मिथुन चक्रवर्ती के बेटे नमाशी बोले मौका मिलना आसान लेकिन बने रहने के लिए हुनर जरूरी

इंदौर। जन्म बेशक फिल्म से जुड़े परिवार में हुआ लेकिन फिल्म जगत में बतौर करियर कदम रखने से पहले मैं रंगमंच से वर्षों तक जुड़ा रहा। मुझे रंगमंच करना बहुत पसंद है। मेरा मानना है कि रंगमंच अभिनेता का माध्यम है और फिल्म निर्देशक का। रंगमंच के लिए मंच छोटा नजर आता है लेकिन कलाकार के लिए उस पर खुद को व्यक्त करने का असीमित स्थान होता है, जबकि फिल्म के सेट पर कलाकार कैमरा, निर्देशक और अन्य तमाम पहलुओं से बंधा रहता है। वहां उसे वही करना पड़ता है जो निर्देशक बताता है क्योंकि तकनीकी पक्ष को भी ध्यान में रखना पड़ता है।
यह कहना है ख्यात अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती के बेटे नमाशी चक्रवर्ती का जो फिल्म बैड बाय से हिंदी फिल्म जगत में कदम रख रहे हैं। नमाशी के साथ अमरीन भी इस फिल्म से अपने करियर की शुरुआत करने जा रही हैं। बुधवार को शहर आए इन कलाकारों ने नईदुनिया से चर्चा में अनुभव साझा किए। कलाकारों ने शहर के सिनेमा हाल जाकर अपने प्रशंसकों से मुलाकात भी की।
पिता और मेरी कोई तुलना नहीं : नमाशी
नमाशी कहते हैं इस फिल्म में काम करना मेरे लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था। जब मैं सेट पर पहुंचा तो मुझे लेकर दूसरों की आशाएं कुछ ज्यादा ही थी इसकी वजह पिता की छवि है। तीन-चार दिन बाद निर्देशक ने मुझसे कहा कि तुममें मिथुन का अक्स हो सकता है लेकिन तुम्हें अपनी अलग पहचान बनाना है। वास्तव में पिता से मेरी तुलना की ही नहीं जा सकती क्योंकि पिता ने 380 फिल्मों में अभिनय किया और मेरी यह पहली फिल्म है। इसके अलावा मेरे साथ चुनौती यह भी थी कि फिल्म में कई बड़े-बड़े कलाकार हैं और हास्य भी बहुत है। अपने अभिनय से किसी को हंसाना आसान नहीं। जहां तक फिल्म जगत में परिवारवाद की बात है तो उसे नकारा नहीं जा सकता लेकिन यह भी सच है कि आगे वही बढ़ता है जो मेहनत करता है। मौका मिलना आसान हो सकता है लेकिन बने रहने के लिए हुनर का होना जरूरी है।
इस इंडस्ट्री में सभी के लिए जगह : अमरीन
अमरीन अनुभव साझा करते हुए बताती हैं कि जब मैं फिल्मी दुनिया में आई थी तो एक फिल्म में अभिनय करने का मौका मिला। कई महीने उसकी तैयारी भी की लेकिन फिल्म बन ही नहीं पाई। पहली फिल्म का नहीं बनना और 4-5 वर्ष तक काम नहीं मिलना मुझे निराशा की ओर ले गया। मैं बहुत उदास रहने लगी लेकिन जब कई बड़े कलाकारों के बारे में जानने की कोशिश की तो लगा कि मैं अकेली नहीं हूं। यह दौर कई कलाकारों ने देखा है। तब तय किया कि निराश होकर क्यों अपने मन के साथ बुरा व्यवहार करूं, इसलिए सकारात्मकता से सोचते हुए आगे बढ़ने का प्रयास किया। प्रकृति ने जो तय किया है वही होगा, यही सोचकर मैंने दोबारा काम शुरू किया। उतार-चढ़ाव तो इस इंडस्ट्री का हिस्सा है। वास्तव में इस इंडस्ट्री में सभी के लिए जगह है।


