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मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश में क्षतिग्रस्त हुए बाघ गलियारों के कारण बढ़ी मौत

उमरिया। बाघ आंकलन 2022 की रिपोर्ट जारी हो गई है और देश में पिछले चार सालों में दो सौ बाघ बढ़ने की खुशखबरी भी मिल चुकी है। रिपोर्ट के साथ ही विशेषज्ञों की यह सलाह भी मिल गई है कि बाघों की मौत को राेकने के लिए बाघ गलियारों के विकास पर ध्यान देना आवश्यक होगा ताकि बाघ एक जंगल से दूसरे जंगल में स्वच्छंद विचरण कर सके। बाघों की मौत का सबसे बड़ा कारण उनके मार्ग का अवरूद्ध होना ही है। बाघ के रास्तों में विकास के नाम से खड़ी की जाने वाली बाधा ही मध्यप्रदेश में बाघों की बड़ी संख्या में मौत का कारण रहा है।

गलियारा बंद तो जंगल छोटे:

बाघों के गलियारे क्षतिग्रस्त होने के कारण बाघों के लिए जंगल छोटे पड़ जाते हैं। गलियारे होने से बाघ एक जंगल से दूसरे जंगल तक आसानी से पहुंच सकता है। इससे बाघों का आमना-सामना कम होता है और उनमें टैरेटरी के लिए होने वाली फाइटिंग में कमी आती है। फाइटिंग में कमी लाकर ही बाघों को सुरक्षा प्रदान की जा सकती है और यह तभी संभव है जब उनके मार्ग उनके अनुकूल हों। ऐसा नहीं है कि प्रदेश के जंगलों में कारीडोर के लिए काम नहीं हुआ लेकिन जो काम हुआ वह सिर्फ नाम के लिए ही हुआ जिसका कोई भी लाभ बाघों को सुरक्षा देने में नहीं मिल सका।

घना जंगल और भोजन पानी:

बाघ गलियारों में बाघों के लिए घना जंगल, घास के मैदान, शाकाहारी जानवर, पानी सभी की आवश्यकता होती है। घने जंगल होंगे तो बाघ उसमें आराम से रह सकेगा और आगे बढ़ सकेगा। घास के मैदान होंगे तो उसमें शाकाहारी जानवर रह सकेंगे। शाकाहारी जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था होगी तभी बाघ उनका शिकार कर पाएगा। इस परिकल्पना के साथ बाघ गलियारा विकसित किए जाने पर हमेशा से ही वन्य जीव विशेषज्ञ और वन्य प्राणी प्रेमियों ने जोर दिया है। और अब यही सलाह बाघ आंकलन की रिपोर्ट के साथ विशेषज्ञों ने मध्यप्रदेश के वन विभाग को दे दी है।

प्राकृतिक गलियारा क्षतिग्रस्त:

न सिर्फ मध्यप्रदेश के जंगलों को आपस में जोड़ने वाला प्राकृतिक गलियारा क्षतिग्रस्त हो चुका है बल्कि मध्यप्रदेश के जंगल को छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के जंगल से जोड़ने वाला प्राकृतिक गलियारा भी अब नहीं रहा है। जंगलों के इन गलियारों को न सिर्फ खदानों ने क्षतिग्रस्त किया है बल्कि सड़कों और दूसरे निर्माणों ने भी बुरी तरह से प्रभावित किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढ़ती बसाहट ने भी जंगल में जोखिम को बढ़ाया है। राजनैतिक लाभ के लिए जंगलों में लोगों को जमीनें दिया जाना भी गलियारे के मार्ग की एक बड़ी बाधा है।

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