ब्रेकिंग
बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का नाम अब होगा ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’, ईसी से प्रस्ताव मंजूर सुशासन तिहार शिविर...78 आवेदनों का मौके पर ही निपटारा:मंदिर हसौद में राशन कार्ड, आधार और श्रम कार्ड ... लाखों टन दुर्लभ खनिज की संभावना,छत्तीसगढ़ में देश की पहली ‘निकल-कॉपर’ खदान में 1.3 किमी तक भंडार मिल... सीएम मोहन यादव ने जानकारी दी, एमपी में यूसीसी जल्द लागू होगी l प्रधानमंत्री मोदी जी के सेवा, सुरक्षा और सुशासन के स्वर्णिम 12 साल सुप्रीम कोर्ट सख्त: फैसले लटकाए तो जवाब देना होगा अब फ्री में नहीं चला सकेंगे Facebook, Instagram और व्हाट्सऐप, Meta ने लॉन्च किया रिचार्ज प्लान सुशासन तिहार से सुखराम के चेहरे पर लौटी मुस्कान 5 घरेलु मसाले जो इम्युनिटी बढ़ने में रामबाण से कम नहीं – जानें इस्तेमाल करने का तरीका मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए ग्लाइसेमिक इंडेक्स और ग्लाइसेमिक लोड क्यों महत्वपूर्ण है।
व्यापार

वैश्विक अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव का भारत पर नहीं होगा कोई असर, बनी रहेगी सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकॉनमी

नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में 6.5 प्रतिशत की दर से विकास करेगी और दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बनी रहेगी। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहाकार कमेटी के सदस्य संजीव सान्याल की ओर से ये बयान ऐसे समय पर दिया गया है, जब हाल में ही विश्व की बड़ी संस्थाओं ने भारत की विकास दर के अनुमान को घटाया है।

उन्होंने आगे अपने बयान में कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव के बीच भारत का प्रदर्शन अन्य देशों के मुकाबले काफी अच्छा है। एशियन डेवलेपमेंट बैंक (ADB) और वर्ल्ड बैंक (World Bank) की ओर से चालू वित्त वर्ष की विकास दर के अनुमान में मामूली कटौती की गई है, लेकिन अभी भी भारत दुनिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था बना हुआ है

ADB, IMF और World Bank ने घटाया विकास दर का अनुमान

हाल ही में एशियन डेवलेपमेंट बैंक और वर्ल्ड बैंक की ओर से वित्त वर्ष 2023-24 के विकास दर के अनुमान में कटौती की गई है। चालू वित्त वर्ष के लिए एशियन डेवलेपमेंट बैंक ने विकास दर 6.4 प्रतिशत और वर्ल्ड बैंक ने विकास दर 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। आईएमएफ की ओर से विकास दर के अनुमान को 6.1 प्रतिशत से घटाकर 5.9 प्रतिशत कर दिया गया है।

बैंक अच्छी स्थिति में

अमेरिका और यूरोप में आए बैंकिंग क्राइसिस पर बोलते हुए सान्याल ने कहा कि भारत के फाइनेंशियल सेक्टर पर इसका सीधे कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सरकार की ओर से पिछले कुछ सालों बैंकों के एनपीए कम करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जिससे बैंक अच्छी स्थिति में है और उनके पास पूंजी भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।

पिछले हफ्ते वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का प्रदर्शन रिव्यू करने के लिए एक बैंठक भी की गई थी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button