धर्मनिरपेक्षता के बीच समाजों को साधने की कोशिश

भारतीय राजनीति की मैदानी हकीकत यह है कि कोई कितना ही विकास का नारा लगाए, लेकिन ‘मत के दान’ में धर्म-समाज की भूमिका अहम होती है। इसलिए धर्मनिरपेक्षता की चर्चा के बीच धर्म और समाज को नजरअंदाज नहीं कर सकते। प्रदेश कांग्रेस के मुखिया कमल नाथ ने इंदौर प्रवास पर विभिन्न समाज के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। पिछली बार जब वे सिख समाज के कार्यक्रम में गए थे, तो विवाद हो गया था। इस बार सिख समाज के कुछ ‘भरोसेमंद’ चेहरे खुद ही मिलने आ गए। कुछ अन्य समाज के प्रतिनिधि भी थे। बड़ा सामाजिक जलसा शाम को स्वप्निल कोठारी ने किया, जिसमें शहर का जैन समाज इकट्ठा था। पिछली बार भी कमल नाथ की अगवानी उन्होंने युवाओं के बड़े आयोजन से की थी। इस बीच राजनीति के गलियारों में चर्चा इस बात की है कि रोजा इफ्तार पार्टी में नेताओं की तस्वीरें नजर नहीं आ रही।
इंदौरी तिकड़ी के सामने पहली चुनौती
प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इंदौर की निगमायुक्त प्रतिभा पाल के तबादले की चर्चा प्रशासनिक गलियारों से लेकर राजनीति के ठियों तक पर है। पाल की प्रतिभा शहर ने देखी है। अपने प्रशासनिक कौशल से शहर की स्वच्छता में नंबर वन की परंपरा उन्होंने कायम रखी। मगर महापौर परिषद के साथ उनकी पटरी कितनी बैठी, यह भी शहर कई मौकों पर महसूस कर चुका है। वैसे सत्ता पक्ष के साथ कार्यपालिका के रिश्ते मधुर ही रहते हैं, लेकिन विधानसभा स्तर पर आयोजित हुई विकास यात्रा के पहले निगम अफसरों के खिलाफ पार्षदों की पीड़ा खुलकर सामने आ गई थी। खैर, अब शहर में नई निगमायुक्त हर्षिका सिंह आ रही हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी राजनीति में नए हैं। कलेक्टर डा. इलैया राजा टी. भी कुछ समय पहले ही आए हैं। तिकड़ी के सामने पहली चुनौती स्वच्छता में नंबर वन का तमगा कायम रखना है। स्वच्छता सर्वे जल्द शुरू होने वाला है।
शहरी राजनीति में शुक्ला की चर्चा
शहरी राजनीति में इन दिनों ‘शुक्ला’ की खासी चर्चा है। शहर कांग्रेस में विधायक संजय शुक्ला ने अपनी स्थिति मजबूत कर रखी है। अब इसी परिवार के गोलू शुक्ला पर भाजपा मेहरबान है। दोनों भाई हैं, एक ही छत के नीचे रहते हैं और एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव भी लड़ चुके हैं। भाजपा ने गोलू को आइडीए का उपाध्यक्ष बनाया और अब राज्यमंत्री का दर्जा भी दे दिया है। कुछ की नजर में यह उनके टिकट की दौड़ से बाहर होने का संकेत है तो कुछ इसे भाई के ब्राह्मण मतों को साधने की कवायद की तर्ज पर देख रहे हैं। ब्राह्मण मतों पर भाजपा के दिग्गज नेता स्व. पंडित विष्णुप्रसाद शुक्ला की तगड़ी पकड़ थी। उनके निधन के बाद ब्राह्मण समाज में संजय की पैठ बढ़ी। इसके बाद भाजपा को ब्राह्मणों को अपना बनाए रखने के लिए किसी ‘शुक्ला’ की ही जरूरत थी। विधानसभा चुनाव सिर पर है, ऐसे में राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो भविष्य तय करेगा।
क्रिकेट में भविष्य की सोच
इंदौर संभागीय क्रिकेट संगठन (आइडीसीए) के संसाधन प्रदेश क्रिकेट संगठन (एमपीसीए) से बहुत कम हैं। मगर वैभव दर्शाने में इंदौरी खेमा पीछे नहीं है। आइडीसीए की वार्षिक साधारण सभा की बैठक के बाद घोषणा की गई की खिलाड़ियों की सुविधा के लिए रेसीडेंशियल कांप्लेक्स बनाया जाएगा। यह महत्वाकांक्षी योजना है और यदि यह सपना आकार लेता है तो इंदौर संभाग के खिलाड़ियों के लिए बहुत बड़ी सुविधा होगी। पहले इंदौर के क्रिकेट का सिक्का प्रदेश में चलता था। मगर अब दूसरे संभाग की टीमें भी मजबूत हुई हैं। अंतर संभागीय टूर्नामेंट में इंदौर की टीम अपने ही घर में फाइनल नहीं खेल रही है। यह प्रदेश क्रिकेट के बेहतर होने का संकेत है। मगर इंदौर क्रिकेट के जिम्मेदार भविष्य के लिए सोच रहे हैं, यही सोच जरूरी है।


