सिंधी कक्षाओं के संचालन में सहयोग करेगी साहित्य अकादमी

भोपाल। मध्य प्रदेश सिंधी साहित्य अकादमी ने सिंधी भाषा दिवस के मौके पर प्रदेश के तीन संभागों भोपाल, ग्वालियर और उज्जैन में वरिष्ठ साहित्यकारों की स्मृति में कार्यक्रमों का आयोजन किया। इसी सिलसिले में भोपाल के सन्त हिरदाराम नगर में कार्यक्रम वरिष्ठ कवि और नाटककार स्व खियलदास बेगवानी ‘फानी’ की स्मृति में किया गया। संस्कार विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में काव्य पाठ भी हुआ। यह कार्यक्रम वीना कला व सेवा समिति संत हिरदाराम नगर के सहयोग से किया गया। राकेश शेवानी ने संयोजन किया।
सिंधी साहित्य अकादमी के निदेशक राजेश वाधवानी ने स्वागत भाषण में कहा कि शिक्षण संस्थाओं में सिंधी भाषा के साप्ताहिक या पाक्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए अकादमी पूरा सहयोग करेगी। यहां सिंधी कक्षाओं के लिए विद्यार्थियों की रुचि को देखते हुए योग्य शिक्षकों को दायित्व देने में अकादमी पूरा सहयोग प्रदान करेगी। कार्यक्रम में द्रोपदी धनवानी, ओमप्रकाश टहलियानी पखी, भोपाल और अशोक जमनानी, नर्मदापुरम ने कविताएं सुनाई। अशोक जमनानी ने मुअन जो दड़ो शीर्षक से बेहतरीन काव्य पाठ किया। इस कविता में उनका कहना था कि मृतकों का टीला नाम है लेकिन वह स्मारक सदा हयात है। उसका अस्तित्व शताब्दियों से है। सिंधु घाटी की सभ्यता कितनी उन्नत थी, उसकी एक-एक ईंट यह सप्रमाण बताती है जो आज भी यथावत है।
लेखक अशोक मनवानी ने फानी साहब को याद करते हुए बताया कि वे कभी अकादमी के उपाध्यक्ष भी रहे। अनेक शिष्यों को काव्य सृजन से जोड़ा। उनकी सरल जीवन शैली थी। एक समर्पित और कर्मठ शिक्षक भी थे। भोपाल में सिंधी नाटकों की जमीन फानी साहब ने ही तैयार की। सैकड़ों कलाकारों को अभिनय में दक्ष बनाने में उन्होंने निर्देशक अशोक बुलानी का योगदान लिया। कार्यक्रम में वरिष्ठ कांग्रेस नेता नरेश ज्ञानचंदानी, शिक्षाविद् आनंद सबधाणी, सुशील वासवानी, विष्णु गेहानी, फानी साहब के पुत्र राजकुमार बेगवाणी सहित अनेक साहित्य कला प्रेमी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन राकेश शेवानी ने किया।आभार अकादमी के निदेशक वाधवानी ने माना।


