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मध्यप्रदेश

इंदौर के आसपास खेतों में धड़ल्ले से जलाई जा रही पराली बढ़ा रही प्रदूषण

इंदौर। फसल कटाई के बाद इंदौर जिले में पिछले कुछ दिनों से फसल कटाई के बाद खेत में पराली (नरवाई) जलाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। अधिकांश किसान दिन में तो कुछ रात के अंधेरे में भी खेतों में पराली जला रहे हैं। इसके कारण इंदौर के प्रदूषण स्तर में बढ़ोतरी हो रही है। यही वजह है कि इंदौर शहर के कई घरों की छतों व बरामदों, गैलरी व सड़कों पर पराली जलाने के बाद राख के कण उड़कर पहुंच रहे हैं। पराली जलाने पर रोक लगाने में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला प्रशासन व कृषि विभाग के अधिकारी असफल रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी तो इस पर नियंत्रण लगाने को अपनी जिम्मेदारी ही नहीं मानते हैं।

रात के अंधेरे में पराली जलाने की ज्यादा घटनाएं

पिछले एक सप्ताह से पराली जलाने की घटनाओं में तेजी आ गई है। एयरपोर्ट से धार रोड की ओर रिंजलाई व अन्य गांवों में तो किसान रात के अंधेरे में पराली में आग लगा रहे हैं। इसके अलावा बायपास, देवास व उज्जैन रोड से लगे खेतों में भी पराली जलाने की घटनाएं बढ़ गई हैं। कृषि की जमीन के आसपास पिछले कुछ वर्षो में रहवासी क्षेत्र व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों का निर्माण भी हो गया है। ऐसे में पराली जलाए जाने के कारण रहवासी व व्यवसायिक क्षेत्र के चपेट में आने का खतरा बना रहता है।

पराली जलाने से मृदा को नुकसान

फसल काटने के बाद उसमें बची पराली को हटाने की मशक्कत से बचने के लिए किसान अक्सर उसमें आग लगाकर अगली फसल के लिए खेत को तैयार करने का प्रयास करते हैं। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक पराली जलाए जाने के कारण उसमें मौजूद लाभदायक जीवाणु जलकर नष्ट हो जाते हैं, वहीं इससे मिट्टी भी खराब होती है। इससे भूमि कठोर हो जाती है। इसके कारण भूमि की जल धारण क्षमता कम हो जाती है और फसलें सूखती हैं। खेत की सीमा पर लगे पैड़-पौधे जलकर नष्ट हो जाते हैं। खेतों कार्बन से नाइट्रोजन तथा फास्फोरस का अनुपात कम हो जाता है। केंचुए नष्ट हो जाते हैं। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है।

पराली जलाने पर जुर्माने का प्रविधान

2 एकड़ जमीन: 2 से 5 हजार रुपये जुर्माना

2 से 5 एकड़ जमीन: 5 हजार रुपये जुर्माना

5 एकड़ से अधिक : 15 हजार रुपये तक जुर्माना

सिर्फ 200 किसानों को ही रोटावेटर की खरीदी पर अनुदान दिला पाया कृषि विभाग

बुआई से पहले खेत को तैयार करने के लिए रोटावेटर का उपयोग किया जाता है। यह मशीन खेत के पुराने अवशेषों को जड़ से खोदकर अच्छी तरह मिट्टी में मिला देती है। बाजार में यह 50 हजार रुपये से 2 लाख रुपये में उपलब्ध है। महंगा उपकरण होने के कारण किसान इसे नहीं खरीद पाते और वे इसके इस्तेमाल के बजाय पराली जलाना आसान समझते हैं। रोटावेटर पर कृषि विभाग द्वारा कृषकों को अनुदान दिया जाता है। इंदौर जिले में सिर्फ 200 किसानों को विभाग रोटवेटर की खरीदी पर अनुदान दिलवा पाया है।

करेंगे कार्रवाई

इंदौर जिले के किसानों को समझाइश दी जा रही है कि वे फसल की कटाई के बाद पराली नहीं जलाएं। इस संबंध में निर्देश भी जारी किए गए हैं। पराली जलाने पर किसानों पर 2 हजार से 15 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रविधान है। किसान चाहें तो हार्वेस्टर में स्ट्रोसिपर लगाकर पराली से भूसा तैयार कर सकते हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त आय भी हो सकती है। जल्द ही हमारी टीम ग्रामीण क्षेत्रों में जांच कर कार्रवाई करेगी।

-एसएस राजपूत, उप संचालक, कृषि विभाग

कृषि विभाग को करेंगे निर्देशित

खेतों में फसल कटाई के बाद पराली जलाने पर प्रतिबंध है। ऐसा करने वालों पर अथलदंड लगाए जाने का प्रविधान है। मैं कृषि विभाग को निर्देशित करूंगा कि वो पराली जलाने वालों पर रोक लगाए।

-इलैया राजा टी, कलेक्ट

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