आडिट रिपोर्ट में मांग रहे खत्म करों की जानकारी भी 40 साल पुराना प्रारूप बदलने की जरूरत

इंदौर। देश में सरकारें बदलीं, कर कानून भी बदल गए़ और तो और बजट पेश करने का तरीका बदल गया। नहीं बदली तो आयकर आडिट रिपोर्ट। 40 वर्षों पुराने आयकर आडिट रिपोर्ट के प्रारूप को बदलने की मांग इंदौर से उठी है। शहर के विशेषज्ञों ने सरकार और वित्त मंत्रालय का ध्यान दिलाया है कि आडिट रिपोर्ट में ऐसे करों के भुगतान की जानकारी भी मांगी जा रही है जो आज अस्तित्व में ही नहीं हैं। इंदौर टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन (टीपीए) की विशेषज्ञ कमेटी ने लंबी-चौड़ी आडिट रिपोर्ट के प्रारूप में जरूरी बदलावों के सुझावों पर प्रतिवेदन तैयार कर दिल्ली भेजा है।
आयकर अधिनियिम के तहत अलग-अलग तक के कारोबारियों को वार्षिक आडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होती है। आयकर अधिनियम के तहत आडिट रिपोर्ट की व्यवस्था 1984 से लागू की गई थी। टीपीए के सचिव मनोज पी. गुप्ता के अनुसार लागू होने से लेकर अब तक आडिट रिपोर्ट के प्रारुप में जरूरी संशोधन करने पर भी ध्यान नहीं दिया गया। हाल ये है कि कारोबारियों को करीब 44 पेज की आनलाइन रिपोर्ट में हर खाने की पूर्ति करनी पड़ रही है। आडिट रिपोर्ट में फ्रिंज बेनिफिट टैक्स, वेल्थ टैक्स, सर्विस टैक्स जैसे बिंदुओं पर भी जानकारी मांगी जा रही है। खास बात ये है कि कई वर्षों पहले ही ये सभी कानून समाप्त हो चुके हैं।
33 बिंदुओं में संशोधन की जरूरत
टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन ने केंद्रीय वित्त मंत्री, वित्त सचिव और मंत्रालय को आडिट रिपोर्ट में सुधार पर अपनी रिपोर्ट के साथ ज्ञापन भेजा है। टीपीए के 16 विशेषज्ञ चार्टर्ड अकाउंटेंटों की समिति ने यह रिपोर्ट तैयार की है। कमेटी में शामिल सीए सुनील पी. जैन और सीए अभय शर्मा के अनुसार तीन अध्ययन बैठकों के बाद रिपोर्ट बनी है। इसमें कुल 33 बिंदुओं में संशोधन की जरूरत बताई है। पुराने और खत्म हो चुके कानूनों को हटाने पर ध्यान तो दिलाया ही है, कुछ और सुधार भी बताए हैं।
अलग-अलग कारोबारी जैसे प्रोपाइटरशिप फर्म या कंपनी के लिए अलग-अलग आडिट रिपोर्ट है, लेकिन सभी को पूरी रिपोर्ट और हर कालम भरना होता है। होना ये चाहिए कि जिस कारोबारी से संबंधित जो कालम हों, उसकी रिपोर्ट में उसी का उल्लेख हो। साथ ही आनलाइन आडिट रिपोर्ट में ड्रापडाउन विंडो यानी रिटर्न व अन्य जानकारी सीधे आयकर से लिंक होनी चाहिए। जीएसटी आडिट से मिसमैच की नोटिस प्रक्रिया में सुधार पर मंत्रालय का ध्यान दिलाया गया है।
आल इंडिया फेडरेशन आफ टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन ने भी पुष्टि की है कि पहली बार किसी ने आडिट रिपोर्ट की विसंगतियों पर सरकार का ध्यान खींचा है। सितंबर में आडिट रिपोर्ट जमा होती है। नए वित्त वर्ष के लिए फार्म जारी हो, उससे पहले सुधार की अपेक्षा की जा रही है।


