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मध्यप्रदेश

लंबित न्यायालयीन प्रकरणों के जवाब 30 अप्रैल तक पेश करने निगमायुक्त ने दी हिदायत

जबलपुर। न्यायालयीन प्रकरणों में समय सीमा में न्यायाल के समक्ष प्रतिवेदन एवं जवाब प्रस्तुत न करने पर निगम निगम को लगातार मिलर रही फटकार से सकते में आए निगमायुक्त ने सभी लंबित न्यायालयीन प्रकरणों का जवाब 30 अप्रैल तक हर हाल में पेश करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने ये हिदायत भी दी है कि इसमें जरा सी भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विदित हो कि गत दिवस निगमायुक्त ने 25 से ज्यादा अधिकारियों- कर्मचारियों को नोटिस जारी किए थे ये चेतावनी भी दी थी कि सात दिन के अंदर जबाव प्रस्तुत करें। अब इसकी समय सीमा 15 दिन बढ़ा दी गई है। हालांकि निगमायुक्त स्वप्निल वानखडे ने जवाब पेश करने तक आदेश तक सभी अधिकारियों-कर्मचारियों के वेतन आहरण पर भी रोक लगा रखी है।

निगम की छवि हो रही धूमिलः

निगमायुक्त ने द्वारा की गई समीक्षा के दौरान पाया गया कि न्यायालय के समक्ष समय पर प्रतिवेदन एवं जबाव प्रस्तुत संबंधित अधिकारियों द्वारा नहीं किए जा रहे हैं, जिसके कारण निगम की छवि धूमिल हो रही है। । इस संबंध में पुनः न्यायालयीन प्रकरणों की समीक्षा की गई और 30 अप्रैल तक जबाव प्रस्तुत करने अंतिम चेतावनी दी गई। वहीं अधिकारियों का तर्क है कि न्यायालय में जबाव पेश करने के लिए नगर निगम का विधि विभाग है। जिसमें विधि अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं। अपर आयुक्त ओआइसी है फिर भी समय पर जबाव पेश नहीं किए जा रहे।

इन अधिकारियों को थमाया नोटिसः

जिन अधिकारियों-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है उनमें अधीक्षण यंत्री अजय शर्मा, उपायुक्त पीएनसनखेरे, सहायक आयुक्त अंकिता जैन, स्वास्थ्य अधिकारी भूपेंद्र सिंह, सहायक यंत्री सुनील दुबे, मनीष तड़से, चेतना चौधरी, जागेंद्र सिंह, सहायक अतिक्रमण अधिकारी सागर बोरकर, उपयंत्री अनुपम शुक्ला, पवन ठाकुर, पवन श्रीवास्तव, सतेंद्र दुबे, पंकज अवस्थी, दिग्दर्श सिंह, प्रदीप मरावी, दल प्रभारी नरेंद्र कुशवाहा, कुलदीप त्रिपाठी, ऐहसान खान, लक्ष्मण कोरी, लिपिक आशिमा द्विवेदी, रश्मि आर्मो, दीपक शर्मा, तरूण जैन, मुकेश पटेल शामिल हैं।

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