महिला मोर्चा के कंधों पर लाड़ली बहना

इंदौर। लाड़ली बहना योजना शुरू करके प्रदेश सरकार ने विधानसभा चुनाव के लिहाज से मास्टर स्ट्रोक खेला है, किंतु महिलाओं के बीच इसे स्थापित करना भी उतना ही जरूरी है। लिहाजा सरकार व भाजपा संगठन ने पार्टी के महिला मोर्चा को इस काम के लिए उचित माध्यम माना है। सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के प्रचार-प्रसार व महिला वर्ग को पार्टी से जोड़ने के लिए मोर्चा पदाधिकारियों को महती जिम्मेदारी दी है। इसे लेकर हाल ही में भोपाल में मोर्चा की प्रदेश स्तरीय बैठक हुई, जिसमें इंदौर की पदाधिकारी भी शामिल हुईं। बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंत्र दिया है कि भाई तो रक्षाबंधन पर एक बार अपनी बहन को हजार रुपये की भेंट देते होंगे, लेकिन हमारी सरकार तो हर महीने बहनों को एक हजार रुपये देगी।
प्रमोशन और तबादले में वेतन के लाले
तहसीलदारों को कार्यवाहक डिप्टी कलेक्टर के रूप में प्रमोशन तो मिल गया, लेकिन दूसरे जिलों में तबादला भी हो गया। जिस दिन आदेश हुए, उसी दिन रिलीविंग आर्डर भी थमा दिए गए। पदोन्नत तहसीलदारों ने नई जगह ज्वाइन भी कर लिया। किंतु भोपाल से राजस्व विभाग के आला अधिकारी यहीं गच्चा खा गए। किसी ने यह नहीं सोचा कि तहसीलदार अपने मातहत कर्मचारियों, पटवारियों के वेतन व अन्य भुगतान के आहरण-वितरण अधिकारी (डीडीओ) भी हैं। नए आए तहसीलदारों को डीडीओ के पावर हस्तांतरित हुए, पर कोषालय की प्रक्रिया में मातहतों को अब तक वेतन नहीं मिला है। उधर, कलेक्टोरेट की लेखा शाखा में हुए घोटाले के कारण जिला कोषालय ने भी कई भुगतान रोककर रखे हैं।
नेताओं का कुआं खोजो-गड्ढा खोदो अभियान
पटेल नगर में हुए भयावह बावड़ी हादसे ने राजनीतिक रूप से भी कुछ नेताओं को काम दे दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभिन्न जिलों में प्रशासन अतिक्रमण से घिरे व खतरनाक कुएं-बावड़ियों को चिह्नित कर कार्रवाई कर रहा है। पर कुछ राजनेता अपने विरोधी को निपटाने के लिए गड्ढा खोदो अभियान भी चलाए हुए हैं। वे जमींदोज हो चुके ऐसे कुएं-बावड़ी की जानकारी निकाल रहे हैं, जिन पर विरोधी का कब्जा है। इसी सिलसिले में कुछ नेताओं को नरसिंह बाजार में एक कुएं की जानकारी मिली है। कहा जा रहा है कि यह कुआं होलकर राजवंश के शासकों के मामाजी ने बनवाया था। इससे शहर के मध्य क्षेत्र को पानी भी मिलता था, लेकिन अब यहां शहर के एक बड़े नेता की इमारत खड़ी हो चुकी है। यह कुआं मिलेगा या नहीं, यह अलग बात है, किंतु कुछ नेता इसे खोजने में बड़ी शिद्दत से जुट गए हैं।
लागा चुनरी में दाग…. मिटाऊं कैसे
नगर निगम ने पटेल नगर के बगीचे में कब्जा कर बनाए जा रहे अवैध निर्माण ध्वस्त कर प्रायश्चित करने का प्रयास किया है। मगर इससे रामनवमी पर बावड़ी में हुए हादसे से 36 लोगों की मौत के दाग इतनी आसानी से धुलने वाले नहीं हैं। यह दाग बरसों-बरस निगम के लापरवाह अफसरों की कार्यप्रणाली पर लगे रहेंगे। अफसरों को समझ नहीं आ रहा है कि इस दाग को वे किस विधि धोएं? नगर निगम में भवन निर्माण की अनुमति हो या नक्शा मंजूर कराने का काम, इन शाखाओं का भ्रष्टाचार जगजाहिर है। इस मामले में कुछ अधिकारी और कर्मचारी लोकायुक्त की छापामार कार्रवाई की जद में भी आ चुके हैं, लेकिन बावड़ी हादसा तो सीधे-सीधे लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ का ऐसा उदाहरण बन गया है कि यह बरसों-बरस भुलाए नहीं भुलाया जा सकेगा।


