नर बाघ को खुले जंगल में छोड़ा गेट खोलने के पांच घंटे बाद निकला बाहर

शिवपुरी। माधव राष्ट्रीय उद्यान में 27 वर्ष बाद 10 मार्च को दो बाघ लाए गए थे। तीन दिन बाद पन्ना से एक और बाघिन लाई गई थी। तब से यह तीनों बाघ बलारपुर रेंज में बने एन्क्लोजर में रह रहे हैं। सोमवार को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से आए बाघ को खुले जंगल में मुक्त कर दिया गया है।
नेशनल पार्क में सीसीएफ उत्तमकुमार शर्मा की मौजूदगी में सुबह करीब 11 बजे नर बाघ के बाड़े का गेट खोल दिया गया। हालांकि बाघ उस समय बाड़े से बाहर नहीं आया। करीब पांच घंटे तक इंतजार कराने के बाद शाम चार बजे वह अपने बाड़े से बाहर निकला और जंगल की ओर चला गया।
इस दौरान वहां पर कोई भी कर्मचारी या अधिकारी सामने मौजूद नहीं रहा। थोड़ी दूरी पर एक गाड़ी में बैठकर टीम उसकी निगरानी कर रही थी। एक-दो दिन तक नर बाघ की निगरानी की जाएगी। यह मानीटर किया जाएगा कि वह जंगल का जायजा लेने के बाद किस जगह अपनी टेरेटरी बनाता है।
इसके बाद बाघिन को भी खुले जंगल में मुक्त कर दिया जाएगा। नर बाघ को पहले छोड़ा क्योंकि यह ज्यादा माइग्रेट करते हैं..सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि पहले नर बाघ को छोड़ा गया है। इसे पहले इसलिए छोड़ा गया है क्योंकि नर बाघ अधिक माइग्रेट करते हैं।
एक रात में यह 20 किमी तक की दूरी तय कर लेते हैं। हालांकि यहां बाघ अधिक दूर तक नहीं जाएगा क्योंकि उसे मादा बाघ की मौजूदगी महसूस करा दी गई है। ऐसे में वह इसी क्षेत्र के आसपास रहेगा।
बाघ को रहने के लिए जंगल, भोजन और साथी की जरूरत होती है और यह तीनों चीजें ही सहजता से उसे माधव राष्ट्रीय उद्यान में उपलब्ध हैं। फिलहाल हमारी टीम उस पर 24 घंटे निगरानी रखेगी। सेटेलाइट कालर के जरिए सेटेलाइट से भी उसकी लोकेशन मिलती रहेगी और गाड़ी में निगरानी के लिए रखी गई टीम भी रेडियो सिग्नल के जरिए उसे पूरे समय ट्रैक करेगी।


