यह अंधकार कुछ खास है इसमें उजास है

इंदौर। पड़ोस में छपी इस तस्वीर में आपको कुछ भी खास नहीं दिखेगा। एक खाली-सा दफ्तर है, कुर्सी पर बैठे लोग सुस्ता रहे हैं और पीछे झुटपुटे हल्के अंधेरे में कुछ लोग खाना खा रहे हैं। किंतु यह तस्वीर इतनी मामूली भी नहीं है। कुछ अर्थों में यह ‘अंधेरे’ पर ‘उजास’ की जीत है। यह सेंट्रल बैंक आफ इंडिया की विजय नगर शाखा है। गौर से देखेंगे तो पाएंगे कि यहां सभी लाइटें बंद हैं। पीछे तो अंधेरा थोड़ा गहरा भी है। दरअसल, यह इस बैंक का नवाचार है कि दोपहर में 30 मिनट के लंच के दौरान यहां सभी लाइट बंद कर दी जाती हैं, ताकि बिजली फालतू न जले। जैसे रामसेतु बनाने में गिलहरी ने छोटा-सा योगदान दिया था, उसी तरह देश की बिजली ग्रिड पर भार कम करने में यह बैंक छोटा किंतु महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
अनूठे अंदाज में हुआ मप्र का पहला जैविक विवाह
गोबर से लीपा मंडप, भोजन की सारी सामग्री केमिकल फ्री, सब्जी से लेकर आटा तक आर्गेनिक, आठ राज्यों से आए मेहमान और इसके बीच में बैठे दूल्हा-दुल्हन। यह दृश्य है मध्य प्रदेश की पहली जैविक शादी का, जो बीते दिनों इंदौर से कन्नौद की ओर जाने वाले रास्ते पर स्थित गांव बावड़ीखेड़ा में हुई। यहां के किसान दीपक सुलानिया ने भांजी का विवाह जैविक अंदाज में किया। बाजार से एक भी सामग्री ऐसी नहीं खरीदी, जिसमें रसायन हो। अपने ही खेत का गेहूं, दाल, सब्जी, धनिया, घर की ही गायों का दूध और उससे बना देशी घी। गोबर से लीपे गए मंडप में आम की लकड़ियों की आहूति देकर किया गया हवन। बहुत कम खर्च में हुए इस विवाह समारोह ने रसायन में डूब रही दुनिया को अनूठा संदेश दिया है।
धूल से उठकर फिर चमकने लगा कुमार गंधर्व का मुकुल
महान शास्त्रीय गायक कुमार गंधर्व के कंठ से जब संत कबीर के संदेश गीत के रूप में गूंजते थे, तो समूचा भारत मंत्रमुग्ध होकर सुनता था। किंतु उन्हें बेटे मुकुल शिवपुत्र द्वारा यश अर्जित करते देखने का सुख नहीं मिला। मुकुल नामालूम किस लौ में बहते चले गए कि घर छोड़कर आष्टा, सोनकच्छ, सीहोर, चापड़ा सरीखे छोटे-मोटे कस्बों की खाक छानते रहे। एक विराट फनकार का बेटा फकीर बनकर यहां-वहां भटकता रहा। एक बार तो ये शिवपुत्र किसी कस्बे के बस स्टैंड पर फटेहाल हालत में बरामद हुए। उन्हें देखकर संगीत जगत के लोग रो दिए थे। किंतु अब मुकुल संगीत की गोद में लौट आए हैं। वे फिर गा रहे हैं और अपने पिता की ही तरह महफिलें जमा रहे हैं। मुकुल संगीत के मुकुटमणि बनें, यही हम सबकी कामना है।
बावड़ी हादसे में पिता गए तो अचानक बड़ा हो गया बेटा
बीते दिनों हुए बावड़ी हादसे में जिन साइकिलिस्ट सुनील सोलंकी का दुखद देहांत हो गया, अब उनकी स्मृतियां जीवंत हो उठी हैं। दरअसल, उनका किशोरवय बेटा सात्विक देहरादून से अपनी पढ़ाई छोड़ मां का सहारा बनने इंदौर लौट आया है। उसे अभी मूंछों की कोर आ रही है, लेकिन पिता के चले जाने ने उसे अचानक बड़ा कर दिया है। उसने इंदौर लौटकर अपने पिता के डिजाइनिंग और प्रिंटिंग कारोबार को संभालने और पिता की यादों को जीवंत रखने का बीड़ा उठाया है। बीते दिनों उसने अपने पिता का मोबाइल खोला और वाट्सएप पर जितने भी लोग जुड़े थे, सबको मर्मस्पर्शी संदेश भेजा। इसमें सात्विक ने लिखा- ‘हे इंदौरवासियों, मैंने पापा को साक्षी मानकर संकल्प लिया है कि उनके डिजाइनिंग के शौक और व्यवसाय को बंद नहीं होने दूंगा, क्योंकि इसी में उनकी आत्मा बसती थी। इस संकल्प में मेरी सहायता करें।’


