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मध्यप्रदेश

मप्र के धार जिले में बिना सहारे खड़ी है हनुमानजीकी पाषाण मूर्ति

गंधवानी, धार। नईदुनिया न्यूज। औद्योगिक नगरी इंदौर से 130 किलोमीटर, धार जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर एवं गंधवानी से महज नौ किलोमीटर दूर हैं बलवारी हनुमानजी मंदिर।

यहां हनुमानजी की साढ़े 13 फीट ऊंची व ढाई फीट चौड़ी प्राचीन पाषाण मूर्ति बगैर किसी सहारे खड़ी हैं। पांडवकालीन यह मूर्ति घने जंगलों, ऊंची-नीची पहाड़ियों व घुमावदार मार्ग के बीच बलवारी में हैं। गत कई वर्षों से बलवारी हनुमानजी का चमत्कार श्रद्धालुओं ने देखा है। मूर्ति दिन में तीन बार रूप बदलती हैं।

मंदिर के पुजारी निरंजन दास एवं श्रद्धालुओं का कहना है कि हनुमानजी की मूर्ति सुबह बाल्यवस्था, दोपहर में युवावस्था व शाम को वृद्धावस्था में श्रद्धालुओं को दर्शन देती हैं।

सूर्योदय से सूर्यास्त तक बलवारी हनुमानजी के दर्शनार्थ देश के कई राज्यों के लोग आते हैं। गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान व अन्य जगह से जिनकी मान-मन्नतें पूर्ण होती हैं, वे साल में एक बार बलवारी हनुमानजी के दर्शन करने जरूर आते हैं।

मन्नतें पूर्ण होने पर हनुमानजी का तेल, सिंदूर व चोला चढ़ाकर श्रृंगार करते हैं। चूरमे का भोग लगाकर हनुमानजी की आरती कर मन्नत पूर्ण करते हैं। मंगलवार और शनिवार को पौष व माघ महीने में श्रद्धालु पैदल यात्रा कर हाथ में ध्वजा लेकर बलवारी हनुमान मंदिर पहुंचकर ध्वजा चढ़ाते हैं।

जनवरी-फरवरी में भी सोमवार को श्रद्धालु ध्वजा लेकर हजारों की संख्या में बलवारी हनुमान मंदिर आते हैं। कई बार भीड़ इतनी अधिक होती है कि श्रद्धालुओं को कतार में लगकर अपनी बारी आने का इंतजार करना पड़ता है। हनुमान जयंती पर सूर्योदय के पूर्व व सूर्यास्त के समय महाआरती का विशेष महत्व है।

इसी दिन लाखों लोग हनुमानजी के समक्ष माथा टेकने आएंगे। यह पांडवकालीन मूर्ति बगैर किसी सहारे खड़ी पूरे देश में एक ही बताई जाती है। बलवारी हनुमान मंदिर परिसर में मेले का आयोजन ग्राम पंचायत द्वारा किया जाता है। इसमें भी श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं।

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