आइआइएम इंदौर का दीक्षा समारोह – हाथ में डिग्री दिल में दुनिया जीतने का हौसला

इंदौर। देश के यंग मैनेजर के लिए शनिवार का दिन खास था। इस दिन भारतीय प्रबंध संस्थान (आइआइएम) इंदौर का दीक्षा समारोह आयोजित किया गया। समारोह में आइआइएम इंदौर के सात कोर्स के 739 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। कुछ कोर्सेस के विद्यार्थियों ने अकादमिक में प्रथम रैंक पाई, तो उन्हें स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। कोरोना महामारी के बाद पहली बार इतना भव्य समारोह हुआ। इसमें विद्यार्थियों के साथ माता-पिता भी पहुंचे। मुख्य अतिथि ओएनजीसी के चेयरमैन अरुण कुमार सिंह, आइआइएम इंदौर के बोर्ड आफ गवर्नर्स के चेयरमैन एमएम मुरुगप्पन व निदेशक डा. हिमांशु राय ने डिग्रियां प्रदान कीं।
मुख्य अतिथि सिंह ने युवाओं को स्पष्ट संदेश दिया- अगले कुछ दशक भारत के हैं। भारत में सपने हैं, उम्मीदें हैं और गुणवत्ता वाला जीवन है। अगले 20 साल भारत की स्थिति पश्चिमी देशों से बेहतर रहेगी, इसलिए अपने ही देश में रहें और देश को आगे ले जाने के लिए जुट जाएं। सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत, ईमानदारी व अनुकूलता के साथ काम करें। आप भाग्यशाली हैं कि भारत के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान आइआइएम में पढ़ने का अवसर मिला है। यहां से निकलें तो केवल पैकेज की दौड़ में न लगे रहें बल्कि देश व समाज के लिए काम करें।
अंग्रेजी के इन चार डी को बना लें अपना मंत्र
अंग्रेजी के चार डी-डेमोग्राफी (जनसांख्यिकीय) बदलाव, डिजिटलाइजेशन, डीकार्बोनाइजेशन और डीग्लोबलाइजेशन पर सदैव ध्यान रखें। देखें कि इनके कारण किस प्रकार अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। उन अवसरों को स्व तथा देशहित में लपक लें। सिंह ने कहा कि शिक्षा प्रणाली मानव जाति की सबसे बड़ी चुनौतियों को हल करने के लिए अनंत क्षमता वाले व्यक्तियों का उत्पादन कर रही है। प्रचुर मात्रा में धूप यानी सूर्य की ऊर्जा के निर्यात में नए अवसर के साथ डीकार्बोनाइजेशन से हम अरबों की बचत कर रहे हैं। आंशिक विवैश्वीकरण जोखिम लेने के इच्छुक लोगों के लिए अनंत अवसर प्रस्तुत करता है। इन्हें समझकर भविष्य को आकार दें।
सुंदर पिचाई की तरह बनना है – मनस्विनी
पीजीपी की छात्रा श्रेणी में टापर रहकर स्वर्ण पदक प्राप्त करने वालीं मनस्विनी ठाकुर ने कहा- आइआइएम से शिक्षा लेने के बाद मुझमें इंजीनियरिंग के साथ मैनेजमेंट की समझ भी विकसित हो गई है। हाल ही में प्लेसमेंट प्रक्रिया में एक कंपनी में अच्छे पैकेज पर नौकरी आफर हुई है। मेरी इच्छा हमारे भारत के गौरव गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई जैसा बनने की है। मनस्विनी को कुल तीन स्वर्ण पदक प्राप्त हुए हैं।
तकनीक से दूंगा समाज को लाभ – प्रशांत कुमार
ईपीजीपी कोर्स रैंक एक के प्रशांत कुमार सिंह ने भी स्वर्ण पदक प्राप्त किया। रुड़की के रहने वाले प्रशांत ने बताया- अब मैं दुनियाभर की तकनीक को और बारीकी से समझने की कोशिश करूंगा और आम जनमानस के जीवन की जटिलता कम करने में कैसे उपयोग किया जा सकता है, इस पर काम करूंगा।
मनुष्यों की परेशानी दूर करने का प्रयास करूंगा – वाशु
पीजीपी कोर्स में रैंक एक प्राप्त वाशु गोल्यन को भी स्वर्ण पदक मिला। बंगाल के वाशु कहते हैं- हम सब मनुष्यों की परेशानियां कमोबेश एक जैसी हैं, इसलिए जीवन में मुझे जो परेशानियां दिखाई देंगी, उन्हें दूर करने के लिए कार्य करूंगा। इससे समाज को स्वत: ही हल मिलता जाएगा।
मध्यम वर्ग के निवेश के लिए काम करना चाहूंगा – अंशुल
पीजीपीएमएक्स कोर्स के टापर अंशुल खरे को स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। वे मध्य प्रदेश के रीवा के रहने वाले हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग करने के बाद आइआइएम से शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने बताया कि अपनी स्किल को बेहतर करने के लिए आइआइएम में प्रवेश लिया। मैं भविष्य में मध्यम वर्ग के लोगों का पैसा सही जगह निवेश हो, इस दिशा में कार्य करना चाहता हूं।
सीखा तभी सार्थक, जब यह आजीवन चले – मुरुगप्पन
आइआइएम इंदौर के बोर्ड आफ गवर्नर्स, चेयरमैन एमएम मुरुगप्पन ने कहा कि सीखना तभी सार्थक है, जब यह आजीवन चलता रहे। आप सभी पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखें। भारत और विश्व को एक बेहतर जगह बनाने के लिए अपनी शिक्षा और नेतृत्व का उपयोग करें।
अपने देश भारत के लिए ‘एवेंजर्स’ बनें
आइआइएम इंदौर के निदेशक डा. हिमांशु राय ने कहा कि अपने आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को बनाए रखें। स्वयं की क्षमताओं में अटूट विश्वास करें। चुनौतियां आएंगी, उनका सामना करके अनुभव प्राप्त करें। अपने राष्ट्र के लिए “एवेंजर्स” की तरह उत्साह के साथ योगदान दें। जहां भी जाएं, वहां संवेदनशील बने रहें और सकारात्मकता का विकास करें।


