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मध्यप्रदेश

सतना निवासी बीएसएफ जवान की असम में मौत, स्वजन ने जताया हत्या का शक

सतना ।  सतना जिले के बीएसएफ जवान की असम में मौत के बाद बुधवार को जवान की पार्थिव शरीर गृह ग्राम पहुंचा। शव पहुचने के साथ मृतक के परिवार वालों ने हत्या का आरोप लगाकर एफआईआर सहित सीबीआई जांच की मांग करने लगे। शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन भी किया। घंटों चले हंगामे के बाद सतना में भी दोबारा पोस्टमार्टम कराने की बात पर सहमति बनी। जिसके बाद शव को जिला अस्पताल भेजा गया। जहां पीएम के बाद शव स्वजन के सुपुर्द कर दिया गया है।

क्या पूरा मामला

सतना जिले के ग्राम भाद में रहने वाले बीएसएफ के कांस्टेबल अतुल सिंह पुत्र विनोद सिंह उम्र 32वर्ष की गत 5 मार्च को असम में मौत हो गई। अतुल सिंह 31वीं बटालियन की चार्ली कंपनी में थे। उनकी पोस्टिंग असम के डोंगरी क्षेत्र में थी। जवान अतुल का शव बुधवार की सुबह जब उनके गृह ग्राम भाद पहुंचा तो उसे देखकर परिजनों और ग्रामीणों ने हत्या का संदेह जताया। शव की गर्दन पर पीछे तरफ एक छोटा सा सुराग था, जबकि सामने की तरफ एक घाव छेद था, जिसे लोग गोली का निशान बता रहे हैं।

अतुल सिंह के पिता ने बताया है कि उन्हें पहले तो हार्ट अटैक से मौत होने की जानकारी दी गई, फिर जब उन्होंने अन्य लोगों से संपर्क किया तो आत्महत्या की कहानी बताई गई। शव के साथ आए सैन्य अफसर ने भी इस मामले में ज्यादा जानकारी होने से इंकार करते हुए स्वजन को आत्महत्या की ही बात बताई, लेकिन जब शव ताबूत से निकाला गया तो गर्दन पर दिखे छेद ने हार्ट अटैक और सुसाइड की गुत्थी के बीच संदेह पैदा कर दिया। अतुल सिंह की पत्नी नेहा सिंह भी बीएसएफ में हेड कान्स्टेबल है और दिल्ली में एनएसजी ट्रेनिंग सेंटर में पदस्थ हैं। असम में सेना के अधिकारियों से जब उन्होंने संपर्क किया था तो पहले तो उन्हें भी तबीयत बिगड़ने की बात बताई गई और जब उन्होंने खुद असम पहुंचने की बात कही तो सेना के अफसरों ने उन्हें गृह ग्राम पहुंचने के लिए कह दिया। पत्नी नेहा, पिता विनोद और मां विमला सिंह समेत परिवार के अन्य तमाम सदस्यों और ग्रामीणों ने सुसाइड की बात पर सवाल खड़ा किया है। स्वजन ने बताया है कि जब उन्हें डेड बॉडी की तस्वीर दिखाई गई थी तो उसमे राइफल पीछे पड़ी थी। उनका आरोप है कि अतुल की हत्या बटालियन में ही किसी ने की है, जिसे अब आत्महत्या का रूप दिया जा रहा है। गांव के लोग दिवंगत जवान के घर के बाहर शव के इर्द-गिर्द जमा हो गए। इसी बीच रैगांव विधायक कल्पना वर्मा और भाजपा की जिला महामंत्री प्रतिमा बागरी भी वहां पहुंच गईं। कानून व्यवस्था के लिहाज से सीएसपी महेंद्र सिंह, टीआई सिविल लाइन अर्चना द्विवेदी भी भारी पुलिस बल के साथ भाद पहुंच गए। स्वजन अड़ गए कि शव का सतना में दोबारा पीएम कराया जाए। हत्या की एफआईआर के साथ अतुल की मौत की सीबीआई जांच कराई जाए। मामला सेना से जुड़ा होने के कारण प्रशासन ने इस पर असमर्थता जताते हुए हाथ खड़े कर दिए। नाराज ग्रामीण शव लेकर सड़क पर आ गए और प्रदर्शन करने लगे। सड़क पर तकरीबन एक घंटे से अधिक समय तक चले प्रदर्शन के दौरान भी बातचीत का सिलसिला जारी रहा। बाद में शव का सतना में दोबारा पीएम कराए जाने पर दिवंगत जवान अतुल की पत्नी नेहा ने सहमति दी। जिसके बाद शव को जिला अस्पताल भेजा गया, जहां चार डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया।

पत्नी के आरोप पर एक नजर

मृतक की पत्नी नेहा सिंह ने कहा कि मैं पोस्टमार्टम करवाकर इनके खिलाफ केस करना चाहती हूं। ये झूठ बोल रहे हैं, उनकी ड्यूटी नहीं थी तो उन्हें ड्यूटी पर क्यों दिखा रहे हैं। अगर ड्यूटी थी भी, तो ठीक है। वे यदि आगे से गोली मारते तो पीछे से निकलती। पीछे से गोली कोई बेवकूफ होगा, वही मारेगा। आप खुद मारकर देखो ना पीछे से गोली मार पाओगे क्या। पिस्टल तो थी नहीं, इंसास राइफल रहती है, इतना तो मुझे भी पता है। उनसे सीनियर हूं मैं। 9 साल मेरी भी जाब को हो गया। मैंने भी कई सुसाइड केस देखे हैं।

दुबारा हुआ पीएम

पुलिस ने बताया है कि सेना ने पीएम कराने के बाद ही शव भेजा था, फिर भी स्वजन की मांग पर दोबारा पीएम कराया गया है। पीएम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

दिसंबर हुई थी शादी

बीएसएफ में कांस्टेबल पदस्थ अतुल सिंह का विवाह बीते दिसंबर में नेहा से हुआ था। नेहा भी बीएसएफ में हैं और बतौर हेड कांस्टेबल दिल्ली में पदस्थ हैं। अतुल ने 2015 में बीएसएफ जॉइन की थी। जब उन्हें पत्नी भी फौजी मिली तो लोग उनके जोड़े की मिसाल देते थे। अतुल अपने माता पिता के इकलौते पुत्र थे। उनकी छोटी बहन की शादी हो चुकी है।

हुई थी पिता से बात

पिता ने बताया कि उनकी गत 4 मार्च को ही रात 8 बजे बेटे से बात हुई थी। वह ठीक था, उससे बातचीत में ऐसा कुछ लगा ही नहीं कि उसके पास आत्महत्या का कोई कारण है। गत 6 मार्च को जब फोन आया और उन्हें हार्ट अटैक की बात बताई गई तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ। उन्होंने कुछ अन्य लोगों से संपर्क किया तो लोग आत्महत्या की कहानी बताने लगे। उन्होंने कहा वे अपने बेटे के लिए शहीद का दर्जा और न्याय चाहते हैं।

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