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मध्यप्रदेश

एक्सीडेंट में अव्वल क्यों खुलेगी पोल

जबलपुर । सड़क दुर्घटनाओं के मामले में जबलपुर प्रदेशभर में अव्वल है। इतने हादसे आखिर हो क्यों रहे हैं। नवागत पुलिस कप्तान ने पदभार संभालते ही इसकी चिंता की। यातायात पुलिस समेत जिम्मेदार सभी विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। परंतु कोई यह नहीं भांप पाया कि उनके मन में क्या चल रहा है। दो दिन पहले वह सामने आ गया। प्रशिक्षु आइपीएस अधिकारी को शहर के कुछ थानों में एक्सीडेंट मामलों की टोह लेने के लिए भेजा गया। रिपोर्ट हैरान करने वाली रही। व्यापारिक क्षेत्र वाले छोटे से थाने में एक्सीडेंट के सर्वाधिक प्रकरण दर्ज मिले। प्याज के छिलकों की भांति फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगीं। दुर्घटना बीमा राशि हड़पने के लिए कथित साजिश का पता चला। गिरोह बनाकर काम किया जा रहा है। जिसमें कुछ निजी अस्पताल, कानून के जानकार व चंद खाकी वाले शामिल मिले। एक्सीडेंट के अधिकांश मामले फर्जी होने की संभावना है। गिरोह पर कप्तान का वज्रपात तय है।

एक दिल के टुकड़े हजार हुए…

पुलिस विभाग में निजाम बदलने के बाद कहीं खुशी तो कहीं गम का माहौल नजर आया था। गम इसका की कहीं बाद में कुर्सी न छिन जाए और खुशी इसकी, शायद अब कुर्सी मिल जाए। ऐसा हो भी क्यों न। टीआइ की कुर्सी जलवेदार जो होती है। नए कप्तान साहब ने थाना प्रभारियों की सूची जारी तो की परंतु पुलिस लाइन वालों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। कई थाना प्रभारियों को इधर से उधर किया और पुलिस लाइन के हिस्से में सिर्फ दो कुर्सी आई। ओमती थाने पर नजरें गड़ाए बैठे कई निरीक्षक धम्म से जमीन पर जा गिरे। इस थाने के लिए जिनकी लाटरी खुली, दूर-दूर तक उनका नाम नहीं था। दूरदर्शी सोच और योग्यता के आधार पर नए दायित्व सौंपे गए। कुछ तो मस्त हैं परंतु जो निराश हैं उनके लिए यही कहा जा रहा है कि- एक दिल के टुकड़े हजार हुए कोई यहां गिरा कोई वहां गिरा…।

कुर्सी का मोह छूटता नहीं-

एक साल पहले 10 सितंबर 2022 को मध्य प्रदेश शासन विधि और विधायी कार्य विभाग ने एक आदेश जारी किया था। जो 62 वर्ष आयु पूर्ण कर चुके उन लोगों से संबंधित था, जो शासकीय कर्मचारी तो नहीं रहते परंतु शासन द्वारा उन्हें नियुक्त किया जाता है। 62 वर्ष आयु पूर्ण कर चुके लोगों की जानकारी प्राप्त करने के लिए जिला दंडाधिकारी कार्यालय ने संबंधित विभाग से पत्राचार किया। कागजी घोड़े दौड़ते रहे परंतु कुछ लोग ऐसे निकले जो खुद को 62 वर्ष का मान रहे हैं न ही कुर्सी का मोह छोड़ पा रहे। पत्र में ऐसे लोगों को तत्काल पदमुक्त करने के निर्देश थे। यह भी कहा गया था कि पदमुक्त हुए 62 साल वालों की जिम्मेदारी अस्थायी रूप से समकक्ष दूसरे वरिष्ठजन को सौंप दी जाए। दूसरे वरिष्ठजन राह ताक रहे हैं परंतु कुर्सी जब छूटे तब तो मिले। इधर, सरकार भी चुनावी मोड में आ गई है, इसलिए अन्य वरिष्ठजन मन मसोसकर रह जाते हैं।

चलो गुगली फेंककर देखते हैं-

नए बैट्समैन यानी पुलिस कप्तान के लिए पिच का अनुभव पुराना है। वे पहले भी यहां लंबी पारी खेल चुके हैं, इसलिए ताबड़तोड़ बैटिंग जारी है। इस बीच प्रत्येक वर्दीधारी कप्तान का खास बनना चाहता है। पुराने कप्तान करीब तीन साल की शानदार पारी खेलकर गए परंतु कोई भांप नहीं पाया कि खास कौन था। नए कप्तान ने पारी शुरू की है। ताबड़तोड़ बैटिंग के बीच खास बनने वालों की कतार लगी है। तीन स्टार वाले कुछ अधिकारी चर्चा कर रहे थे। एक ने कहा कि साहब का मिजाज समझ में नहीं आ रहा है। दिन-रात काम करवा रहे हैं। फील्ड में रहो तो मीटिंग की चिंता, मीटिंग में रहो तो फील्ड की चिंता। हर दिन नए टास्क अलग से थमा दिए जाते हैं। दूसरे अधिकारी ने कहा- ऐसा न हो कि वे अधीनस्थों की नब्ज टटोल रहे हों। इसलिए जो टास्क मिल रहे हैं उन पर खरे उतरो। तीसरे ने कहा कि चलो एक बार गुगली फेंककर देखते हैं।

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