आज से बीना स्टेशन पर रुकेगी शताब्दी एक्सप्रेस

ग्वालियर। रेलवे बोर्ड ने शताब्दी एक्सप्रेस को बीना स्टेशन पर स्टापेज निर्धारित किया है। यह ट्रेन 12 अप्रैल से अप व डाउन में रुकना शुरू हो जाएगी। छह महीने के लिए स्टापेज दिया गया है। इस ट्रेन के बीना रुकने की वजह से दमोह व सागर जाने वाले लोगों को सहूलियत होगी, क्योंकि ग्वालियर से बीना तक लोग सफर कर सकते हैं। उसके बाद सागर व दमोह के लिए ट्रेन ले सकते हैं। अभी तक यह ट्रेन बीना से थ्रू निकलती थी, लेकिन यात्रियों की लंबे समय से इसे रोकने की मांग की जा रही थी। 12002 नई दिल्ली-रानी कमलापति शताब्दी एक्सप्रेस दोपहर 12.40 बजेब बीना जंक्शन पहुंचेगी, जो दो मिनट रुककर 12.42 बजे रानी कमलापति स्टेशन के लिए रवाना होगी। 12001 रानीकमलापति-नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस रानी कमलापति से चलकर शाम 5 बजे बीना जंक्शन पहुंचेगी, जो दो मिनट रुकते हुए शाम 5 बजकर 2 मिनट पर नई दिल्ली की ओर रवाना होगी।
आज कई क्षेत्रों में पांच घंटे होगी बिजली कटौती
बिजली कंपनी 12 अप्रैल को अलग-अलग क्षेत्रों में सुधार कार्य करेगी। इस वजह से सुबह नौ बजे से दो बजे तक गुडा, बीजासेन नगर, कृष्णा कालोनी, पीपरी खो, नादरिया की माता, चौरसिया कालोनी, 14 बटालियन, वकील कालोनी, सूरज नगर, सागरताल चौराहा, रमजन नगर, बहादुर नगर, जलालपुर रोड, गोकुलधाम कालोनी, गोकुल विलास, दानेबाबा का मंदिर आदि जगहों पर कटौती होगी। सुबह साढ़े नौ बजे से ढाई बजे तक अपना घर कालोनी, बीडी कालोनी, लोधी मार्केट, 60 फुटा रोड, महलगांव, राघवेंद्र नगर, सरस्वती नगर, कुंदन नगर, कर्मचारी आवास अादि जगहों पर बिजली कटौती होगी।
संयोग भी सत्य है और वियोग भी सत्य है
संसार में दुख कहीं नहीं हैं और सुख की सोच नहीं है, यदि सुख की सोच बन जाए तो दुख कहीं नहीं है और सोच को भी तोड़ना चाहिए दुख कहीं भी नहीं है। संयोग भी सत्य है और वियोग भी सत्य है, अब दुख किस बात का है ? सोच समझ में आना चाहिए, व्यवस्थित विचार आना चाहिए, विचार पवित्र है तो ज्ञानी संपूर्ण दुख का समापन है। कुछ समय आंख बंद करके भी सत्य को जानने के लिए देना चाहिए और कुछ समय आंख खोलकर सत्य को जानना चाहिए। यह विचार गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माता ने दिगंबर जैन वरैया जैन मंदिर में मंगल प्रवचन के दौरान कही। वहीं स्वस्ति भूषण माता, लक्ष्मीभूषण माता ससंघ की शोभायात्रा राजपायगा रोड स्थित जैन छात्रावास से निकली। शोभायात्रा में महिलाएं केशरिया साड़ियों में डांडिया नृत्य करती हुईं एवं पुरुष वर्ग सफेद परिधान में जयघोष लगाते हुए चल रहे थे।


