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छत्तीसगढ़

करोड़ों रुपयों का भ्रष्टाचार करने वाले निगम के दो कर्मचारी निलंबित, एक अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश

राजनंदगांव। लंबे इंतजार के बाद राजनांदगांव शहर के बूढ़ा सागर सौंदर्य करण में भ्रष्टाचार के मामले को लेकर नगर निगम आयुक्त ने कार्रवाई करते हुए निगम के दो कर्मचारियों को निलंबित किया है और एक अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश दिए गए हैं। ठेकेदार को 5 लाख रुपए के दंड के साथ ब्लैक लिस्टेड करने नोटिस जारी हुआ है।

लगभग 17 करोड़ रूपये की लागत से राजनांदगांव शहर के रियासत कालीन ऐतिहासिक बूढ़ा सागर सौंदर्य करण को लेकर करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार हुआ है। इस भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करने भाजपा पार्षद एवं नेता प्रतिपक्ष किशुन यदु और कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद कुलबीर सिंह छाबडा़ लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। इस मामले में जांच कार्रवाई की मांग की जा रही थी। भाजपा इसमें वर्तमान कांग्रेस की सत्ता को दोषी बता रही थी, तो वहीं कांग्रेस नगर निगम की पूर्व सत्ता भाजपा पर आरोप लगा रही थी। दोनों ही दलों के आरोप के बाद नगर निगम द्वारा इस मामले में जांच कमेटी बनाई गई , लेकिन मामले की जांच होने के बाद भी कार्यवाही नहीं की जा रही थी।

इस मामले में पार्षद एवं शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलबीर सिंह छाबड़ा ने कहा कि भाजपा कार्यकाल के भ्रष्टाचार को अभी तक नगर निगम द्वारा दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि लगभग 17 करोड़ रुपए का बूढा़ सागर सौंदर्यीकरण का कार्य है जिसमें 5 लाख रूपये जुर्माना लगाकर 17 करोड़ पर लीपापोती की जा रही है। वहीं उन्होंने इस कार्रवाई से असंतुष्टि जताई है। बूढ़ा सागर भ्रष्टाचार के मामले को लेकर नगर निगम की सामान्य सभा में सर्वसम्मति से तय किया गया था कि इस भ्रष्टाचार से जुड़े अधिकारियों के निलंबन के साथ ही ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करें।  भ्रष्टाचार में जुड़े सभी लोगों के खिलाफ एफआईआर किया जाए, लेकिन इस मामले में सिर्फ दो कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, वही किसी के खिलाफ एफआईआर नहीं की गई है।

इस पूरे मामले में नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष किशुन यादु ने कहा है कि सामान्य सभा में 25 अगस्त की रात लगभग 1:30 बजे सर्वसम्मति से भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर का प्रस्ताव पास हुआ है, इसके बावजूद इस मामले में नगर निगम ने एफआईआर न करते हुए कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की है। बूढ़ा सागर भ्रष्टाचार का मामला नगर निगम की सामान्य सभा बैठक में भी उठा था, लेकिन लंबे समय तक जांच रिपोर्ट आने के बाद भी इस मामले में कार्रवाई नहीं की जा रही थी। अंततः आगामी 31 मार्च को नगर निगम की बजट बैठक से पूर्व हंगामे के आसार को देखते हुए नगर निगम आयुक्त आशुतोष चतुर्वेदी ने अब इस पर कार्रवाई कर दी है।

जांच समिति के प्रतिवेदन अनुसार नगर निगम के दो अधिकारी सहायक अभियंता कामना यादव एवं उप अभियंता दीपक माहला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और तत्कालीन नगर निगम के कार्यपालन अभियंता दीपक जोशी के खिलाफ विभागीय जांच प्रस्तावित किया है। वहीं ठेकेदार पर 5 लाख रूपये का जुर्माना तय कर अनुबंध के शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप में ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करने की कार्रवाई के लिए नोटिस जारी कर दी गई है। इस मामले में नगर निगम के एजुकेटिव इंजीनियर यूके रामटेके ने कहा कि बूढ़ा सागर प्रकरण में जांच समिति गठित की गई थी, जिसके प्रतिवेदन के अनुसार पूरी कार्रवाई की गई है। शहर के रियासत कालीन ऐतिहासिक बूढ़ा सागर सौंदर्यीकरण के दौरान ही इस मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे थे। तीन सदस्यीय जांच समिति ने इस कार्य से संबंधित सभी अधिकारियों, अनुबंधित ठेकेदारों से दस्तावेजों के आधार पर जवाब तलब किया था और गवाहों के बयानों के आधार पर अपनी प्रतिवेदन प्रस्तुत किया था, जिस पर नगर निगम आयुक्त आशुतोष चतुर्वेदी द्वारा पूरी कार्रवाई की गई है।

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