प्रदेश के वकील हड़ताल पर आज से नहीं करेंगे पैरवी

जबलपुर। हाई कोर्ट के उस आदेश के विरुद्ध वकीलों का आक्रोश भड़क उठा है, जिसके अंतर्गत राज्य की अधीनस्थ अदालतों में लंबित 25 पुराने प्रकरण तीन माह की समय-सीमा के भीतर निराकृत करने की बाध्यता लागू कर दी गई है। इस सिलसिले में जिला अदालत, जबलपुर ने विगत नौ दिनों तक हड़ताल पर रहकर विरोध प्रदर्शन किया। राज्य के अन्य जिलों के वकील भी आंदोलित हैं। जिसे गंभीरता से लेते हुए एमपी स्टेट बार कौंसिल ने तीन दिनी राज्यव्यापी प्रतिवाद दिवस मनाने का आह्वान कर दिया है। इसके अंतर्गत 25 मार्च तक जबलपुर सहित समूचे राज्य के वकील किसी भी अदालत में पैरवी करने नहीं जाएंगे।
उक्त जानकारी स्टेट बार के वाइस चेयरमैन आरके सिंह सैनी, मानद सचिव राधेलाल गुप्ता व कोषाध्यक्ष मनीष तिवारी ने पत्रकारवार्ता में दी। उन्होंने बताया कि वकीलों द्वारा हाई कोर्ट के आदेश का विरोध किए जाने के संबंध में स्टेट बार के सदस्यों ने दो मार्च को हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को अवगत कराया गया था। मुख्य न्यायाधीश बैठक के दौरान वकीलों की भावना व उन्हें हो रही परेशानी के सिलसिले में भी विस्तार से जानकारी दी गई थी। जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लिए जाने के बारे में आश्वस्त किया था। किंतु ऐसा नहीं हुआ। लिहाजा, स्टेेट बार की सामान्य सभा की बैठक में 18 मार्च को महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
सर्वसम्मति से तय किया गया कि यदि हाई कोर्ट 22 मार्च तक अपना आदेश वापस नहीं लेता तो 23 मार्च से प्रदेश के वकील हड़ताल पर चले जाएंगे। इस संबंध में मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर सूचित भी कर दिया गया था। जिसका जवाब भी आया किंतु कोई निर्णय लिए जाने की सूचना नदारद रही। अतएव, तीन दिन का प्रतिवाद दिवस मनाने की घोषणा आवश्यक हो गई। अब 26 मार्च को स्टेट बार की अगली सामान्य सभा की बैठक होगी। जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट, पेंशन, इंश्योरेंस व कालोनी को लेकर करेंगे आंदोलन : स्टेट बार के वाइस चेयरमैन आरके सिंह सैनी, व कोषाध्यक्ष मनीष तिवारी ने साफ किया कि स्टेट बार प्रदेश के वकीलों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। शीघ्र ही एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट, एडवोकेट पेंशन, एडवोकेट इंश्योरेंस व एडवोकेट कालोनी को लेकर आंदोलन को गति दी जाएगी।


