई ऊर्जा का होता है संचार

डा. साहू का कहना है- सभी को अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर हाबी को पूरा करना चाहिए। इससे शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। आपरेशन के बाद मैं कितना भी थका रहूं, स्केटिंग के बाद तन और मन तरोताजा हो जाता है।

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