माय लार्ड सूख गए जमानत के पौधे पानी मिला न हो पाई सुरक्षा

ग्वालियर। हाईकोर्ट की पर्यावरण सरंक्षण की अनूठी पहल से लगे हजारों पौधे अब गायब हो गए हैं। इस पहल के तहत अलग-अलग अपराध के आरोपितों को यह कहते हुए जमानत दी थी कि वह पौधे लगाएगा। पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल भी करेगा। यह देखभाल जब तक करनी होगी, तब तक ट्रायल चलती है। लोगों ने जमानत की शर्त के पौधे लगाने के लिए शारदा बालग्राम की पहाड़ी को चुना था। ये पौधे पहाड़ी के ऊपर स्थित विवेकानंद पार्क के मार्ग पर लगाए थे। उनकी सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड भी लगाए। सुबह शाम को पानी डालने भी आते थे, लेकिन अब स्थिति उलट हो गई है। विवेकानंद पार्क के मार्ग पर न ट्री गार्ड बचे, न पौधे। पौधे सूख गए हैं। अब पानी डालने वाले भी नजर नहीं आ रहे हैं। नईदुनिया ने सुबह व शाम को इन पौधों की पड़ताल की तो जमानत के पौधे सूख गए। न्यायमूर्ति आनंद पाठक के आदेश पर यह पौधे लगाए थे, लेकिन अब न्यायमूर्ति आनंद पाठक का स्थानांतरण भी जबलपुर हो चुका है।
फलदार व छायादार लगाए थे पौधे
– शारदा बालग्राम की पहाड़ी पर फलदार व छायादार पौधे लगाए थे। फलदार में जामून के पौधे रोपे थे। छायादार में सीसम, पीपल, बड़, नमी के पौधे लगाए थे। साथ में ट्री गार्ड लगाए थे।
– ऐसे लोगों ने पौधे लगाने के लिए इस जगह को चुना था, जिनके पास शहर में जगह नहीं थी। वह लोग इस पर पौधे रोपते थे। क्योंकि लोगों के सामने जगह का संकट आया था। शारदा बालग्राम की पहाड़ी पर लोगों ने पौधे रोपना शुरू कर दिया था।
– अब पौधों के अवशेष भी नहीं दिख रहे हैं। यहां पर झाड़ियां बनी हैं। नाली ही दिख रही है। पौधे लगाने के लिए नाली खोदी थी।
10 हजार से अधिक पौधे रोपे गए थे
ग्वालियर खंडपीठ के अंतर्गत ग्वालियर चंबल संभाग के आठ जिले व विदिशा जिला आता है। जस्टिस पाठक के पास क्रिमिनल रोस्टर था। उन्होंने जमानत की शर्त में पौधे लगाने की शर्त जोड़ी थी। नौ जिलों में 10 हजार से अधिक पौधे रोपे गए थे।
– सरकारी व निजी जमीन पर लोग पौधे रोपकर न्यायालय में फोटो पेश करते थे। कोर्ट ने पौधों की जिम्मेदारी आरोपितों को दी थी।
न्यायालय ने पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे लगवाए थे।
न्यायालय ने पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे लगवाए थे। जमानत की शर्त का उल्लंघन होता है तो उसे निरस्त करने पर विचार होना चाहिए। यह शर्त का उल्लंघन है। यह एक अच्छी पहल थी। शारदा बालग्राम की पहाड़ी पर पौधे नहीं दिख रहे हैं। 2021 व 2022 में बड़ी संख्या में पौधे लगे दिखते थे। ट्री गार्ड पर केस नंबर भी लिखा रहता था।
– राजीव शर्मा, पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता


