ब्रेकिंग
बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का नाम अब होगा ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’, ईसी से प्रस्ताव मंजूर सुशासन तिहार शिविर...78 आवेदनों का मौके पर ही निपटारा:मंदिर हसौद में राशन कार्ड, आधार और श्रम कार्ड ... लाखों टन दुर्लभ खनिज की संभावना,छत्तीसगढ़ में देश की पहली ‘निकल-कॉपर’ खदान में 1.3 किमी तक भंडार मिल... सीएम मोहन यादव ने जानकारी दी, एमपी में यूसीसी जल्द लागू होगी l प्रधानमंत्री मोदी जी के सेवा, सुरक्षा और सुशासन के स्वर्णिम 12 साल सुप्रीम कोर्ट सख्त: फैसले लटकाए तो जवाब देना होगा अब फ्री में नहीं चला सकेंगे Facebook, Instagram और व्हाट्सऐप, Meta ने लॉन्च किया रिचार्ज प्लान सुशासन तिहार से सुखराम के चेहरे पर लौटी मुस्कान 5 घरेलु मसाले जो इम्युनिटी बढ़ने में रामबाण से कम नहीं – जानें इस्तेमाल करने का तरीका मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए ग्लाइसेमिक इंडेक्स और ग्लाइसेमिक लोड क्यों महत्वपूर्ण है।
मध्यप्रदेश

नए टैक्स पर असंतोष जारी व्यापारी अब लेंगे विधिक सलाह

इंदौर। राज्य सरकार द्वारा नगर निगम और पालिकाओं के अधिकार क्षेत्र में लगाए गए नए व्यापारिक टैक्स का विरोध अब भी विरोध जारी है। इंदौर के व्यापारिक संगठनों को महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने आश्वसन दिया है। हालांकि व्यापारी इससे संतुष्ट नहीं है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या शासन की ओर से लगाया गया टैक्स नगर निगम अपने स्तर पर रोक और अमल से इन्कार कर सकती है। व्यापारी अब इस मामले पर विधिक सलाह लेने जा रहे हैं।

इंदौर के करीब 100 व्यापारी संगठनों ने बुधवार को टैक्स के विरोध में बैठक बुलाई है। इससे पहले रविवार को एक बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने घोषणा कर दी है कि इंदौर में टैक्स लागू नहीं करेंगे। हालांकि शाम को महापौर द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र का एक मसौदा सामने आया, जिसमें वे मुख्यमंत्री से टैक्स वापस लेने की गुहार भी लगा रहे हैं। इस सबके बाद व्यापारी संशय में है कि वे महापौर के आश्वासन पर भरोसा कैसे करें। अहिल्या चेंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री ने बुधवार को शहर के तमाम व्यापारी संगठनों की बैठक बुलाई है। बैठक निरस्त करने की सूचना अभी नहीं दी गई है।

चेंबर के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल ने कहा कि अब हम विधि विशेषज्ञों से परामर्श कर रहे हैं। यह पता कर रहे हैं कि क्या महापौर के आश्वासन से यह संभव है कि इंदौर में टैक्स कभी भी नहीं लगे। हम सिर्फ फौरी राहत नहीं चाहते।नहीं तो होगा ये कि चुनावी वर्ष में तो निगम इस पर अमल रोक दे लेकिन आगे सरकार का नियम बताकर बीते वर्षों से ही टैक्स लागू कर दे और बकाया वसूली निकाल दे। बीते वर्षों में साइनबोर्ड और विज्ञापन शुल्क को लेकर ऐसी स्थित बन चुकी है। ऐसे में विधिक सलाह आने के बाद भी व्यापारी संगठन इस मामले पर आगे बढ़ेंगे।

दूसरी ओर अंदरखाने से खबर आ रही है कि भाजपा के नेता खुद इस टैक्स के खिलाफ हैं। सत्ताधारी कुनबा हैरान भी है कि आखिर विधानसभा चुनाव के मौसम में सरकार ने ऐसा टैक्स लागू करने का नोटिफिकेशन कैसे जारी कर दिया। इससे खुद भाजपा के प्रति नाराजगी बढ़ने और नुकसान की आशंका साफ नजर आ रही है।

Related Articles

Back to top button