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मध्यप्रदेश

ऊपर शांति भीतर सुलग रही आग

इंदौर शहर में पुलिस कमिश्नरी लागू होने के बाद अफसरों की फौज तैनात हो गई है लेकिन इंदौर के ग्रामीण इलाकों की स्थिति चिंताजनक हो रही है। छोटी-छोटी घटनाओं पर जिस तरह से प्रतिक्रियाएं हो रही हैं उससे यह तो साफ हो गया है कि ऊपर से भले ही यहां शांति नजर आ रही हो लेकिन भीतर तो आग सुलग रही है। अफसरों में तालमेल की कमी के कारण हालात बिगड़ रहे हैं। निरीक्षकों व डीएसपी स्तर के अफसरों ने ‘ऊपर’ रिपोर्टिंग करना शुरू कर दी है। शहर से दूर होने के कारण बातें तो बाहर नहीं आ पातीं लेकिन न सूचना संकलन ठीक से हो रहा है न पुलिसिंग। ताजा मामला महू के डोंगरगांव में पुलिस चौकी पर हुए पथराव का है। धरमपुरी निवासी युवती की मौत के बाद भड़की भीड़ ने कानून व्यवस्था की पोल खोल दी। इस घटना के बाद महू पहुंचे देहात के थाना प्रभारियों ने सिर्फ अफसरों और उनके बीच समन्यव की चर्चा की। यह मामला जैसे तैसे ठंडा हुआ था कि गौतमपुरा में बवाल हो गया। हत्या के बाद भले ही पुलिस ने आरोपितों के मकान तोड़ दिए लेकिन घटना पुलिस की लापरवाही से हुई थी। इसके पूर्व भी गौतमपुरा में मिली लाश की गुत्थी उलझ चुकी थी। देहात के बड़े अफसर चिंता में हैं कि किसी दिन ये चिंगारी विस्फोट में न बदल जाए।

हींग लगी न फिटकरी… कार्रवाई भी चोखी

शहर की बिगड़ी यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए तमाम प्रयोग अफसर करते रहे हैं लेकिन उससे नियम तोड़ने वालों की सेहत पर खास फर्क नजर नहीं आया। लेकिन आयुक्त प्रणाली लागू होने के बाद यातायात की कमान संभाल रहे अतिरिक्त पुलिस आयुक्त यातायात महेशचंद जैन की तरकीब से नियम तोड़ने वाले वाहन चालक संभलकर वाहन चला रहे हैं। जैन ने पहले अमानक नंबर प्लेट, साइलेंसर को मोडिफाई करवाकर तेज आवाज निकालने वाले वाहन चालकों के साथ ही स्टंट करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ अभियान शुरू किया। इसी दौरान हेल्प लाइन नंबर जारी कर लोगों से ऐसे वाहन चालकों के वीडियो मांग लिए। फिर क्या था शहर भर से आम लोग ऐसे वाहन चालकों के वीडियो पुलिस को भेजने लगे। ट्रैफिक विभाग में वीडियो फोटो देखने के लिए बकायदा टीम बना दी गई। नियम विरुद्ध वाहन चलाने वाले दर्जनों वाहन मालिकों के घर वीडियो देखकर पुलिस पहुंची और जुर्माना वसूला। रविवार को एक स्कूल बस का वीडियो जारी हुआ तो लोगों ने उसकी तुलना डीपीएस स्कूल हादसे से कर दी। जैन ने तुरंत अमले को सक्रिय कर दिया। सोमवार को स्कूल खुलते ही बस पर कार्रवाई होगी।

पुलिस आयुक्त को याद करेगा इंदौर

शहर के पहले पुलिस आयुक्त हरिनारायणाचारी मिश्र अपनी कार्यप्रणाली की वजह से शहरवासियों में खासे लोकप्रिय हैं। जबसे उनका तबादला हुआ है उनके निवास पर मिलने वालों का तांता लगा हुआ है। सरल स्वभाव के मिश्र एसएसपी बनकर इंदौर आए थे। उसके बाद डीआइजी-आइजी और फिर आयुक्त बने। डीसीपी-अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के तैनात होने के बाद भी लोग उनसे मिलकर ही शिकायत सौंपने की इच्छा लेकर पहुंचते थे। सीधा संवाद होने के कारण हरेक व्यक्ति मिश्र से सुनवाई चाहता था। आलम यह था कि आयुक्त बनने के बाद भी कंट्रोल रूम से ज्यादा आयुक्त कार्यालय में मजमा लगने लगा। हालांकि नवागत आयुक्त मकरंद देउस्कर भी इमानदार छवि के हैं। इंदौर में एसपी (ईस्ट) रह चुके देउस्कर मातहतों की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करते। मिश्र इस मामले में थोड़ा इंतजार करते थे और सुधार नहीं होने पर कार्रवाई करते थे।

जिला मिलने की कतार में शहर के डीसीपी

सरकार ने मशक्कत के बाद भोपाल-इंदौर के आयुक्त बदल दिए हैं। इनकी तबादला सूची तो दो महीने पहले ही आ जानी थी लेकिन सरकार विकल्प तलाश रही थी। अंतत: दोनों की अदला बदली करनी पड़ी। इसके बाद विभिन्न जिलों के एसपी की पोस्टिंग पर फाइल अटक गई है। वैसे यह सूची भी आयुक्त के साथ जारी हो जानी थी। सबसे बड़ी दिक्कत धार, आगर, देवास, उज्जैन जैसे बड़े जिलों के एसपी को लेकर आ रही है। जोन-2 में पदस्थ डीसीपी संपत उपाध्याय धार जिले के एसपी के लिए कतार में हैं। धार एसपी एपी सिंह को साढ़े तीन साल से ज्यादा समय हो चुका है। इंटेलिजेंस डीसीपी रजत सकलेचा को भी जिले की कमान मिलना है। आयुक्त मिश्र की पसंद होने के कारण उन्हें भोपाल भेजा जा सकता है। इसके अतिरिक्त शहर के जोन में पदस्थ अन्य आइपीएस भी इसी जुगाड़ में लगे हैं कि किसी तरह जिला मिल जाए। अब देखना यह है कि किसके हाथ सफलता लगती है।

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