सड़कों पर फिर नजर आ रहे आवारा मवेशियों के झुंड

ग्वालियर। शहर की सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं को पकड़ने में नगर निगम का अमला साबित हो रहा है। यही कारण है कि शहर की सड़कों पर फिर से आवारा मवेशियों के झुंड नजर आने लगे हैं। निगम का अमला इनको पकड़ने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करने में लगा हुआ है। अधिकारियों का दावा है कि आवारा मवेशियों को पकड़ने के लिए रात में भी अभियान चलाया जाता है, लेकिन हकीकत में ये कार्रवाई कहीं भी नजर नहीं आती है।
सच्चाई यह है कि शहर की सभी सड़कों पर आवारा गायें, बैल, सांड, कुत्ते, खच्चर 24 घंटे घूमते नजर आते हैं। इनमें सबसे अधिक गाय-बैल व कुत्ते सड़कों पर लोगों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। इनके झुंड के झुंड सड़कों पर अचानक आ जाने से कई लोगों की जान चली गई तो कई चोटिल भी हो चुके हैं। रात के समय गाय-बैल शहर के चौराहों-तिराहों पर आकर बैठ जाते हैं। निगम अमले के पास आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए दो ट्रैक्टर-ट्राली मौजूद हैं। इसके साथ ही दो एंबुलेंस भी उपयोग में ली जाती है। इनको पकड़ने के लिए निगम के पास सिर्फ 21 कर्मचारी हैं, जबकि जरूरत 20 की और है। कर्मचारियों की कमी के कारण रात में मवेशियों को पकड़ने का अभियान बंद पड़ा हुआ है। आवारा मवेशियों को पकडऩे के लिए एक गाड़ी पर कम से कम पांच कर्मचारियों को तैनात किया जाता है। दो शिफ्ट के हिसाब से निगम के पास अमले की कमी है। इन्हीं कर्मचारियों को श्वान व पशु एंबुलेंस के लिए भी भेजा जाता है। गत 19 मार्च को पड़ाव डफरन सराय के पास आरएस पाराशर के घर की दीवार उस समय टूट गई थी जब दो सांड आपस में लड़ रहे थे। इस घटना के बाद से पूरा परिवार दहशत में है। इससे पहले 13 मार्च को राम मंदिर के पास एक बालक को सांड ने पटक दिया था, लेकिन लोगों की मदद से वह बच गया। वार्ड 58 के हरीशंकर पुरम में सूरी हाउस के पास कॉलोनी में आ रही एक महिला पर अचानक सांड ने हमला कर दिया। इससे वह बुरी तरह घबरा कर दहशत में आ गई। वर्ष 2022 में नौ अगस्त को पूर्व पार्षद जगदीश पटेल पर सांड ने हमला कर दिया था, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हुए थे


