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विदेशी जमीन पर बुरे फंसे स्टार्ट-अप चलाने वाले दो भारतीय युवा, अमेरिका ने माना 1 अरब डॉलर की धोखाधड़ी का दोषी

न्यूयॉर्क। शिकागो स्थित स्टार्ट-अप के दो भारतीय मूल के अधिकारियों को अमेरिका में एक संघीय जूरी (federal jury) ने 1 अरब अमेरिकी डॉलर की कॉर्पोरेट धोखाधड़ी योजना (USD 1 billion corporate fraud schem) चलाने का दोषी ठहराया गया है। इस स्कीम के माध्यम से कंपनी के ग्राहकों, उधारदाताओं और निवेशकों को टारगेट किया गया था।

10 सप्ताह के ट्रायल के बाद, जूरी ने मंगलवार को स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी कंपनी आउटकम हेल्थ के सह-संस्थापक और पूर्व सीईओ ऋषि शाह को 22 में से 19 मामलों में, सह-संस्थापक और पूर्व अध्यक्ष श्रद्धा अग्रवाल को 17 में से 15 मामलों में और संचालन अधिकारी ब्रैड पर्डी को 15 में से 13 मामलों में दोषी ठहराया गया।

37 वर्षीय शाह को मेल फ्रॉड के पांच मामलों, वायर फ्रॉड के 10 मामलों, बैंक धोखाधड़ी के दो मामलों और मनी लॉन्ड्रिंग के दो मामलों में दोषी ठहराया गया था।

37 वर्षीय अग्रवाल को मेल फ्रॉड के पांच मामलों, वायर फ्रॉड के आठ मामलों और बैंक धोखाधड़ी के दो मामलों में दोषी ठहराया गया था, जबकि 33 वर्षीय पर्डी को मेल फ्रॉड के पांच मामलों, वायर फ्रॉड के पांच मामलों, बैंक धोखाधड़ी के दो मामलों में और एक वित्तीय संस्थान को झूठे बयान देने के एक मामले में दोषी ठहराया गया था।

बैंक धोखाधड़ी के लिए प्रतिवादियों को अधिकतम 30 साल की जेल और वायर धोखाधड़ी और मेल धोखाधड़ी के लिए 20 साल की कैद होती है।

मनी लॉन्ड्रिंग के प्रत्येक मामले में शाह को अधिकतम 10 साल की जेल की सजा हो सकती है। एक सजा सुनवाई के बाद की तारीख में निर्धारित की जाएगी।

न्याय विभाग की ओर से जारी एक बयान में मंगलवार को कहा गया कि कंपनी ने अमेरिका के आस-पास के डॉक्टरों के कार्यालयों में टेलीविजन स्क्रीन और टैबलेट स्थापित किए और फिर उन उपकरणों पर विज्ञापन की जगह ग्राहकों को बेची, जिनमें से अधिकांश दवा कंपनियां थीं।

परीक्षण के बाद मिले सबूतों के अनुसार कंपनी के पास ग्राहकों का आउटकम नहीं था इसके बावजूद शाह, अग्रवाल और पर्डी ने विज्ञापन इन्वेंट्री बेची। वहीं अपने विज्ञापन अभियानों को कम वितरण के तौर पर दिखाया।

कम-डिलीवरी होने के बावजूद, कंपनी ने अपने ग्राहकों को इनवॉइस कर जानकारी देकर पूरी तरह से डिलीवर होना बताया।

शाह, अग्रवाल, और पर्डी ने दूसरों को ग्राहकों से कम डिलीवरी छुपाने के लिए झूठ बोला और ऐसे दिखाया जैसे कि कंपनी ग्राहकों से किए गए अनुबंधों के मुताबिक स्क्रीन की संख्या के अनुसार ही विज्ञापन सामग्री बांट रही है।

इसके अलावा कंपनी के पर्डी और अन्य लोगों ने मेट्रिक्स को भी बदलकर दिखाया जिससे कथित तौर पर यह दिखा कि डॉक्टर के कार्यालयों में स्थापित कंपनी के टैबलेट का मरीजों ने कितनी बार इस्तेमाल किया।

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