गंभीर रूप से बीमार डेढ़ माह के शिशु ने जीती जिंदगी की जंग तीन दिन दिन वेंटिलेटर पर रहा

भोपाल। राजधानी के जेपी अस्पताल में दस दिन पहले 45 दिन के एक बच्चे को स्वजन इलाज के लिए लेकर आए थे। गंभीर निमोनिया से पीड़ित बच्चे की हालत बेहद नाजुक थी। रेस्पिरेटरी फेल्योर के बाद छह दिन तक बच्चे ने मौत से जंग लड़ी , लेकिन डाक्टरों के प्रयासों से अब उसकी अब खतरे के बाहर है। जेपी अस्पताल की पीआइसीयू में पहली बार किसी बच्चे को रेस्पिरेटरी फैल्योर के बाद वेंटिलेटर पर रखा गया था।
सीएस डा. राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि 14 मार्च को 45 दिन के एक बच्चे को परिजन लाए तब उसकी पसलियां बहुत तेज चल रही थीं। उसे तेज बुखार था और सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी। बच्चे को निमोनिया था, जो काफी बिगड़ चुका था। बच्चे की बेहद गंभीर हालत को देखते हुए उसे पीआइसीयू में भर्ती कर सी-पैप मशीन से सांस दी और इलाज शुरू किया। लेकिन, उसकी हालत में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। बच्चे का आक्सीजन लेवल लगातार घटते हुए 65 पर पहुंच गया था। जांच में सीआरपी 135 और डब्ल्यूबीसी काउंट 25 हजार तक आया। ऐसे में उसे 17 मार्च को वेंटिलेटर पर रखा और एंटीबायोटिक्स अपग्रेड कीं। डॉक्टरों की टीम लगातार बच्चे हालत पर नजर रख रही थी। इसका नतीजा यह हुआ कि बच्चे की हालत में सुधार हुआ और वह 3 दिन में वेंटिलेटर से बाहर आया। इसके बाद उसे सी-पैप मशीन इसके उपरांत 22 मार्च को सिर्फ ऑक्सीजन सपोर्ट रखा गया।
डा. राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि वर्तमान मे बच्चा स्वस्थ है एवं मां का दूध भी पी रहा है। रक्त में संक्रमण भी बहुत कम हो गया है और आक्सीजन की मात्रा भी सामान्य बनी हुई है। सांस लेने मे किसी भी प्रकार की तकलीफ नही है।


