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मध्यप्रदेश

नक्सलियों ने की अतिक्रमणकारियों की पिटाई तो दहशत में परिवार संग जंगल छोड़ भाग रहे ग्रामीण

धमतरी। सालों से अतिक्र मण कर जंगल में रह रहे अतिक्रमणकारियों को हटा पाना वन विभाग और पुलिस के लिए चुनौती था, लेकिन नक्सलियों की दहशत से ग्रामीण अब खुद होकर जंगल छोड़ रहे हैं। अतिक्रमणकारियों की नक्सलियों ने जमकर पिटाई कर दी। दहशत में सुबह से अतिक्रमणकारी परिवार समेत जंगल छोड़कर खुद के गांव की ओर लौट रहे हैं।

सीतानदी उदंती टाइगर रिजर्व के सोनारमाल वन परिक्षेत्र के ग्राम इंदागांव की घटना

वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सीतानदी उदंती टाइगर रिजर्व के वन परिक्षेत्र सोनारमाल के अंतर्गत ग्राम इंदागांव है। यहां के जंगल में गरियाबंद क्षेत्र के कुल 69 परिवारों ने 37 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई कर 450 एकड़ जमीन पर कब्जा कर बस्ती बसा लिया था। ये सभी ग्रामीण गरियाबंद जिले के हैं। इनमें से 10 परिवारों के पास पहले से खुद के गांव में जमीन है। इन परिवारों को हटाने वन विभाग व पुलिस सालों से प्रयासरत है, लेकिन नहीं हटा पाया। वन विभाग के अनुसार चार व पांच अप्रैल को अतिक्रमणकारियों को हटाना प्रस्तावित था, इसके लिए पुलिस बल की मांग की गई थी।

इस बीच एक अप्रैल की रात गांव में कुछ नक्सलियों ने पहुंचकर अतिक्रमणकारियों को हटाने धमकी दी। नहीं मानने वाले कुछ परिवारों की बेदम पिटाई भी कर दी। ऐसे में दहशत के चलते कई परिवार तो रात में ही जंगल छोड़कर वहां से भाग निकले। दो अपै्रल की सुबह अतिक्रमण छोड़ने अधिकांश परिवार ट्रेक्टर-ट्राली मंगा चुके हैं और जंगल को खाली कर रहे हैं। नक्सलियों से अब ग्रामीणों में भय बन गया है, ऐसे में कोई भी अतिक्रमणकारी यहां नहीं रूक रहे हैं।

वर्ष 2012 से पहले था जंगल खाली

सीतानदी उदंती टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने अतिक्रमणकारियों द्वारा किए गए दावों की जांच करने के लिए इसरो से वर्ष 2012 के पहले की सेटेलाइट मानचित्र रिपोर्ट मंगाई। रिपोर्ट में स्पष्ट है कि वर्ष 2012 से पहले यहां कोई नहीं था और जंगल में पेड़-पौधा था। इससे स्पष्ट है कि अतिक्रमणकारियों ने कुछ साल पहले ही अतिक्रमण किया है। ऐसे में अतिक्रमणकारियों को मार्च माह से ही हटाने पहल शुरू हो गई थी, लेकिन पर्याप्त मात्रा में पुलिस फोर्स नहीं मिलने की वजह से कार्रवाई रूकी हुई थी। ऐसे में वन विभाग व पुलिस फोर्स द्वारा पुन: चार व पांच अपै्रल को इन अतिक्रणकारियों को हटाना प्रस्तावित था, लेकिन नक्सलियों के मारपीट व दहशत से ही अतिक्रमणकारी अतिक्रमण छोड़ रहे हैं।

इन ग्रामीणों ने किया है अतिक्रमण

सागड़ा गांव के सोनाधर रावत, केंदुमील के राजेन्द्र, विद्याधर, केशबो गोड़, मेमरो रावत, नुकुल, खासरपानी के रूणमणी गोड़, गौरीशंकर गोड़ कोदोभाट, प्रेम गोड़, कल्याण गोड़, धनसिंग गोड़, नकुल गोड़, जनसिंग कमार, नागेश्वर गोड़, रमेश गोड़, टंकधर गोड़, देवेन्द्र रावत, कुमार रावत, बहल राम, सुरेश, श्रीराम गोड़ समेत कुल 69 परिवारों का इस जंगल में कब्जा है।

जंगल छोड़ रहे अतिक्रमणकारी

सीतानदी उदंती टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरूण जैन ने बताया कि इंदागांव में 69 परिवारों ने सालों से कब्जा कर यहां बस्ती बसा लिया था। इन अतिक्रमणकारियों को हटाने पहल की जा रही थी। चार व पांच अपै्रल को हटाना था, लेकिन अब अतिक्रमणकारी स्वयं जंगल छोड़कर जा रहे हैं, यह अच्छी बात है।

नक्सलियों की बढ़ सकती थी दिक्कतें

उल्लेखनीय है कि सीतानदी उदंती टाइगर रिजर्व धमतरी व गरियाबंद जिले के सीमाक्षेत्र पर है। दोनों जिलों के जंगलों पर है। इन जगहों पर नक्सलियों की आवाजाही है। ऐसे में इंदागांव में अतिक्रमण हटाने पुलिस फोर्स आने वाली थी, जो नक्सलियों की दिक्कतें बढ़ जाती। इसे देखते हुए नक्सलियों ने अपनी सुरक्षा के लिए अतिक्रमणकारियों की जमकर पिटाई कर अतिक्रमण छोड़ने मजबूर कर दिया। अतिक्रमण हटाए जाने के बाद नक्सली अब स्वयं को सुरक्षित मान रहे हैं।

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