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मध्यप्रदेश

महिला एवं बाल विकास विभाग के हड़तालियों ने दिखाई ताकत, योजना में आ रही परेशानी

जबलपुर। अपनी नौ सूत्रीय मांगों को लेकर महिला बाल विकास विभाग का अमला अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर है। इसी बीच शासन की ओर से कहा जा रहा है कि लाड़ली बहना योजना के मैदानी स्तर पर कार्यान्वयन के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को दायित्व सौंपे गए थे। लेकिन उनके हड़ताल पर जाने से काम प्रभावित हो रहा है, इसलिए उन पर कार्रवाई की जाएगी। इससे आक्रोशित कर्मियों ने बुधवार को जिला मुख्यालय पर संभागीय पदाधिकारियों के साथ प्रदर्शन किया।

30 वर्षों से लंबित हैं मांगः

संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने बताया कि उनकी मांगें 30 वर्षों से लंबित हैं। लगातार अनदेखी के चलते वो शांतिपूर्ण तरीके से क्रमबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। इसी बीच सरकार की ओर से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को कार्रवाई का भय दिखाया जा रहा है। इसी के विरोध में उन्होंने संभागीय आयुक्त और कलेक्टर के सामने अपनी बात रखी। प्रदर्शन में संयुक्त मोर्चा के संभागीय अध्यक्ष प्रशांत पुरावयिा, सीडीपीओ संघ के प्रदेश महासचिव सतीश पटेल, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संघ की प्रांतीय अध्यक्ष विद्या खंगार सहित मंजू दुबे, गौरीशंकर लोहकरे, राजश्री मेश्राम, अयोध्या प्रसाद, आरती यादव, प्रेरणा मर्सकोले आदि मौजूद रहे।

वर्षों से लंबित हैं मांगें:

संयुक्त संघर्ष समिति का कहना है कि मध्यप्रदेश में विभागीय कर्मचारियों का पे-स्केल सबसे कम है। पदोन्नति के मामले भी वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़े हैं। पर्यवेक्षकों की परिवीक्षा अवधि पूर्ण होने के बावजूद उनको नियमित नहीं किया जा रहा।

दूसरी ओर योजना में आ रही परेशानीः

कर्मचारियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हड़ताल पर चले जाने से लाडली बहना योजना के फार्म भरने और क्रियान्वयन को लेकर शासन को परेशानी आ रही है। योजना के शुरूआती दौर पर माना जा रहा था कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भी इसमें मदद ली जाएगी लेकिन शुरुआत से ही इनसे कार्य नहीं लिया जा सका है। इस वजह से भी कई स्थानों पर महिलाएं और लोग फार्म भरने भटक रहे हैं। अब शासन ने भी यह समस्या समझते हुए हड़तालियों को चेतावनी देे दी है।

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