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मध्यप्रदेश

गृहनिर्माण समितियों के जालसाज अध्यक्ष और संचालक की नहीं हुई गिरफ्तारी

भोपाल। जिले में सहकारिता विभाग द्वारा गड़बड़ी करने वाली सहकारी गृहनिर्माण समितियों के खिलाफ थानों में एफआइआर दर्ज कराई जाती है। इसके साथ ही विभाग द्वारा मामले के लगभग सभी दस्तावेज पुलिस को सौंप दिए जाते हैं, लेकिन थाने में मामला पहुंचने के बाद हालात यह हो जाते हैं कि आरोपितों की कई महीनों तक गिरफ्तारी तक नहीं होती है। जबकि यह मामला सीधे धोखाधड़ी का होता है। पिछले दिनों विभाग द्वारा अलग-अलग थानों में तीन सहकारी समितियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराए हैं। जिनमें से एक मामले में तो एक मंत्री के करीबी रिटायर्ड संयुक्त आयुक्त सहित 45 लोग आरोपित हैं। बताया जा रहा है कि भले ही एफआइआर दर्ज हो गई हो, लेकिन आरोपित कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए अपने रसूख का पूरा उपयोग कर रहे हैं। इससे पुलिस पर दबाव होने की वजह से मामला ठंडा होता नजर आ रहा है।

साढ़े तीन करोड़ से अधिक का किया गबन, नहीं दिए सदस्यों को भूखंड

सहकारिता विभाग के संयुक्त आयुक्त विनोद सिंह ने कलेक्टर के माध्यम से लोक अभियोजक से अनुमति मिलने के बाद ही विभाग के रिटायर्ड संयुक्त आयुक्त अरविंद सिंह सेंगर सहित 45 लोगों के खिलाफ थाना निशातपुरा में धोखाधड़ी की एफआइआर मार्च में दर्ज कराई थी। पिछले साल रिटायर्ड हुए सेंगर को एक मंत्री का करीबी माना जाता है। रिटायर्ड होने के बाद वह मंत्री के निवास और कार्यालय पर मौजूद रहते हैं। इस मामले में अब तक अरविंद सिंह सेंगर सहित अन्य 45 में से एक भी आरोपित को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी है। इन पर आरोप हैं कि 785 सदस्यों वाली आदर्श नगर गृहनिर्माण समिति में 340 सदस्यों को भूखंड आवंटित किए, लेकिन रजिस्ट्री नहीं कराई। बाद में यह भूखंड किसी अन्य को बेच दिए गए और आरोपितों ने आदर्श नगर गृह निर्माण सहकारी समिति का नाम बदलकर कोरल लाइफ कालोनी रख दिया था। आरोपितों ने लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये का गबन किया है।

रिकार्ड में काट-छांट कर किया रुपयों का गबन

अग्रोह गृह निर्माण सहकारी समिति के अध्यक्ष सहित संचालक मंडल के खिलाफ बागसेवनिया पुलिस ने धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में 15 दिन पहले प्रकरण दर्ज किया है। आरोपितों में दस लोग शामिल हैं। अनियमितताएं पाए जाने पर सहकारिता विभाग ने यह एफआइआर दर्ज कराई है। आरोपितों ने आदर्श नगर स्थित इस समिति में 12 मार्च 2013 से हेरफेर करना शुरू किया था। इसमें समिति के अध्यक्ष नरेश अग्रवाल समेत संचालक मंडल के फूलचंद, आनंद, शिखा, कैलाशदास, अनिल, गोपीकृष्ण, आशा, विनय और गोपाल कृष्ण को आरोपित बनाया है। आरोपितों ने रिकार्ड में काट- छांट कर रुपयों का गबन किया था।

अब तक 20 से अधिक समितियों पर दर्ज हो चुकी है एफआइआर

यह पहला अवसर नहीं है जब गृहनिर्माण समितियों पर एफआइआर दर्ज कराई गई है। इससे पहले भी पिछले चार साल में लगभग 20 से अधिक गृहनिर्माण समितियों पर सहकारिता विभाग द्वारा एफआइआर दर्ज कराई जा चुकी है। इनमें से कुछ में आरोपितों की गिरफ्तारी हुई तो अधिकांश में अब तक आरोपितों का पता नहीं चला है। इससे कुछ साल चलने के बाद गृहनिर्माण समिति के मामलों की फाइलें ठंडे बस्ते में चली गईं।

आदर्श, अग्रोहा व एक अन्य गृहनिर्माण समिति सहित तीन के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जा चुकी है। हमने सभी तरह के दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध कराए हैं, जिससे अध्यक्ष व संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके। हालांकि, अब तक आरोपितों की गिरफ्तारी पुलिस नहीं कर सकी है।

-विनोद सिंह, जेआर व प्रभारी उपायुक्त, सहकारिता विभाग

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