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कौन थे स्वामी आत्मानंद जिनके नाम पर खोले जा रहे स्कूल इंदिरा गांधी के अनुरोध पर आदिवासियों के लिए बनवाए थे आश्रम

रायपुर।  छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में नए-नए नवाचार किए जा रहे है। स्कूलों की पढ़ाई-लिखाई में गुणवत्ता लाने के लिए डिजिटल माध्यमों का भी सहारा लिया जा रहा है। प्रतिभावान विद्यार्थियों के लिए हिंदी और अंग्रेजी माध्यम में स्वामी आत्मानंद स्कूलों की शुरूआत की गई है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि छत्‍तीसगढ़ के स्‍कूली शिक्षा पर आधारित यह योजना स्‍वामी आत्‍मानंद के नाम पर शुरू की गई वो कौन हैं। अगर नहीं जानते तो ये आर्टिकल आपके काम की है।

रामकृष्ण मिशन के संत थे स्वामी आत्मानंद

दरअसल, स्वामी आत्मानंद रामकृष्ण मिशन के एक संत, समाजसुधारक और शिक्षाविद थे। उनका जन्म रायपुर में हुआ था। उनके पिता का नाम धनीराम वर्मा था। वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और शिक्षक थे। महात्मा गांधी के आह्वान पर वे भारत छोड़ो आंदोलन में कूद पड़े। गिरफ्तारी हुई और नौकरी भी छूट गयी। वर्धा आश्रम में वे गांधीजी के साथ रहे।

स्वामी आत्मानंद जब चार साल के थे तब वे वर्धा आश्रम में महात्मा गांधी का प्रिय भजन- रघुपति राघव राजा राम हारमोनियम पर गाकर सुनाते थे। वे बहुत कुशाग्र थे। गणित विषय में नागपुर से स्नातकोत्तर की परीक्षा उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल कर उत्तीर्ण की थी। छत्तीसगढ़ सीपी बरार प्रांत का हिस्सा था।

नागपुर में ही विवेकानंद आश्रम से उन्हें स्वामी विवेकानंद के पथ पर चलने की प्रेरणा मिली। वे आइसीएस (इंडियन सिविल सर्विस) की परीक्षा में टाप दस में आए थे इसके बाद भी वह कलेक्टर नहीं बने बल्कि स्वामी विवेकानंद आश्रम में शामिल हुए। विवेकानंद रायपुर में भी अपने बचपन में रहे थे। कलकत्ता के बाद रायपुर में ही उन्होंने अपने जीवन का सबसे ज्यादा समय गुजारा।

इंदिरा गांधी के अनुरोध पर स्वामी आत्मानंद ने खोले आश्रम और विद्यालय

स्वामी आत्मानंद ने रायपुर में आश्रम खोला, कड़ी मेहनत की। मगर उसी वक्त अकाल पड़ा। स्वामीजी ने आश्रम के लिए जमा किए सारे पैसे अकाल पीड़ितों की सेवा में खर्च कर दिए। उन्होंने जगह-जगह आश्रम खोले। इंदौर, भिलाई, अमरकंटक में आश्रम खोले। इसी दौरान उनकी मुलाकात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से हुई।

उन्होंने स्वामी आत्मानंद से कहा कि अबूझमाड़ के लोगों तक शासन की योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाता। आप वहां आश्रम खोलें। उनके अनुरोध पर स्वामीजी ने नारायणपुर में आश्रम और विद्यालय बनाया। छत्तीसगढ़ शासन उन्हीं आत्मानंद के नाम से उत्कृष्ट विद्यालय खोल रही है।

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