ब्रेकिंग
सुप्रीम कोर्ट में तय सुनवाई टल गई है, भोपाल में रहवासी इलाकों व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण खड़े हनुमान मंदिर को लेकर बढ़ा विरोध, उमा भारती ने CM से कहा- निकालें बीच का रास्ता मोदी से मुलाकात पर दुनिया की नजर,दिल्ली पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ‘हनुमान अंश’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा बरकरार, 36वें दिन कमाई 200 करोड़ के पार PM मोदी के जन्मदिन पर MP सरकार का बड़ा तोहफा, 17 सितंबर से 50 लाख लोगों की होगी फ्री रजिस्ट्री रायपुर में होगा 14वां इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026, सीएम विष्‍णु देव साय मुख्‍य अतिथि हाईकोर्ट सख्त, 7 दिन में दिखाने होंगे अनुमति के दस्तावेज, भोपाल में रिहायशी इलाकों में चल रहे मॉल-हो... दिल्ली में नितिन नवीन से नरोत्तम मिश्रा की मुलाकात, एमपी में सियासी हलचल तेज भोपाल मास्टर प्लान को CM Mohan Yadav की सैद्धांतिक मंजूरी,जन्माष्टमी पर जारी हो सकता है ड्राफ्ट नगर निगम ने शुरू की सीलिंग,भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रहे कमर्शियल अड्डों पर बड़ी कार्रवाई
मध्यप्रदेश

सबको बसाते-बसाते… एक दौर बन गया इंदौर

इंदौर। किसी भी पुराने नगर के इतिहास को संजोकर रखने में बहुत अनुभव और वरिष्ठता की जरूरत होती है, लेकिन बहुत कम ऐसे नगर होते हैं जिनके इतिहास को तारीखों से नहीं, भावनाओं से बयां किया जाता है। ऐसा नहीं कि इंदौर के पास खुद की संस्कृति, परंपरा या अपनी विशुद्धता नहीं थी, इंदौर के पास वह सब है जो किसी प्राचीन स्थान के पास होता है। कंपेल में देखा हुआ राव राजा राव नंदलाल मंडलोई का औद्योगिक नगर बनाने का सपना जिस जगह आकर साकार होता है वह इंदौर है।

होलकर वंश का आगमन, राजा मल्हारराव का शौर्य, लोकमाता अहिल्याबाई की दिव्यता, स्वतंत्रता संग्राम, मिलों की रौनक ऐसा और भी बहुत कुछ शहर के इतिहास में है पर फिर भी हर दौर में इंदौर ने अपने आप को बांधा नहीं। इंदौर की सीमाएं हर मुसाफिर के लिए आबाद रही और एक बार जो यहां आ गया, उसने कभी इसकी सीमा को लांघा नहीं। यही इंदौर की तासीर है। राजस्थान से आए वैश्य व्यापारी, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब सहित देशभर से उम्मीद के साथ आए व्यक्तियों ने अपना संसार यहीं बसा लिया और यहीं के बन कर रह गए। लेकिन फिर भी अपसंस्कृति की विकृति इंदौर पर हावी नहीं हो सकी। इन सबको देखकर लगता है कि इंदौर एक विचार शून्य भौगोलिक भू-भाग नहीं है, बल्कि यह भावनाओं और सूझबूझ का समंदर है।

स्वाद से लेकर संवाद तक, पहनावे से लेकर पहचान तक, उपासना से उत्सवों तक ऐसा समन्वय जिसने एक नई जीवनशैली इंदौरियत को गड़ा। इन सबके पीछे अगर कोई मूल कारण है तो वह है यहां का पर्यावरण और यह बात सही भी है… प्रकृति ही संस्कृति का निर्माण करती है। वैसे ही मालवा की मासूम तासीर की तरह उपजाऊ मिट्टी, समशीतोष्ण जलवायु, मीठा पानी सभी के लिए अनुकूल रहा.. और इसी ने इंदौर को जिंदादिल बनाए रखा। अब शहर का अगला दौर शुरू होने को है। शहर को मेट्रोपोलिटन बनाए जाने के प्रयास हो रहे हैं।

बेशक विकास से ही सभ्यताओं का विस्तार होता है और इंदौर को भी आगे बढ़ना है लेकिन विकास के पथ पर चलते हुए हमें इंदौर की उसी जिंदादिल तासीर, उल्लासपूर्ण जीवनशैली और खुशनुमा संस्कृति को बचाए रखना होगा। इस अनोखे शहर के प्राकृतिक और सामाजिक पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन के प्रति हमें सचेत रहना होगा।

(लेखक पर्यावरणविद, सामाजिक कार्यकर्ता व सहायक प्राध्यापक हैं)

Related Articles

Back to top button