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मध्यप्रदेश

मंदसौर में पशुपतिनाथ लोक धर्मस्व विभाग बनाएगा या नगरीय प्रशासन

मंदसौर। उज्जैन में श्री महाकाल महालोक व काशी में विश्वनाथ कारिडोर धाम के बाद श्री पशुपतिनाथ लोक बनाने की तैयारी भी शुरू हो गई थी पर अब क्रियान्वयन विभाग की लड़ाई में फिलहाल मामला उलझा हुआ है। मंदसौर से एक माह पहले कलेक्टर ने कंसलटेंट नियुक्त करने की फाइल नगरीय प्रशासन विभाग को भेजी थी। पर भोपाल में नगरीय प्रशासन विभाग इस फाइल को धर्मस्व विभाग में भेजने की तैयारी कर रहा हैं। विधायक यशपालसिंह सिसौदिया पूरे मामले पर नजर रखे हुए हैं और अगर कुछ दिनों में दोनों ही विभाग कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाते हैं तो फिर वह मुख्यमंत्री की अदालत में इसे ले जाएंगे।

मंदसौर जिला प्रशासन ने भी शुरू कर दी थी तैयारी

मंदसौर गौरव दिवस के कार्यक्रम में आए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने पशुपतिनाथ महादेव लोक के लिए बजट की चिंता नहीं करने का आश्वासन भी दिया और मंच पर ही बैठे वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा को कहा था कि आप तो इसी जिले के हो फिर खजाना खोल क्यों नहीं देते हों। इसके बाद जिला प्रशासन ने भी तैयारी शुरू कर दी थी और श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में कंसलटेंट की नियुक्ति संबंधी प्रस्ताव को पास कर भोपाल भेज दिया।

धर्मस्व विभाग के अधिकारी बोले, यह हमारे विभाग का कार्य नहीं

प्रशासन को उम्मीद थी कि भोपाल में भी फाइल तेजी से चलेगी और जनवरी अंत तक कंसलटेंट की नियुक्ति हो जाएगी। पर सूत्रों की माने तो नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने इसके लिए आगे की कार्रवाई करने से मना कर दिया हैं और अब वह पूरे मामले को धर्मस्व विभाग को भेजने की तैयारी कर रहे हैं। भोपाल में पदस्थ नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभाग ने महाकाल लोक जरुर बनाया हैं पर यह हमारे विभाग का कार्य नहीं हैं। इसलिए आगे सभी धार्मिक स्थल पर बनने वाले लोक या महालोक के लिए हम धर्मस्व विभाग को ही प्रस्तावित कर रहे हैं। खैर अब पशुपतिनाथ लोक कोई भी विभाग बनाए पर इसकी प्रक्रिया जल्दी होना चाहिए।

उज्जैन में प्रतिदिन एक लाख तक आने लगे श्रद्धालु

उज्जैन में अक्टूबर 2022 में महाकाल महालोक का लोकार्पण हुआ था और यह इतना भव्य बना कि इसकी अलौकिक छटा की चर्चाएं देश की सीमाओं को भी पार कर गई हैं। अब तो विदेशी भी महाकाल लोक का दीदार करने पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही मप्र के प्रमुख शिव मंदिरों में से एक व विश्व की एकमात्र अष्टमुखी शिव प्रतिमा वाले श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर के आस-पास भी श्री पशुपतिनाथ महालोक की परिकल्पना आकार लेने लगी थी नईदुनिया ने सबसे पहले 1 नवंबर को इस मुद्दे को उठाया था। इसके बाद विधायक यशपालसिंह सिसौदिया व कलेक्टर गौतमसिंह ने भी इसमें रुचि ली है। मंदसौर गौरव दिवस पर 8 दिसंबर को मंदसौर आए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से भी विधायक यशपालसिंह सिसौदिया ने श्री पशुपतिनाथ महालोक के लिए राशि की मांग की थी।

यहां जमीन अधिग्रहण की भी ज्यादा जरूरत नहीं

श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर के आसपास अच्छी-खासी शासकीय जमीन है और जरूरत पड़ने पर आस-पास की निजी जमीन भी अधिग्रहित की जा सकती है। हालांकि उसकी जरूरत ज्यादा होगी नहीं। अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की कोशिश है कि वर्ष 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ से पहले यह पूरा बनकर तैयार हो जाए। क्योंकि उस समय राजस्थान व अन्य प्रदेशों से लाखों श्रद्धालु मंदसौर होकर ही उज्जैन जाते हैं। मंदिर से लगी हुई शिवना नदी होने से यह कारिडोर आकर्षक बनेगा और इसकी डिजाइन भी इसी तरह बनवाई जाएगी कि नदी किनारे बनने वाले घाट व अन्य निर्माण रात के समय रंग-बिरंगी लाइटिंग में आकर्षक लगें। बाढ़ के दौरान मंदिर तक पानी नहीं पहुंचे, इस पर भी विचार किया जाएगा।

शिव मंदिरों में भारत का तीसरा कारिडोर होगा

अब तक देश के शिव मंदिरों में सबसे पहले काशी व इसके बाद उज्जैन में कारिडोर (श्री महाकाल महालोक) बना है। अब सही समय पर श्री पशुपतिनाथ लोक तैयार होता है तो यह शिव मंदिरों में भारत का तीसरा कारिडोर बनेगा।

डिजाइन बनने के बाद ही तय होगी लागत

विधायक यशपालसिंह सिसौदिया ने बताया कि पशुपतिनाथ लोक की परिकल्पना के बाद मुख्यमंत्री की प्रारंभिक सहमति मिल चुकी है। योजना की डीपीआर तैयार करने के लिए कंसल्टेंट एजेंसी की नियुक्ति का प्रस्ताव तैयार कर भोपाल भेज दिया हैं। वहां दोनों विभाग अगर इस मामले में तेजी से कार्रवाई नहीं करते हैं तो फिर मुख्य मंत्री के पास जाकर इसे जल्द कराने का प्रयास करेंगे। क्योंकि कंसलटेंट ही यहां उपलब्ध जमीन, कहां क्या बनेगा, शिवना नदी के किनारे के घाट कैसे रहेंगे, कारिडोर कितना बड़ा होगा आदि का समावेश कर डीपीआर बनाएंगे। इसके बाद ही इसकी लागत और अन्य बातें तय होंगी। इसीलिए हमारी कोशिश है कि इसे जल्द जमीन पर उतारा जाए, ताकि सिंहस्थ के पहले यह बनकर तैयार हो जाए।

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